अपने ही देश के लोगों का विश्वास खोता मीडिया

भूटान के पूर्व प्रधानमंत्री का गुस्सा कुछ दिन पहले हमें देखने को मिला. वह एक भारतीय मीडिया चैनल की गलती पर गुस्सा थे. उनका कहना था कि अगर ऐसा किसी दूसरे देश के राष्ट्रपति के साथ किया जाता तो भारतीय नेताओं और देश में चल रहे मीडिया चैनलों को जवाब देना पड़ता. कोई भी स्वाभिमानी देश अपने देश के एक पूर्व राष्ट्राध्यक्ष के ऊपर इस प्रकार की गलती को सहन नहीं कर सकता.

भूटान के पूर्व प्रधानमंत्री शेरिंग तोगबे का कथन शब्दशः सही है. किसी देश के पूर्व राष्ट्राध्यक्ष के ऊपर ऐसा प्रहार उचित नहीं है. ठीक है, मान लेते हैं कि इंसान से गलती होती है, लेकिन जिनका काम ही सही खबर को दिखाना है, जब वही ऐसा करने लगे और वो भी एक मित्र देश के राष्ट्राध्यक्ष के नाम को गलत पढ़ दें, तो उन्होंने अपने नाम को ही नहीं डुबाया बल्कि अपने ही देश की पत्रकारिता को भी ग्लोबल स्तर पर नीचा दिखाया है. यह कितना हास्यास्पद है कि जिनके ऊपर सच्ची खबर दिखाने की ज़िम्मेदारी होती है वही इस स्तर की गलती कर दें कि एक देश के सर्वोच्च पद पर बैठ चुके एक व्यक्ति को अपनी आपत्ति दर्ज करानी पड़े.

सेंसेशनल और TRP वाली खबरों के बीच में जब आप अपने प्रतिद्वंदियों से रेस लगाने लगे, तो नैतिकता का आधार सिमटता चला जाता है. यही सच्चाई है. यही भारतीय मीडिया का स्तर हो चुका है. हम सभी को कठघरे में खड़ा नहीं करते हैं लेकिन जब देश में सभी स्वयंभू नंबर 1 हो जाएं और सभी एक दूसरे को नीचा दिखाने का प्रयास करें, जबकि वो खुद उसी कार्यक्षेत्र में है, तब यह सवाल पूछना आवश्यक हो जाता है कि सवाल पूछने वालों से सवाल कौन पूछे?

तोगबे से इस देश के लोग माफी मांग रहे हैं. कुछ का तो यह भी कहना है कि हम खुद ही अपनी मीडिया की विश्वसनीयता को शून्य मानते हैं. यह देश के मीडिया को आइना दिखाता है. जिनके लिए आप खबर दिखाते हैं, वही जब आपकी इस प्रकार से कल्पना करने लगे तब वह ‘डेडलाइन’ के रूप में देखी जानी चाहिए.

इस देश में ऐसा माना जाता है कि सार्वजनिक क्षेत्र में लोगों को डिप्लोमेसी का अधिक ज्ञान नहीं होता है, फिर भी जब हमारे देश के लोग भूटान के राष्ट्रपति से माफी मांगने लगे तब यह बदलाव देखना सुखद होता है की इस देश के लोग अपने देश के विषयों को ले कर दिन प्रतिदिन सजग होते जा रहे हैं. भूटान के पूर्व प्रधानमंत्री से हम भी अपनी तरफ से खेद जताते हैं. यह देश सदैव भूटान से द्विपक्षीय रिश्तों को ले कर सजग है. आने वाले समय में भूटान की संप्रभुता के लिए हमारा राष्ट्र ऐसे ही सदैव खड़ा रहेगा. डोकलाम जैसे कई उदाहरण अभी हमारी दोस्ती में लगने वाले हैं.

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