मजहबी दंगल के बीच हारी ज़ाइरा वसीम!

दंगल गर्ल ज़ाइरा वसीम ने बॉलीवुड छोड़ दिया है. यह कोई बड़ी बात नहीं है. बड़ी बात उसके पीछे दिया जा रहा कारण है जो एक बड़े बवाल के लिए काफी है. ज़ाइरा वसीम ने कहा है कि चूंकि एक्टिंग इस्लाम के खिलाफ है, इसलिए वह बॉलीवुड में काम नहीं करना चाहती हैं.

हर बात पर ‘हमें शर्म आती है’ का झंडा बुलंद करने वाले बड़े चुप हैं. कहीं कोई कुछ बोल ही नहीं रहा है. सबका कहना है कि यह उनका व्यक्तिगत मसला है. 

एक लड़की जो मूलतः कश्मीर से आती है, उसने एक्टिंग छोड़ दी इस्लाम का हवाला देकर जबकि देश के बड़े सुपरस्टार खान गैंग से आते हैं. कोई भी सेक्युलर योद्धा इसमें कट्टरपंथियों को सवालों के कठघरे में खड़ा नहीं कर रहा है. इस्लाम एक ही तरह का हो सकता है. लेकिन इस्लाम को अलग-अलग मौलवियों द्वारा जैसे बताया जाता है, वह बहुत कंफ्यूसिंग है, वो भी तब जब इस्लाम की बदनामी करने में कोई पीछे नहीं है.

दुनिया भर में जो स्थितियाँ हैईं, वो सब जानते हैं. इस बीच एक उभरती हुई अदाकारा का इस्लाम का हवाला देकर अपना काम छोड़ देना बहुत बड़ा सवाल खड़ा करता है. वो सवाल जिसका जवाब देश के बुद्धिजीवियों को देना पड़ेगा. मीडिया के क्रांतिकारियों को बोलना पड़ेगा.

ज़ाइरा वसीम को बॉलीवुड में लाने वाले आमिर खान भी चुप हैं. ये चुप्पी चींख रही है कि यहां तो सेक्युलर वही है जो सिर्फ एक चश्मा लगाए लोगों को देखता है. यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. 21वी सदी में 14वी सदी के नियम का आज़ाद भारत में क्या काम है? यह मजहबी दंगल बहुत भयावह है.

आउट-रेज वाली टीम की सुप्त अवस्था बहुत ही दयनीय है. क्या कोई यह बता सकता है कि यह कब खत्म होगा? ज़ाइरा वसीम की आवाज़ आज भले ही कट्टरपंथ के सामने कमज़ोर पड़ गयी लेकिन इस देश के संविधान की मजबूती के ऊपर हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसा किसी भी लड़की के साथ ना हो.

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