Category: PM Modi

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एक देश: एक चुनाव – व्यावहारिक दिक्कतें और सैद्धान्तिक सवाल

भारत के सशक्त, जीवन्तमान और फलते-फूलते लोकतंत्र के जीवन में वह समय आ गया है जबकि उसकी कुछ कार्य प्रणालियों की समीक्षा हो। सहमति बनाकर उनमें बदलाव हो। इनमें से

नारी-विरोधी सरकार ने कैसे हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में कन्या जन्म दर को बढ़ाया, पढ़ें रिपोर्ट

भाजपा सरकार के ख़िलाफ़ एक एजेंडा चलाया जाता रहा है. उसे अल्पसंख्यक विरोधी, बनिया ब्राम्हण पार्टी, रूढ़िवादी और नारी विरोधी इत्यादि इत्यादि कहा जाता रहा है. हालाँकि एजेंडा चलाने वालों

एक सप्ताह के अंदर तीसरी झूठी ख़बर, छेड़खानी करते पकड़े गए आरोपी ने मामले को दिया साम्प्रदायिक रंग

मोदी सरकार के आते ही ‘मुसलमान डरे हुए हैं’, और ‘अब भगवा आतंकी मुसलमानों का जीना मुश्किल करेंगे” इस तरह की बात की जाने लगी है. इस क़यास में पहले

नकारात्मकता की दासता को छोड़े पत्रकारों का सीमित समूह!

प्रधानमंत्री का एक प्रशंसक ट्रेन में समान बेचता है. घूम-घूमकर मेहनत करके दो वक्त की रोजी रोटी कमाता है. लेकिन इस चक्कर में वह अवैध रूप से सफर करता है.

पॉलिटिक्स ऑफ परफॉरमेंस की झलक है मोदी का नया मंत्रीमण्डल!

अमित शाह देश के गृह मंत्री होंगे! जी हाँ! वही अमित शाह जिनके ऊपर दशकों से आरोप लगते रहे हैं. कांग्रेस राज में अमित शाह गुजरात भाजपा के वो पहले

शिक्षा सुधार हों सरकार की प्राथमिकता

नयी सरकार के एजेंडा की खूब चर्चाएं होती है लेकिन शिक्षा पर कम ही बातें होती हैं. शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है लेकिन इस क्षेत्र में पिछली

एग्जिट पोल्स पर ही बिफर पड़े पत्रकारिता के ‘नैतिक पुरुष’; टीवी स्टूडियो में जारी हुआ वैचारिक ब्लैकआउट

पत्रकारिता के ‘नैतिक पुरुष’ इस समय विचित्र ‘जात संकट’ में फंसे हुए हैं. समझ में यह नहीं आ रहा है कि पांच साल एड़ियां रगड़ने के बाद भी वैचारिक मतभेद

इतिहास के झरोखे से भविष्य की छवि दिखाते चुनावी इंटरव्यू!

किसी प्रतिनिधि की क्षमता के ऊपर प्रश्न उठेंगे तब उसकी छवि को न्यूज़ चैनल के डिबेट्स और इंटरव्यू के पैमाने पर ही मापा जाएगा. कोई भी प्रतिनिधि कितने बड़े स्तर

भगवा के विरुद्ध सेक्युलर राजनीतिज्ञों की असहिष्णुता

नरेंद्र मोदी की केदारनाथ यात्रा पर विपक्ष द्वारा काफी कटाक्ष किया जा रहा है. ऐसा बोला जा रहा है कि अपनी यात्रा में कैमरा ले जाने का क्या तुक था.

प्रेस वार्ता में भी दिखी दो परस्पर विरोधी वैचारिक दलों के बीच मुद्दों की समानता, जो बहुत से लोगों की नज़रों से छूट गयी.

शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी और कांग्रेस, दोनों की ही प्रेस कांफ्रेंस थी. कहने सुनने के लिए बहुत से अवसर थे लेकिन एक बहुत बड़ा अंतर इन दोनों ही प्रेस कांफ्रेंसेस में