Category: दुर्योधन की डायरी

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रामायण का अनसुना प्रसंग- सबका साथ, सबका विश्वास

राजा दशरथ का दरबार लगा था. सुमन्त और गुरु वशिष्ठ नीतिशास्त्र के किसी अध्याय पर चर्चा कर रहे थे. दशरथ दोनों महानुभावों को सुनते हुए आनंद खोजने का प्रयास कर

महाभारत का अनसुना प्रसंग – महिला सुरक्षा

द्रौपदी चीर-हरण को सत्ताईस दिन बीत चुके थे. चीर-हरण में असफल उप युवराज दुशासन लगभग डिप्रेस्ड हो चुके थे. हस्तिनापुर एक्सप्रेस के प्रबंध संपादक अबतक कुल चार बार चीर-हरण को

महाभारत का अनसुना प्रसंग – लज्जित युवराज

केशव हस्तिनापुर से “याचना नहीं अब रण होगा” बोलकर जा चुके हैं. युद्ध होना अब निश्चित है. कौरव और पांडव अपने-अपने गठबंधन करने में लगे हुए हैं. युवराज दुर्योधन श्रीकृष्ण

दुर्योधन की डायरी – महाभारत का अनसुना प्रसंग

द्रोणाचार्य ने कौरवों और पांडवों को अपनी पाठशाला में विद्यालाभ दिया. समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, नागरिकशास्त्र, विज्ञान, साहित्य इत्यादि के साथ-साथ उन्हें शस्त्र-विद्या में पारंगत किया. जब राजकुमारों की शिक्षा-दीक्षा संपन्न हुई

दुर्योधन की डायरी – चक्रव्यूह

तेरहवाँ दिन.. षड्यंत्र के माहिर कौरवों ने पुनः चक्रव्यूह की रचना की. कौरवों को रचनात्मकता के नाम पर उन्हें कुछ भी पता था तो वह था षड्यंत्र और चक्रव्यूह की

महाभारत का अनसुना प्रसंग – सइंटिफ़िक टेम्पर

अर्जुन ने भ्राताश्री युधिष्ठिर को प्रणाम किया और तपस्या करने के लिए विदा ली. उन्होंने एक स्थान पर बैठकर विकट तपस्या की. धीरे-धीरे उन्होंने भोजन त्याग दिया. उनकी तपस्या से

दुर्योधन की डायरी – गंगापुत्री दुशाला

“याचना नहीं अब रण होगा” कहकर केशव जा चुके हैं. पांडव और कौरव, दोनों ओर से युद्ध की तैयारियाँ आरंभ हो चुकी हैं. दुर्योधन ने अधिकतर राजाओं को अपनी ओर

दुर्योधन की डायरी – युवराज की प्रेस कॉन्फ्रेंस

महाभारत को कुछ दिन ही रह गए हैं. दुर्योधन श्रीकृष्ण से सहायता माँगने द्वारका जा पहुँचा है. उधर जैसे ही पत्रकारों को ख़बर मिली उन्होंने ठान लिया कि ये श्रीकृष्ण

दुर्योधन की डायरी – हठ का सौंदर्यशास्त्र

हस्तिनापुर राजदरबार की बैठक चल रही है. उपस्थित हैं; महाराज धृतराष्ट्र, पितामह, महामंत्री विदुर, कृपाचार्य, द्रोणाचार्य, युवराज दुर्योधन, उप युवराज दुशासन, शकुनि और संजय. महाराज धृतराष्ट्र सिंहासन के दोनों हत्थों

दुर्योधन की डायरी – शांतिपुरुष

महाभारत का तेरहवाँ दिन; दुशासन, जयद्रथ और दुशासन-पुत्र द्रुमसेना ने अभिमन्यु को मारा. ……………… महाभारत का चौदहवाँ दिन; भीम ने द्रुमसेना को मार डाला. पंद्रहवें दिन संध्या बेला दिन का