Category: इतिहास

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हार : स्त्री की अपने गहनों से भावनात्मक जुड़ाव की एक कहानी

छह महीने भी नहीं हुए थे नई बहू को, घर की हर बात उसे समझ आ गयी थी. धीरे धीरे घर में होने वाले हर निर्णय में उसकी राय भी ली

भगत सिंह आज भी जिंदा हैं और सदा रहेंगे!

1857 की क्रांति के बाद से जब भारत के रणबांकुरों ने हथियार उठाना शुरू किया, उसी समय यह सिद्ध हो चुका था कि अब यहां से आज़ादी दूर नहीं है.

संख्या से नहीं, जिगरे से बनते हैं ‘केसरी’

केसरी! शहीदी का रंग है. बलिदान का रंग है. इसी रंग को बड़े पर्दे पर ले कर आये हैं अक्षय कुमार. यह देख कर अच्छा लगा कि टिपिकल कमर्शियल फिल्मों

जन्मदिवस की बधाई, नेताजी!

नेताजी को एक शब्द में परिभाषित करना हो तो वह शब्द होगा- विद्रोह. अन्याय और असमानता के विरुद्ध विद्रोह और संघर्ष ही नेताजी के जीवन का ध्येय रहा. प्रेसिडेंसी कॉलेज

उत्तर पूर्व की मातृवंशीय परम्परा

सवाल यह उठता है कि वो लोग कौन हैं जो भारत की सनातन परंपरा में स्त्रियों की कोई जगह न होने की बात करते हैं? उनके सतही ज्ञान को उत्तर-पूर्व के समूहों की जेनेटिक संरचना मुँह चिढ़ाती प्रतीत होती है.

अंडरस्टैंडिंग मोदिनोमिक्स…(पार्ट 1)

भारत कभी सोने की चिड़िया कहा जाता था. आज वह दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से संघर्ष कर रहा है. निश्चित रूप से इसका एक कारण विदेशी आक्रांताओं का आक्रमण और

अकबर गाजी या अकबर महान?

राजस्थान सरकार के नवनियुक्त शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद डोटासरा ने कहा है कि वह राजस्थान बोर्ड के इतिहास की पुस्तकों से ‘भगवाकरण’ मिटायेंगे. पत्रकारों द्वारा यह पूछने पर कि क्या मंत्रीजी

कोरेगाँव का जश्न क्यों?

जून, 1817 की संधि के मुताबिक ही मराठा संघ के ऊपर से पेशवा का नियन्त्रण समाप्त हो गया था. 5 नवम्बर, 1817 के युद्ध मे पेशवा अपनी राजधानी पुणे भी

खिलाफत की भूल के भयावह परिणाम- अंक 2

अंक 1 से आगे … खिलाफत आंदोलन आरम्भ से ही कमोबेश हास्यास्पद था. हास्यास्पद इस मायने में कि जब भारत के शासन से जुड़े मामलों में भी ब्रिटिश सरकार भारतीयों