Prashant Dubey

Prashant Dubey

150 Posts

अब अप्रवासी भारतीयों पर लगा “मोदी-भक्त” होने का टैग, ज़मीनी हकीकत से दूर भागते लिबरल बुद्धिजीवी

जब आप बुद्धिजीवी स्तर तक पहुंच जाते हकने तो आमतौर पर बुद्धिजीवियों को द्वेष, ईर्ष्या, अहंकार और दंभ से ऊपर माना जाता है. दूसरे देशों में ऐसा होता होगा, भारत

भारत नहीं है क्लाइमेट चेंज का दोषी! विकसित देशों की लालसा में बर्बाद होता पर्यावरण!

दुनिया के अंदर क्लाइमेट चेंज को लेकर काफी बातें हो रही हैं. बातों से अधिक आंकड़े डरावने हैं. यह बताते हैं कि इस देश के अंदर भी इसके काफी बुरे

शैक्षणिक संस्थाओं में उग्र होता “लाल सलाम!”

जादवपुर यूनिवर्सिटी के अंदर लोकतंत्र को मुंह चिढ़ाती जो तस्वीर सामने आई वो शिक्षा व्यवस्था को ही कठघरे में नहीं खड़ा किया बल्कि देश की शैक्षणिक संस्थाओं के अंदर पल

युवाओं को धूम्रपान से बचाने का उचित निर्णय है “ई-सिगरेट” पर लगाया प्रतिबंध!

देश में इस समय एक बड़ी बहस छिड़ी हुई है. जी नहीं! हम राम मंदिर की बात नहीं कर रहे. वो भी एक बड़ा विषय है, लेकिन फिलहाल एक और

सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, देश को भी असहज करते दिग्विजय सिंह! आंकड़े दे रहे गवाही!

कांग्रेस के नीति विचारकों में पता नहीं किस प्रकार की अल्पबुद्धि आ गयी है कि उन्हें इस समय राजनैतिक समझ का कोई आभास ही नहीं है कि आखिर कैसे उनके

अपने ही देश के तथ्यों को नकार एजेंडे पर भागती मलाला!

पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई को कौन नहीं जानता है. वो लड़की जिसने सिर पर गोली लगने के बाद भी न केवल जीवित रहने का संघर्ष किया बल्कि उसमें कामयाब भी

अहकाम-ए-आलमगीरी में औरंगज़ेब ने खुद लिखी शिवाजी से हार की टीस!

मुग़ल सल्तनत में सबसे क्रूरतम शासकों में से एक का नाम औरंगज़ेब था. वो औरंगज़ेब जिससे देश में बहुत से लोग सहानुभूति रखते हैं. टीवी डिबेट्स में बहुत से ऐसे

राष्ट्रविरोधी विचारधारा के पोषित “स्तंभ”

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में खड़ा भारतीय मीडिया इस समय एक ऐसे दौर से गुज़र रहा है जहां उसकी विश्वसनीयता दांव पर लगी है. TRP वो सत्य है

सोशल मीडिया पर “सस्ता नैरेटिव” सेट करती कांग्रेस!

सोशल मीडिया की सबसे खास बात यह है कि यह विचारो से भी तेज़ एक जगह से दूसरी जगह पहुंच जाता है. यह कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं होगा कि सोशल

संपर्क का अंत नहीं, संकल्प की शुरुआत है चंद्रयान 2

आहुति बाकी यज्ञ अधूरा अपनो के विघ्नों ने घेरा अंतिम जय का वज्र बनाने नव दधीचि हड्डियां गलायें आओ फिर से दिया जलाएं!” भारत रत्न और देश के पूर्व प्रधानमंत्री