एक कुशल बौद्धिक राजनेता का यूँ चले जाना

देश की राजनीति में 2019 अगस्त का महीना अशुभ साबित हुआ है. भारतीय जनता पार्टी के लिए तो यह महीना बड़ा गहरा आघात दिया है. सुषमा स्वराज को गए अभी एक पखवारा ही बीता था कि लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे अरुण जेटली का असमय निधन हो गया. अरुण जेटली का निधन देश की राजनीति में एक खालीपन को पैदा करने वाला है. जेटली एक विराट व्यक्तित्व के धनी थे, भारतीय राजनीति में अपने आप को संघर्षों से स्थापित करने के साथ–साथ हर राष्ट्रीय महत्व के विषय पर महत्वपूर्ण हस्तक्षेप के लिए जेटली को याद किया जाएगा.

छात्र जीवन से अपनी राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले अरुण जेटली ने अपने राजनीतिक जीवन के कई उतार–चढ़ाव को पार करते हुए अनेक  सर्वोच्च पदों पर आसीन हुए. नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में वह वित्त मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय एवं सूचना प्रसारण जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों के मंत्री रहे. भाजपा जब विपक्ष में थी, तब वह राज्यसभा में विरोधी दल के नेता थे. वह अपने तर्कों और वक्तव्यों से सामने वाले को निरुत्तर कर देते थे. उनकी वाकपटुता, कानून की समझ और उनका अध्ययन उन्हें अन्य नेताओं से अलग करता है. यही कारण है कि भाजपा के नेता हों या किसी अन्य दल के नेता हों, वह जेटली जी को सुनना तथा उनके सलाह एवं मार्गदर्शन के लिए आग्रही रहते थे. चार दशक से अधिक के सार्वजनिक जीवन में उन्होंने कभी भी सामाजिक मर्यादा और राजनीति की शुचिता का उल्लंघन नहीं किया. वह अपनी ईमानदारी, कर्मठता, विवेक, ज्ञान और अपने जुझारूपन से राजनीति में शून्य से शिखर तक का सफर तय किया.     

राजनीति में बहुत कम नेता ऐसे होते हैं जो राजनेता के साथ –साथ बौद्धिक जगत में भी अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराएं, किन्तु अरुण जेटली एक कुशल राजनेता तो थे ही इसके साथ ही एक अच्छे लेखक भी थे. उनका ब्लॉग चर्चा का केंद्र बनता था, वह हर जरूरी  विषय की गहरी जानकारी रखते थे, चाहें बोलने की बात हो अथवा लिखने की जेटली जी बड़ी स्पष्टता के साथ विषय को समझा देते थे. समय-समय पर उनके तर्कसंगत लेख उस मुद्दे को नई दिशा प्रदान करते थे.

लोकसभा चुनाव के समय वह अस्वस्थ होने के बावजूद निरंतर 2019 चुनाव का एजेंडा, नरेंद्र मोदी सरकार की उपलब्धियों और विपक्ष की नाकामियों पर ब्लॉग लिखते रहे. अभी कुछ दिनों पहले जब धारा 370 को केंद्र सरकार ने समाप्त किया इस महत्वपूर्ण विषय पर भी उन्होंने ब्लॉग लिखा था। वही ब्लॉग उनके जीवन का आखिरी ब्लॉग रह गया. उसके दो दिन के बाद ही उनकी तबियत ज्यादा बिगड़ी और उन्हें एम्स में भर्ती होना पड़ा.

अरुण जेटली जब सदन में बोलते थे पक्ष एवं विपक्ष दोनों पक्षों के लोग उनकी बातों को गंभीरता से सुनते थे. नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में जब अरुण जेटली वित्त मंत्री थे, तब कई साहसिक निर्णय लिए गए. इन निर्णयों में अरुण जेटली की अग्रणी भूमिका थी. चाहें नोटबंदी का साहसिक फैसला हो अथवा जीएसटी को लागू करने का ऐतिहासिक कदम हो, जेटली ने बड़ी कुशलता के साथ इनका क्रियान्वयन किया और इन फ़ैसलों से होने वाले लाभ को भी लोगों को समझाने में सफ़ल हुए थे.

अरुण जेटली के निधन से परिवार के साथ बड़ा आघात भाजपा को भी लगा है. अरुण जेटली एक समन्वय वाले व्यक्ति थे. तमाम मतभेदों के बावजूद एक राय बनाने की कला उनमें थी. हर मुद्दे पर पार्टी की लाइन क्या होगी अथवा पार्टी किस रणनीति के साथ आगे बढ़ेगी.  इस पर जेटली की राय सबसे महत्वपूर्ण एवं प्रभावी होती थी. वह हर समय पार्टी के हित में कदम उठाने वाले व्यक्ति थे. किसी विवादास्पद अथवा जटिल विषय पर पार्टी का संतुलित बयान रखने में भी जेटली को महारथ हासिल था.

कई बार भाजपा की राजनीति में ऐसा समय आया जब पार्टी डगमगा गई थी, किन्तु उसे डगमगाहट को स्थिरता प्रदान करने वाली शख्सियत अरुण जेटली थे. इसके कई सारे उदाहरण हमें मिल जाएंगे किन्तु दो मामलों का जिक्र समीचीन होगा, लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बिहार में एनडीए गठबंधन में सीटों को लेकर एक राय नहीं बन पा रही थी, तब यह मोर्चा जेटली ने संभाला और उनके रणनीतिक कौशल से कुछ ही मिनटों में रामविलास पासवान से सहमति बन गई और गठबंधन बरकरार रहा. ऐसे ही राफ़ेल में मामले पर भी विपक्ष जब लगातार झूठ बोलता रहा और एक ऐसा चक्रव्यूह रचने का प्रयास किया, जिससे सरकार घिर जाए और बैकफूट पर आ जाए. उस समय अरुण जेटली ने ब्लॉग के माध्यम से, प्रेस कांफ्रेंस के माध्यम से, इंटरव्यू के द्वारा और संसद में राफ़ेल पर उनके जवाब ने इस चक्रव्यूह को भेद दिया. अरुण जेटली ने ऐसे तर्क दिए थे, जिससे कांग्रेस खुद अपने बचाव की मुद्रा में आ गई थी.

अरुण जेटली के निधन के पश्चात सभी राजनीतिक दलों से आ रही प्रतिक्रियाएं यह बताती हैं कि उन्होंनें राजनीति में रहते हुए व्यक्तिगत रिश्तों पर कोई आंच नहीं आने दी. अपने 66 वर्ष की आयु में उन्होंने ने जो ऊँचाई तथा सम्मान प्राप्त किया, वह बिरले लोगों को ही प्राप्त होता है. अरुण जेटली का बहुआयामी व्यक्तित्व एवं कृतित्व सबके लिए प्रेरणादायक है.

3 Comments

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