उमेश उपाध्याय

उमेश उपाध्याय

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उमेश उपाध्याय एक वरिष्ठ पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक और विचारक हैं। उन्होंने अपना व्यावसायिक जीवन दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के प्राध्यापक के रूप में प्रारम्भ किया था। उन्होंने देश के कुछ प्रतिष्ठित मीडिया प्रतिष्ठानों जैसे पीटीआई, ज़ी टीवी, होम टीवी, सब टीवी, जनमत और नेटवर्क 18 में उच्च प्रशासनिक और सम्पादकीय पदों पर कार्य किया है। वे अक्टूबर 2015 तक नेटवर्क 18 के अध्यक्ष भी रहे।

अरुण जेटली : “तुम आये इतै न कितै दिन खोये?”

मैंने सुनहरी बाग़ रोड की तरफ अपनी कार मोड़ी ही थी कि अचानक से मेरे मोबाइल की घंटी बजी और दूसरी ओर आवाज़ आई कि माननीय सूचना और प्रसारण मंत्री

असफल सिद्ध हो चुके समाजवाद की ओर एक आत्मघाती कदम?

भारतीय चिन्तन परंपरा में चार पुरूषार्थ हैं- धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष। अर्थ यानि धन को भी वहीं स्थान हासिल हैं जो धर्म, काम या मोक्ष का है। इसलिए हमारे यहां

एक देश: एक चुनाव – व्यावहारिक दिक्कतें और सैद्धान्तिक सवाल

भारत के सशक्त, जीवन्तमान और फलते-फूलते लोकतंत्र के जीवन में वह समय आ गया है जबकि उसकी कुछ कार्य प्रणालियों की समीक्षा हो। सहमति बनाकर उनमें बदलाव हो। इनमें से

लंका विस्फोट: चन्द सवाल आम मुसलमानों से

श्रीलंका में हुए बम विस्फोटों ने दुनिया को दहला दिया है। ईस्टर के दिन हुए बम धमाकों में तीन सौ से ज्यादा लोग मारे गए हैं और कई सौ घायल

2019: पहला डिजिटल यानि बिना बिचौलियों का चुनाव

कुल मिलाकर खबरों के बिचौलियों का व्यापार अब मंदा पड़ गया है. इसका असर यह है कि उनका प्रभाव भी कम हो गया है. कई बड़े पत्रकारों की सार्वजनिक खीझ और बौखलाहट से साफ़ दिखाई पड़ता है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि बदलते वक्त के साथ वे अपने आप को कैसे बदलें.

युद्ध रोकने के लिए युद्ध हो तो हो !

1993- मुम्बई 1998- कोयम्बटूर 2001- संसद हमला 2002- अक्षरधाम 2003/2006- मुम्बई ट्रेन 2005- दिल्ली 2006- वाराणसी 2007- समझौता एक्सप्रेस, हैदराबाद 2008- मुम्बई 26/11 2016- उरी 2019- पुलवामा ….. सैकड़ों और

मोदी की राजनीतिक रणभेरी

नये साल के पहले ही दिन एक इन्टरव्यू के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने आम चुनावों के लिए खुली लड़ाई का एलान कर दिया है। अपने इस लम्बे इंटरव्यू में मोदी

रोचक हुआ 2019 का संग्राम

पांच विधानसभाओं के चुनाव परिणामों ने राहुल गांधी और कांग्रेस में एक नई जान फूंक दी है। इससे 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों की लड़ाई ख़ासी दिलचस्प हो गई