Tag: Modi

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भारत नहीं है क्लाइमेट चेंज का दोषी! विकसित देशों की लालसा में बर्बाद होता पर्यावरण!

दुनिया के अंदर क्लाइमेट चेंज को लेकर काफी बातें हो रही हैं. बातों से अधिक आंकड़े डरावने हैं. यह बताते हैं कि इस देश के अंदर भी इसके काफी बुरे

असफल सिद्ध हो चुके समाजवाद की ओर एक आत्मघाती कदम?

भारतीय चिन्तन परंपरा में चार पुरूषार्थ हैं- धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष। अर्थ यानि धन को भी वहीं स्थान हासिल हैं जो धर्म, काम या मोक्ष का है। इसलिए हमारे यहां

पत्रकार जी! अभिव्यक्ति की आज़ादी सबको बराबर है!

हमारे देश के अंदर एक खास वर्ग ऐसा है जिसने अभिव्यक्ति की आजादी को भी “कंडीशनल टर्म्स” में बांट दिया है. कहने का मतलब यह है कि अभिव्यक्ति की आजादी

एक देश: एक चुनाव – व्यावहारिक दिक्कतें और सैद्धान्तिक सवाल

भारत के सशक्त, जीवन्तमान और फलते-फूलते लोकतंत्र के जीवन में वह समय आ गया है जबकि उसकी कुछ कार्य प्रणालियों की समीक्षा हो। सहमति बनाकर उनमें बदलाव हो। इनमें से

नारी-विरोधी सरकार ने कैसे हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में कन्या जन्म दर को बढ़ाया, पढ़ें रिपोर्ट

भाजपा सरकार के ख़िलाफ़ एक एजेंडा चलाया जाता रहा है. उसे अल्पसंख्यक विरोधी, बनिया ब्राम्हण पार्टी, रूढ़िवादी और नारी विरोधी इत्यादि इत्यादि कहा जाता रहा है. हालाँकि एजेंडा चलाने वालों

एक सप्ताह के अंदर तीसरी झूठी ख़बर, छेड़खानी करते पकड़े गए आरोपी ने मामले को दिया साम्प्रदायिक रंग

मोदी सरकार के आते ही ‘मुसलमान डरे हुए हैं’, और ‘अब भगवा आतंकी मुसलमानों का जीना मुश्किल करेंगे” इस तरह की बात की जाने लगी है. इस क़यास में पहले

नकारात्मकता की दासता को छोड़े पत्रकारों का सीमित समूह!

प्रधानमंत्री का एक प्रशंसक ट्रेन में समान बेचता है. घूम-घूमकर मेहनत करके दो वक्त की रोजी रोटी कमाता है. लेकिन इस चक्कर में वह अवैध रूप से सफर करता है.

अपने ही देश के लोगों का विश्वास खोता मीडिया

भूटान के पूर्व प्रधानमंत्री का गुस्सा कुछ दिन पहले हमें देखने को मिला. वह एक भारतीय मीडिया चैनल की गलती पर गुस्सा थे. उनका कहना था कि अगर ऐसा किसी

पॉलिटिक्स ऑफ परफॉरमेंस की झलक है मोदी का नया मंत्रीमण्डल!

अमित शाह देश के गृह मंत्री होंगे! जी हाँ! वही अमित शाह जिनके ऊपर दशकों से आरोप लगते रहे हैं. कांग्रेस राज में अमित शाह गुजरात भाजपा के वो पहले

शिक्षा सुधार हों सरकार की प्राथमिकता

नयी सरकार के एजेंडा की खूब चर्चाएं होती है लेकिन शिक्षा पर कम ही बातें होती हैं. शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है लेकिन इस क्षेत्र में पिछली