मीडिया ने फिर फैलाया झूठ, दावा : नमाज़ियों पर चढ़ाई गाड़ी, सच्चाई कुछ और ही

पिछले हफ़्ते कई झूठी ख़बरों के बाद आज मीडिया ने फिर एक बार यह साबित कर दिया है कि अपना नैरेटिव साबित करने के लिए वो पुलिस अधिकारी के नाम से भी झूठ छाप देंगे. आज कई अख़बारों ने यह ख़बर छापी कि पूर्वी दिल्ली के खुरेजी इलाक़े में किसी ने एक गाड़ी नमाज़ पढ़ रहे लोगों पर गाड़ी चढ़ा दी और इसमें 17 लोग घायल हो गए. 

दिल्ली पुलिस ने इस रिपोर्ट का खंडन कर दिया है कि 17 नहीं केवल 3 लोगों के घायल होने बात कही जिन्हें उपचार के लिए भेज दिया गया है. कई सारे अख़बारों ने यह लिखा है कि 17 लोगों के घायल होने की ख़बर की डीसीपी मेघना यादव ने पुष्टि की है. लेकिन डीसीपी मेघना यादव ने इस दावे को झूठ क़रार दिया है. उनका कहना है कि उन्होंने किसी भी अख़बार को इस तरह का बयान नहीं दिया. डीसीपी ने एक मीडिया पब्लिकेशन को बताया कि घटना के बाद तीन लोग पुलिस स्टेशन में आए थे, लेकिन प्रत्यक्ष तौर पर कोई चोट नहीं दिखी. घायल होने का दावा करने वाले तीनों को बाद में मेडिकल जांच के लिए भेजा गया है.

डीसीपी यादव ने कहा कि जहाँ यह घटना हुई है, वहां आमतौर पर भीड़ रहती है लेकिन जिस समय तेज़ रफ़्तार कार निकली , उस समय कोई नमाज अदा नहीं कर रहा था . वास्तव में, जो लोग नमाज़ अदा कर रहे थे, वे उस समय तक पहले ही तितर-बितर हो गए थे.

हिंदी अख़बार अमर उजाला में एक पुलिस अधिकारी का बयान है कि नमाज़ियों ने तेज़ रफ़्तार से जा रही कार पर हमला ज़रूर किया पर वो इस डर से किया कि वह उन लोगों पर भी चढ़ सकती थी. अधिकारी ने पुष्टि भी की कि कोई भी व्यक्ति घायल नहीं हुआ.

नमाजियों द्वारा हिंसक विरोध प्रदर्शन करने का दावा करने वाले कुछ वीडियो वाइरल हुए हैं.

इस वीडियो को देख कर कोई भी दिल्लीवाला शायद ऐसे इलाक़ों से गुज़रने से पहले चार बार सोचेगा जहाँ समुदाय विशेष बहुतायत में है. 

क्विंट, वायर जैसे मीडिया पॉर्टल अब तक कई बार फ़ेक न्यूज़ या आधी अधूरी न्यूज़ छापते हुए पकड़े जा चुके हैं. इस तरह की अफ़वाहें फैलाकर वो ”मुसलमान ख़तरे में है” के प्रोपागैंडा को ना केवल बढ़ावा देते हैं बल्कि आम मुस्लिम जो घर में बैठकर इनके आर्टिकल पढ़ते हैं, उनके मन में भी बेवजह डर पैदा करते हैं. हैरानी की बात यह भी है कि नमाज़ियों द्वारा जो हिंसक प्रतिक्रिया वीडियो में दिखाई दे रही है, उस पर ना किसी बड़े नेता ना किसी मीडिया वाले ने टिप्पणी की. एक बड़ा सवाल यह भी है कि अगर सच में 17 लोग घायल हुए होते तो क्या उनकी अस्पताल से कोई तस्वीर सामने नहीं आती?  

Rashmi Singh
Writer by fluke, started with faking news continuing the journey with Lopak.

1 Comment

  1. Avatar
    June 16, 2019 - 1:19 am

    hello!,I love your writing so so much! proportion we be in contact
    more about your article on AOL? I require a specialist in this house
    to solve my problem. Maybe that’s you! Taking a look ahead
    to peer you. juventuss fotballdrakter

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *