Category: राजनीति

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सोशल मीडिया पर “सस्ता नैरेटिव” सेट करती कांग्रेस!

सोशल मीडिया की सबसे खास बात यह है कि यह विचारो से भी तेज़ एक जगह से दूसरी जगह पहुंच जाता है. यह कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं होगा कि सोशल

कालचक्र की फांस में फंसे चिदंबरम!

इस समय देश के पूर्व गृह मंत्री और कांग्रेस नेता पी.चिदंबरम के लिए समय स्थितियों के अनुकूल नहीं है. UPA 1 और 2 क शासनकाल के दौरान किये हुए कुछ

जब सरदार पटेल ने मुसलमानों के लिए अलग चुनावी व्यवस्था पर ड्राफ्टिंग कमेटी के ही सदस्य को सुनाई खरी-खरी

देश के सामाजिक और संघीय ढांचे के मध्य हमेशा से ही यह बात उठती आई है कि आखिर अधिकारों को लेकर चर्चा कितने चरणों में पूरी की जा सकती है?

क्या भारत नहीं था आक्रमणकारी? इतिहास का कहना कुछ अलग है

कारगिल विजय दिवस की संध्या पर एक कार्यक्रम में बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस देश ने कभी किसी के ऊपर हमला नहीं किया. हम हमेशा से अहिंसा

बुद्धिजीवी वर्ग के सन्नाटे में सवाल पूछती दो जिंदगियां!

पिछले दिनों देश के दो इलाकों में दो घटनाएं हुई. पुणे और दिल्ली के अंदर ऐसा रक्तपात हुआ, जिसका कोई उदाहरण नहीं दिया जा सकता. वैसे देश में अपराध होना

रामलाल का कद छोटा नही हुआ है, संघ उनके कौशल को जानता है !

वर्तमान भारतीय राजनीति में ऐसे बिरले लोग ही हैं जो महत्वाकांक्षा, स्वार्थ और लाभ से इतर मूल्य पर आधारित राजनीति को प्रमुखता देते हैं. सियासत में रहकर अजातशत्रु बने रहना और इस

जब अपने ही बड़े भाई से लड़ बैठे थे सरदार पटेल!

देश में विचारधाराओं में भिन्नता कोई नई बात नहीं है. विचारों की भिन्नता ने ही समाज में चल रहे एक नैसर्गिक विचारशून्यता को झकझोरकर क्रांति की नई इबारत लिखी है.

अब दक्षिण के किले को जीतने की रणनीति

लोकसभा चुनाव के पश्चात् भाजपा अब अपने संगठन को विस्तार देने की योजना के साथ आगे बढ़ रही है. अमित शाह अब गृह मंत्री भी हैं और पार्टी के राष्ट्रीय

एक देश: एक चुनाव – व्यावहारिक दिक्कतें और सैद्धान्तिक सवाल

भारत के सशक्त, जीवन्तमान और फलते-फूलते लोकतंत्र के जीवन में वह समय आ गया है जबकि उसकी कुछ कार्य प्रणालियों की समीक्षा हो। सहमति बनाकर उनमें बदलाव हो। इनमें से