Category: विचार

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अपने ही देश के तथ्यों को नकार एजेंडे पर भागती मलाला!

पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई को कौन नहीं जानता है. वो लड़की जिसने सिर पर गोली लगने के बाद भी न केवल जीवित रहने का संघर्ष किया बल्कि उसमें कामयाब भी

अहकाम-ए-आलमगीरी में औरंगज़ेब ने खुद लिखी शिवाजी से हार की टीस!

मुग़ल सल्तनत में सबसे क्रूरतम शासकों में से एक का नाम औरंगज़ेब था. वो औरंगज़ेब जिससे देश में बहुत से लोग सहानुभूति रखते हैं. टीवी डिबेट्स में बहुत से ऐसे

राष्ट्रविरोधी विचारधारा के पोषित “स्तंभ”

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में खड़ा भारतीय मीडिया इस समय एक ऐसे दौर से गुज़र रहा है जहां उसकी विश्वसनीयता दांव पर लगी है. TRP वो सत्य है

सोशल मीडिया पर “सस्ता नैरेटिव” सेट करती कांग्रेस!

सोशल मीडिया की सबसे खास बात यह है कि यह विचारो से भी तेज़ एक जगह से दूसरी जगह पहुंच जाता है. यह कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं होगा कि सोशल

सनातन संस्कृति के अवशेषों पर खड़ा विदेशी आक्रमणकारियों का दम्भ!

भारत को विभिन्न विशेषणों से सुशोभित किया जाता रहा है. जिसको इसमें धन और संपदा दिखी दी, उसने इसे ‘सोने की चिड़िया’ बोला. जिसने इसमें प्राकृतिक संसाधनों का भंडार देखा, उसने इसे ‘धरती का स्वर्ग’ कहा.

अरुण जेटली : “तुम आये इतै न कितै दिन खोये?”

मैंने सुनहरी बाग़ रोड की तरफ अपनी कार मोड़ी ही थी कि अचानक से मेरे मोबाइल की घंटी बजी और दूसरी ओर आवाज़ आई कि माननीय सूचना और प्रसारण मंत्री

कालचक्र की फांस में फंसे चिदंबरम!

इस समय देश के पूर्व गृह मंत्री और कांग्रेस नेता पी.चिदंबरम के लिए समय स्थितियों के अनुकूल नहीं है. UPA 1 और 2 क शासनकाल के दौरान किये हुए कुछ

असफल सिद्ध हो चुके समाजवाद की ओर एक आत्मघाती कदम?

भारतीय चिन्तन परंपरा में चार पुरूषार्थ हैं- धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष। अर्थ यानि धन को भी वहीं स्थान हासिल हैं जो धर्म, काम या मोक्ष का है। इसलिए हमारे यहां

जब सरदार पटेल ने मुसलमानों के लिए अलग चुनावी व्यवस्था पर ड्राफ्टिंग कमेटी के ही सदस्य को सुनाई खरी-खरी

देश के सामाजिक और संघीय ढांचे के मध्य हमेशा से ही यह बात उठती आई है कि आखिर अधिकारों को लेकर चर्चा कितने चरणों में पूरी की जा सकती है?