Category: Journalism

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अपनी नाकामियों को अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकारता राहुल गांधी का ‘निष्पक्ष’ इंटरव्यू!

अभी रविश कुमार जी का राहुल गांधी द्वारा दिया गया इंटरव्यू देखा. वैसे तो कई लोगों की यह मांग रही है कि प्रधानमंत्री मोदी को रवीश कुमार को इंटरव्यू देना

क्वीन एलिज़ाबेथ को भी मुँह चिढ़ाती लक्ष्यद्वीप में राजीव गाँधी की वो पार्टी…

लक्ष्यद्वीप में दस लोगों की पार्टी चल रही है. पार्टी में अन्य मेहमानों को भी बुलाया जाता है. मेहमानों की लिस्ट देखिये – अमिताभ बच्चन, जया बच्चन और उनके तीन

भीड़तंत्र से डरते पत्रकारों के सवाल!

एक लोकतांत्रिक व्यवस्था का मजाक कैसे बनता है. इसका जरा आप एक उदाहरण देखिए. प्रियंका गांधी अपने भाई और कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी

मुद्दों के अकाल के बीच में चुनाव प्रभावित करते बचकाने तर्क

देश के अंदर राजनीतिक मुद्दों को लेकर हमेशा से एक बड़ी बहस चलती आई है. लोगों का अलग मत होने के पश्चात भी हमारे देश में हमेशा से एक राजनैतिक

ओपिनियन पोल के पीछे का गणित

लोकसभा चुनाव 2019 आरम्भ हो चुके है. हालांकि इसके नतीजे तो 23 मई को ही पता चलेंगे लेकिन इन डेढ़ महीनों में हम ओपिनियन पोल्स की बाढ़ देखेंगे. हर चैनल

लोकतंत्र की जड़ों पर प्रहार है इंटेलेक्चुअल असहिष्णुता!

लोकतंत्र में विभिन्न मुद्दों पर चर्चाएं होती हैं. यहां दूसरे की बातों को उतनी ही ध्यान से सुना जाता है जितने ध्यान से अपनी बातों को रखा जाता है. विचारों

कांग्रेस नेताओं ने बढ़ती मुस्लिम आबादी की बात क़बूली, माँगा मुस्लिम नेता के लिए टिकट

ध्रुवीकरण तो होता ही है. पर कांग्रेस और लेफ्ट की पार्टियों द्वारा जिस तरह का ध्रुवीकरण किया जाता है उसकी कोई सीमा नहीं. दिल्ली के पांच वरिष्ठ नेताओं ने राहुल

हलो मुख्यमंत्री जी! हियां भी देख ल्यो!

अभी सोशल मीडिया पर एक वीडियो चल रहा है. हवाई जहाज़ के अंदर दिल्ली के जिल्ले सुभानी अरविंद केजरीवाल बैठे हुए हैं. बगल में उनके PA बैठे हुए हैं. कहानी

भावनाओं में बह रहे संपादक जी को लोपक प्रणाम!

रोज़गार मुक्त राष्ट्रवाद! यह किसी भाजपा विरोधी पार्टी का नारा नहीं है बल्कि ‘दैनिक भास्कर’ का दिया हुआ जजमेंट है. आप सोच रहे होंगे कि अखबार कोई जज तो है

पत्रकार महोदय! प्रचार नहीं जागरूकता है. कभी आप भी फैलाया करो…जागरूकता!

चुनावी मौसम है भाई साहब. सब कुछ चल रहा है. विज्ञापन का दौर चल रहा है. कांस्पीरेसी थ्योरी की तो इन्तिहा हो गई है. तमाम लेख बता रहे हैं कि