Category: contemporary

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माल्या पर शिंकजा कसा, जल्द हो सकती हैं घरवापसी

भारतीय जांच एजेंसियां व ईडी जिस प्रकार भगोड़ों पर नकेल कसने का प्रयास कर रही हैं, उससे लगता है कि जल्द ही सभी भगोड़े भारतीय जेल में होंगें. भारत सरकार सभी

दर्पण

शरद; “हां तो प्रेम, तुम्हारी शादी का क्या हुआ ?” प्रेम; “यार, फिक्स हो गयी. इसी अप्रैल में है.” शरद; “अर्रे, तुम फ़ोन पर तो कह रहे थे कि घरवालों ने जाने कहाँ फसा

ठप्रेक: एक अनूठी विधा

यदि आप ट्विटर पर हैं और यहाँ कई बार ट्रेंड करने वाले #सतपरकास को नहीं जानते तो आपका ट्विटरीय जीवन बिना सुकर्मों वाला मनुज तन धरने जैसा है. जितने फॉलोवर्स से लोग

वर्तमान पत्रकारिता या चाटुकारिता?

यदि साहित्य को समाज का दर्पण कहा जाता है तो पत्रकारिता स्वच्छ जल कहा जाना चाहिए. पत्रकारिता का दायित्व समाज के संघर्ष को प्रदर्शित करना है. पत्रकार राष्ट्र के सरोकार

क्या अनुच्छेद 35A भारतीय संविधान के साथ एक धोखा है?

अनेकता में एकता की विशिष्ट पहचान रखने वाला एकमात्र राष्ट्र है भारत. यहाँ सभी को समानता का अधिकार प्राप्त है किन्तु एक राज्य ऐसा है जहाँ समानता के अधिकार का

सरनेम बदला या व्यक्तित्व?

विवाह के बाद दीपिका पादुकोण ने अपना नाम नहीं बदला लेकिन रणबीर सिंह रणबीर ‘पादुकोण’ होने को तैयार हो गए हैं. आधुनिक भारत की आधुनिक सोच का एक उदाहरण यह

क्या अल्पसंख्यक खतरे में है?

सवेरे ट्विटर खोला तो नज़र पड़ी देश की एक दुखदायक घटना पर. एक मोहतरमा को परीक्षा में केवल इसलिए नहीं बैठने दिया गया क्योंकि उन्होंने हिजाब पहन रखा था. वैसे

कूल डूड वोटर & इकोसिस्टम

एक आम 21-22 साल के नौजवान से आप राजनीति के बारे में कोई सवाल पूछें तो वह आपको बड़े अनमने ढंग से जवाब देगा; “यू नो पॉलिटिक्स इस नॉट माई