Tag: Elections 2019

Total 20 Posts

अब दक्षिण के किले को जीतने की रणनीति

लोकसभा चुनाव के पश्चात् भाजपा अब अपने संगठन को विस्तार देने की योजना के साथ आगे बढ़ रही है. अमित शाह अब गृह मंत्री भी हैं और पार्टी के राष्ट्रीय

एक देश: एक चुनाव – व्यावहारिक दिक्कतें और सैद्धान्तिक सवाल

भारत के सशक्त, जीवन्तमान और फलते-फूलते लोकतंत्र के जीवन में वह समय आ गया है जबकि उसकी कुछ कार्य प्रणालियों की समीक्षा हो। सहमति बनाकर उनमें बदलाव हो। इनमें से

रवीश कुमार पचा नहीं पा रहे कन्हैया की हार, देखें वीडियो

2014 कि चुनावों में लगभग सभी लेफ़्ट इंटेलेकचुअल्स की सबसे बड़ी उम्मीद अरविंद केजरीवाल थे. पर यह उम्मीद कुछ ही समय में निराशा में बदलने लगी. फिर आए हार्दिक पटेल

प्रेस वार्ता में भी दिखी दो परस्पर विरोधी वैचारिक दलों के बीच मुद्दों की समानता, जो बहुत से लोगों की नज़रों से छूट गयी.

शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी और कांग्रेस, दोनों की ही प्रेस कांफ्रेंस थी. कहने सुनने के लिए बहुत से अवसर थे लेकिन एक बहुत बड़ा अंतर इन दोनों ही प्रेस कांफ्रेंसेस में

एकता कपूर को कड़ी टक्कर देती अरविंद केजरीवाल की मर्यादा-विहीन राजनीति

अरविंद केजरीवाल एक ऐसी शख्सियत है जो 2015 के समय इस देश की राजनीति में एक बड़े नाम की तरह उभरे. दिल्ली जैसे केंद्र शासित प्रदेश में भी 70 में

भीड़तंत्र से डरते पत्रकारों के सवाल!

एक लोकतांत्रिक व्यवस्था का मजाक कैसे बनता है. इसका जरा आप एक उदाहरण देखिए. प्रियंका गांधी अपने भाई और कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी

पीसी चाको के बयान से झलक रहा है कांग्रेस का अंतर्द्वंद

आज देश को एक बड़ा फैसला करना है. देश में चुनाव हो रहे हैं तो नई सरकार का चुनाव करना एक बड़ा फैसला होता है. लेकिन आज हम देश के

समाजवादी पार्टी ने की नीचता की हद पार, मोदी विरोध में घर से उठा लाए दो साल का बच्चा

समादवादी पार्टी के नेताओं द्वारा आए दिन शर्मनाक बयान तो दिए ही जाते हैं पर हाल ही कुछ ऐसा हुआ जो इन बयानों से परे था. 24 अप्रैल को अखिलेश

यूँ नहीं बन गए मोदी हिंदू हृदय सम्राट

“श्वेता! मैं आशुतोष बोल रहा हूँ. मैं ये जानना चाहता हूं कि क्या ये आचार संहिता का उल्लंघन नहीं है? क्या इस समय धर्म के नाम का इस्तेमाल सही है.“

ईवीएम में ख़राबी की शिकायत फिर निकली झूठी, युवक गिरफ़्तार

बीजेपी सरकार आने के बाद से ही सभी विपक्षी पार्टियों को EVM में ख़ामी नज़र आने लगी है. शायद इसलिए क्यूँकि अब बूथ लूटने की वारदात को अंजाम नहीं दिया