Category: OpEd

Total 206 Posts

असफल सिद्ध हो चुके समाजवाद की ओर एक आत्मघाती कदम?

भारतीय चिन्तन परंपरा में चार पुरूषार्थ हैं- धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष। अर्थ यानि धन को भी वहीं स्थान हासिल हैं जो धर्म, काम या मोक्ष का है। इसलिए हमारे यहां

अब दक्षिण के किले को जीतने की रणनीति

लोकसभा चुनाव के पश्चात् भाजपा अब अपने संगठन को विस्तार देने की योजना के साथ आगे बढ़ रही है. अमित शाह अब गृह मंत्री भी हैं और पार्टी के राष्ट्रीय

जिस बात को मानने का साहस भारतीय मीडिया में नहीं उसे एक बांग्लादेशी पत्रकार ने कहा.

हाल ही में आए चुनाव नतीजों के बाद लिबरल मीडिया वही ग़लती दुहरा रहा है जो उसने 2014 में की थी. भाजपा की सत्ता को अल्पसंख्यकों के लिए ख़तरा बताने

मुसलमान सांसद नहीं, ज़िम्मेदार सांसद ढूंढिए पत्रकार महोदय!

2019 के लोकसभा चुनावों में बड़े-बड़े धुरंधरों को धूल चाटनी पड़ी. निश्चित रूप से वह इसकी समीक्षा अवश्य करेंगे, लेकिन उनके समर्थकों और कुछ नेताओं में स्पोर्ट्समैन स्पिरिट की कमी

स्मृति ईरानी की कर्मठता से अन्याय करती मीडिया चैनलों की हेडलाइंस!

जब आप किसी राजनैतिक पार्टी की जीत या हार की रिपोर्टिंग कर रहे होते हैं, तब आपको यह ध्यान रखना होता है कि अपने शब्दों में आप बहुत सजगता बरतें.

देश के विपक्ष को फिर एकबार संदेश देता राजनीति के पितामह का ऐतिहासिक भाषण!

उस कालखंड को याद करिए जब अटल बिहारी वाजपई सदन में सोनिया गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों का उत्तर दे रहे थे. अपना जवाब देते हुए अटल बिहारी वाजपेई ने

गठबंधन ने ठगा अखिलेश यादव को, बसपा के साथ के बाद भी सपा की एक भी सीट नहीं बढ़ी

2014 के लोकसभा चुनाव में मायावती जी की बहुजन समाजवादी पार्टी को एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हुई थी. 2019 में गेस्ट हाउस कांड और अपना तिरस्कार भुला

रवीश कुमार पचा नहीं पा रहे कन्हैया की हार, देखें वीडियो

2014 कि चुनावों में लगभग सभी लेफ़्ट इंटेलेकचुअल्स की सबसे बड़ी उम्मीद अरविंद केजरीवाल थे. पर यह उम्मीद कुछ ही समय में निराशा में बदलने लगी. फिर आए हार्दिक पटेल

परिवारवाद की स्मृति पर ‘ईरानी’ का ऐतिहासिक पलटवार!

स्मृति ईरानी ने ‘गाँधीयों का दुर्ग’ गिरा दिया है. पांच वर्षों में उनका अथक परिश्रम और अमेठी की जनता के लिए उनका समर्पण आज फलित हुआ है. यह एक अभूतपूर्ण