एक सप्ताह के अंदर तीसरी झूठी ख़बर, छेड़खानी करते पकड़े गए आरोपी ने मामले को दिया साम्प्रदायिक रंग

मोदी सरकार के आते ही ‘मुसलमान डरे हुए हैं’, और ‘अब भगवा आतंकी मुसलमानों का जीना मुश्किल करेंगे” इस तरह की बात की जाने लगी है. इस क़यास में पहले भी कई बार मामूली झगड़े को हिंदू मुस्लिम विवाद या फिर गौ तस्करी को साम्प्रदायिक रंग दिया गया है. पर अब ऐसा लग रहा है कि मीडिया ही नहीं स्वयं मुस्लिम समाज के लोग ही ख़ुद इस तरह की अफ़वाहें फैलाने में जुट गए हैं.

कल ही मजलिस बचाओ तहरीक के नेता ने एक फ़ोटो ट्वीट कर लिखा; ”इस युवक को RSS वालों ने इसलिए मारा क्योंकि उसने जय श्री राम नहीं बोला”

इस ट्वीट के बाद कई और लोगों ने भी इसके पर ट्वीट किया. हालाँकि करीमनगर पुलिस ने तुरंत ही अजमद उल्लाह खान को जवाब दिया, जिसमें आरोपी युवक ने कैमरा पर इस बात से पर्दा उठाया कि मामला साम्प्रदायिक नहीं था बल्कि प्रेम प्रसंग से जुड़ा था. आरोपी एक युवती के साथ छेड़खानी कर रहा था जिसके चलते उसके साथ मारपीट की गयी. आरोपी ने ख़ुद को बचाने के लिए इस घटना साम्प्रदायिक रंग दिया. विडम्बना है कि हिंदू-मुस्लिम नाव पर सवार होकर अब इस तरह के आरोपी ख़ुद को दबा कुचला पीड़ित साबित कर सकेंगे.

इस ट्वीट के बाद भी अजमद खान ने अपना ट्वीट ना तो हटाया ना झूठी अफ़वाह फैलाने के लिए माफ़ी माँगी. उलटा उनका कहना है कि पुलिस कहानी बना रही है. मोदी सरकार के आने के बाद यह पहला क़िस्सा नहीं है. पिछले दिनों गुरुग्राम और बेगूसराय में भी ऐसे दो मामले सामने आए जहाँ अपराध को साम्प्रदायिक रंग दिया गया. 

गुरुग्राम में एक युवक ने आरोप लगाया कि जय श्री राम ना बोलने पर उससे मारपीट की गयी उसकी टोपी फेंकी गयी और शर्ट फाड़ दी गयी. पुलिस जाँच में यह सामने आया कि CCTV कैमरा रेकोर्डिंग में साफ़ दिख रहा है कि यह मामूली मारपीट थी और किसी ने उसकी ना शर्ट फाड़ी ना टोपी फेंकी.

इसी तरह से बेगूसराय में भी एक व्यक्ति ने दावा किया कि ख़ुद को मुसलमान बताने पर लोगों ने उसे गोली मार दी और उसे पाकिस्तान जाने को कहा. पुलिस जाँच में यह बात सामने आई कि झगड़ा मोलभाव को लेकर हुआ था, पीड़ित ने पुलिस को दी गई लिखित रिपोर्ट में पाकिस्तान जाने की बात और हिंदू मुस्लिम मुद्दे का ज़िक्र नहीं किया है.

यह काफ़ी दुखद है कि जहाँ पहले ही हिंदू मुस्लिम मसले को मीडिया और लिबरल्स तूल दे रहे हैं, वहीं आम मुसलमान भी इस बहकावे में आकर साम्प्रदायिक तनाव पैदा करने में जुटे हुए हैं. ऐसा ना हो कि आगे सच में कोई साम्प्रदायिक घटना हो और कोई पीड़ित की बात पर यक़ीन ही ना करे.

Rashmi Singh
Writer by fluke, started with faking news continuing the journey with Lopak.

4 Comments

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