Category: PM Modi

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16 मई 2014 का वो दिन, जब बदल गयी भारतीय राजनीति की धुरी!

आज की तारीख है 16 मई 2019. मात्र 5 साल पहले इसी दिन देश ने एक बड़ा चुनाव किया था. 5 साल पहले इसी दिन से हमारे देश की राजनैतिक

अपनी नाकामियों को अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकारता राहुल गांधी का ‘निष्पक्ष’ इंटरव्यू!

अभी रविश कुमार जी का राहुल गांधी द्वारा दिया गया इंटरव्यू देखा. वैसे तो कई लोगों की यह मांग रही है कि प्रधानमंत्री मोदी को रवीश कुमार को इंटरव्यू देना

लिबरल वर्ग के हीरो बनते यशवंत सिंहा!

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और अटल बिहारी वाजपेई के समय केंद्रीय मंत्री रहे यशवंत सिन्हा ने नरेंद्र मोदी के ऊपर एक और हमला किया है. इस बार इतिहास

एडिटर्स गिल्ड का खानापूर्ति करता पत्र, बंगाल में हुई पत्रकारों के ख़िलाफ़ हिंसा में ममता दीदी से नहीं कोई सवाल

कुछ ही दिन पहले एडिटर्स गिल्ड के चीफ़ शेखर गुप्ता ने ममता बैनर्जी के बारे में लिखा था कि ममता ही मोदी शाह की ज़हरीली राजनीति का एक मात्र जवाब

चुनाव में हुई बीजेपी समर्थकों के ख़िलाफ़ हिंसा, ज़बरदस्ती दिलवाया गया कांग्रेस को वोट

चुनाव के समय हिंसा होना तो आम बात हो गई है, लोकतंत्र के इस उत्सव में जहाँ एक तरफ़ लोगों को अपनी मर्ज़ी से वोट डालने की आज़ादी होती हैं

भावनाओं का तर्कहीन ‘कमर्शियलाइज़ेशन’ करते आधुनिक युग के डिजिटल पत्रकार

दोस्तों जरा एक बात सोचिये. यदि रास्ते पर कोई चलता हुआ व्यक्ति लड़खड़ा कर गिर जाता है, तो क्या हम जमीन को दोष देंगे? एक तर्कशील व्यक्ति यही कहेगा कि

अतीत के पन्नों से राजीव गांधी द्वारा चलाया गया नफ़रत का अभियान

पिछले दो दिनों से अचानक से स्वर्गीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बारे में तरह तरह की तारीफ़े सुनने को मिल रही हैं . कारण नरेंद्र मोदी द्वारा उन्हें भ्रष्ट कहा

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पैरोकारों को चुभ गयी एक युवा की अभिव्यक्ति

इस देश के अंदर चुनावी माहौल के बीच में यह देखना बहुत दिलचस्प हो गया है कि लोग किस प्रकार से अपने पसंदीदा नेता का प्रचार कर रहे हैं. नेताओं

अपने राजनैतिक अंत की तरफ बढ़ती ममता

बंगाल में लोकतंत्र का यह हाल दयनीय है. गुंडागर्दी, अलोकतांत्रिक व्यवस्था और ममता बनर्जी का निरंकुश शासन बंगाल की आत्मा को छलनी कर रहा है. यह बंगाल का एक दुर्भाग्य

मुद्दों के अकाल के बीच में चुनाव प्रभावित करते बचकाने तर्क

देश के अंदर राजनीतिक मुद्दों को लेकर हमेशा से एक बड़ी बहस चलती आई है. लोगों का अलग मत होने के पश्चात भी हमारे देश में हमेशा से एक राजनैतिक