सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, देश को भी असहज करते दिग्विजय सिंह! आंकड़े दे रहे गवाही!

कांग्रेस के नीति विचारकों में पता नहीं किस प्रकार की अल्पबुद्धि आ गयी है कि उन्हें इस समय राजनैतिक समझ का कोई आभास ही नहीं है कि आखिर कैसे उनके बयान उनकी पार्टी का ही नुकसान नहीं कर रहे हैं बल्कि बहुसंख्यकों के विचारों और उनकी आस्था और विश्वास को भी चोट कर रहे हैं. हाल ही में दिग्विजय सिंह ने एक ऐसा बयान दिया है जो यही कार्य करता है.

दिग्विजय सिंह ने कहा है कि मंदिरों में बलात्कार होते हैं. अब उनके पूरे बयान को न दिखाने का आरोप हमारे या हमारी वेबसाइट पर न लगे, इसलिए हम आपको उनका पूरा बयान सुनाते हैं. सुनिए …

भारतीय संस्कृति की दुहाई और सनातन धर्म की कमियों को दिखाने के चक्कर में उन्होंने पूरे भगवा रंग को अपराधबोध कराने का प्रयास किया है. लोकतंत्र में यह अपराध के समान है. व्यक्तिगत रूप से आप किसी व्यक्ति विशेष पर टिप्पणी कर सकते हैं, उसमे भी देश का कानून उसका मान मर्दन करने की आज्ञा नहीं देता. यहां तो नेता जी ने बहुसंख्यकों की आस्था के प्रतीक को ही दुष्कर्म से जोड़ दिया है.

कुछ खबरें देख लेते हैं. उसके बाद यह बात करेंगे कि आखिर यह दावा कितना सही है. 28 फरवरी 2018 की ख़बर है. हेडलाइन है – “67-year-old teacher rapes minor inside madrasa in Delhi.” खबर की और तहकीकात करें तो पता चलेगा कि उस 67 वर्षीय वासना से ग्रस्त व्यक्ति का नाम “ज़ाकिर आलम” था.

27 अप्रैल 2018 की एक और खबर है. हेडलाइन है “Madrasa Cleric Arrested For Alleged Role In Rape Of 11-Year-Old Girl Near Delhi“, हेडलाइन से जगह, धर्म, सम्प्रदाय, इलाका और सोच, सभी चीजें स्पष्ट हो जाती हैं. इसमें 2 आरोपियों में से एक आरोपी का नाम था “ग़ुलाम शाहिद”.

2 मई 2018 की एक और खबर है ज़रा देखिये. हेडलाइन है – “Minor” Accused Of Raping Child In Madrasa Near Delhi, Is 20 Years Old. 17 वर्ष के एक लड़के ने 21 वर्षीय लड़की के साथ दुष्कर्म ही नहीं किया बल्कि उसको और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी भी दी.

14 अप्रैल 2018 की एक और खबर है. हेडलाइन है – “Rape Inside The Mosque : Cleric Rapes 14-Year-Old Girl Inside Mosque Premises.” अपराधी का नाम “नज़ीर” और “मोहसिन” था.

इन खबरों में थोड़ा और आगे चलते हैं. चर्च के पादरी फ्रेंक्लिन मुलक्कल का केस तो सबने ही सुना होगा? जहां नन अभी तक न्याय के लिए तरस रही है. खुद चर्च ने न्याय व्यवस्था से पहले पादरी को क्लीन चिट दे दी है. चर्च का कहना है कि उस नन द्वारा पादरी को फंसाने की “साज़िश” हो रही. न्याय व्यवस्था से पहले ही अपना फैसला सुना देने वाले ऐसे चर्च पर दिग्विजय सिंह कुछ नहीं कहते हैं. शायद उनको यह दिखता नहीं है.

लेकिन सिर्फ वही एक केस ऐसा नहीं था. PBS न्यूज़ ऑवर की एक रिपोर्ट है. वह कहती है कि जुलाई 2017 से लेकर जून 2018 के अंतराल में पादरियों द्वारा महिलाओं और बच्चों पर किये जाने वाले यौन उत्पीड़न के मामले सीधे दोगुने हो गए हैं. रिपोर्ट की मानें तो जहां 2017 में ऐसे 693 मामले सामने आए थे वहीं 2018 में यह सीधे दुगनी से भी तेज़ी से 1,455 हो गए. यह आंकड़ा खुद यू.एस. रोमन कैथोलिक चर्च का है.

इन सभी खबरों और आंकड़ो का उद्देश्य किसी एक धर्म को निशाना बनाना नहीं है. न ही इसका उद्देश्य यह साबित करना है कि एक विशेष धर्म के लोग दागदार होते हैं. इस पूरे डेटा और खोज का उद्देश्य यह बताना है कि वासना और अपराध का कोई धर्म नहीं होता. दुर्भाग्यवश (या जानबूझकर) दिग्विजय सिंह ने एकबार फिर से एक धर्म विशेष और एक रंग को अपराधी घोषित कर दिया है. समय के साथ चीजों में बदलाव आने स्वाभाविक है.

एक बेहतर पंथ वही होता है जो अपनी मूल विचाधारा को सुरक्षित रखते हुए बदलते समाज के अनुसार स्वयं को ढाल ले. इस मामले में सनातन संस्कृति निसंदेह सबसे ऊपर है क्योंकि रूढ़िवादिता और गलत कार्यो का विरोध सबसे अधिक यहीं होता है. परंतु इसके अर्थ यह नहीं हो जाता है कि कोई पद-पिपासु राजनेता कुर्सी के मोह में एक धर्म के अनुयायियों की भावनाओं को ऐसे आहत करे. निसन्देह धर्म के नाम पर कई ऐसे लोग हैं जिन्होंने धर्म का सबसे अधिक अहित किया है. फिर भी उनके नाम से पूरे सम्प्रदाय को ऐसे शब्द कह उनके पूजा स्थल को अपमानित करना बहुत निंदनीय कार्य है.

निसंदेह ऐसे मामले एक आंकड़े की दृष्टि से और बेहतर तरीके से समझे जा सकते हैं लेकिन वहां व्यक्ति का धर्म दिखना देश की अखंडता के लिए सही नहीं होगा. यही कारण है कि आपराधिक गतिविधियों का ब्यौरा रखने वाली NCRB भी ऐसे किसी डेटा को नहीं दिखाती. यहां तक कि 2016 के बाद से NCRB का कोई आधिकारिक डेटा आया ही नहीं जो कुछ बता सके. यदि ऐसा डेटा उपलब्ध होता तो हम वो भी आपके सामने रखते. बात उस समझ और सोच की है जो कहीं न कहीं राजनैतिक लालसा के बीच रह जाती है.

दुनिया में सनातन संस्कृति ने योग जैसा वरदान दिया है. आज उसी को विदेशी सभ्यताएं ‘योगा’ के नाम से भले बेच रही हों लेकिन उसके सृजनकर्ता हम हैं. ऐसे समाज के धार्मिक स्थल में यदि कोई नेता दुष्कर्म जैसा नीच पाप होने को स्वाभाविक दृष्टि से देखता है तो यह उसकी नज़र और सोच का दोष है. ज़ाहिर है कांग्रेस पार्टी के लिए यह दिग्विजय सिंह का निजी बयान होगा. लेकिन अपने निजी बयानों से वो आदिकाल से चली आ रही सनातन परंपरा का मान मर्दन इतनी आसानी से कर के नहीं जा सकते. यह घोर निंदा का बड़ा विषय है.

35 Comments

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    October 8, 2019 - 5:20 am

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