चांदनी चौक की घटना, सनातन संस्कृति पर हमला

चांदनी चौक में जो हुआ है, उसके बारे में बहुत कुछ कहा, लिखा जा चुका है. कहीं भी ऐसी कोई ख़बर नहीं आई जिससे ये स्पष्ट रूप से पता चल जाये कि आखिर यह हुआ क्यों. लेकिन जो हुआ है, उसने हज़ारों साल पुरानी एक संस्कृति की वर्षों पुराने स्वाभिमान के ऊपर एक प्रहार किया है.

मुगलों के समय हमने बस सुना था कि मंदिर कैसे तोड़े गए, लेकिन एक स्वतंत्र भारतवर्ष में जिसकी कीमत हम पाकिस्तान और बंग्लादेश जैसे बड़े भूभाग को देकर चुका चुके हैं, वहां 21वी सदी में ऐसा होगा, किसी ने सोचा नहीं था.

विडंबना की हद तब हो जाती है जब केंद्र में 350 से भी अधिक सीटों वाली ‘हिंदू हृदय सम्राट’ की सरकार है. सवाल बहुत से बनते हैं. 7 सांसद क्या कर रहे थे. वहीं आम आदमी पार्टी के 67 विधायक क्या कर रहे थे. जब यह जघन्यतम अपराध किया जा रहा था तब हमेशा ‘आंदोलन मोड’ में ‘एक्टिव’ लोग कहाँ थे. एक तथाकथित शांतिप्रिय समुदाय के लोगों द्वारा यह कर दिया गया. टूटी हुई मूर्तियां हमारे स्वाभिमान के टूटे हुए अवशेषों जैसी हैं. बहुत दुःख होता है जब ऐसे दृश्य सामने आते हैं. 

आम आदमी पार्टी विधायक इमरान हुसैन को घटना के दौरान संदेहास्पद स्थितियों में देखा गया. एक आदेश भी दिया जा रहा था. यह हालात देश की राजधानी के है. गंगा-जमुनी तहजीब की दुहाइयाँ कम पड़ गयी जब साम्प्रदायिक पत्थरों से आध्यात्मिक विश्वास को तोड़ा गया, इसी दिल्ली में. दुर्भाग्यपूर्ण कहना गलत होगा क्योंकि यह एक बेहद ही शर्मनाक घटना है.

लेकिन उन लोगों की चुप्पी और भी अधिक अखरती है जो इसी विश्वास के मानने वालों द्वारा चुन कर भेजे गए हैं. पार्किंग का झगड़ा हो या कुछ और, आपको ये किसने अधिकार दिया कि आप किसी के विश्वास को ऐसे तोड़ेंगे. क्या अब संख्या ही हर इलाके के प्रजातंत्र को निर्धारित करेगा? हर बात जो जय श्री राम से जोड़ने वालों को भी यह अल्लाह हु अकबर के नारे सुनाई नहीं दिए.

यही नारे और नफरत की घटनाएं देश को तबाह करने वाली हैं. कहने को शब्द कम इसलिए पड़ रहे हैं क्योंकि शब्दों की अपनी मर्यादा है. उस मर्यादा को पार करना ठीक नहीं रहेगा.

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