TMC नेता ने ग़लती से बताया सच, पहले से ही टूटा हुआ था हाथ

बीजेपी के नेता अमित शाह की बंगाल रैली के बाद तृणमूल कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं में भिड़ंत हो गई. ऐसा बताया जा रहा था कि इसी भिड़ंत में तृणमूल कांग्रेस के छात्र नेता प्रीतम साहा का हाथ भाजपा कार्यकर्ताओं ने तोड़ दिया.

इस घमासान के दौरान कलकत्ता यूनिवर्सिटी में रखी क्रांतिकारी विद्यासागर जी की मूर्ति भी टूट गई. जिसके बाद बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने मीडिया से कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनके समर्थकों के हाथ तक तोड़ दिए. मीडिया को सम्बोधित करते समय ममता जी के बग़ल में पीली शर्त में तीर्था प्रीतम साहा भी खड़े थे जिनका हाथ फ़्रैक्चर दिखाई दे रहा था.

एक ट्विटर यूज़र द्वारा यह दावा किया जा रहा था कि प्रीतम का हाथ चार दिन पहले ही बाइक दुर्घटना में टूटा था.

पर इस दावे की सच्चाई तब सामने आई जब प्रीतम ने ही मीडिया को यह बता दिया कि उनका हाथ पहले से ही टूटा था. Zee के बांगला अंक के पत्रकारों से बातचीत के दौरान साहा ने बताया कि ”वो घटनास्थल पर झड़प के बाद पहुँचे जहाँ बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उनका टूटा हुआ हाथ देखने के बाद भी उन पर हमला कर दिया.” इसका मतलब यही है की प्रीतम का हाथ घटना के पहले से ही टूटा हुआ था ना कि भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा तोड़ गया था.

प्रीतम साहा शायद बातचीत के वक़्त यह भूल गए होंगे कि उनकी सुप्रीमो ममता दीदी पहले ही उनके टूटे हुए हाथ का इस्तेमाल भाजपा के ख़िलाफ़ सबूत के तौर पर इस्तेमाल कर चुकी हैं. तस्वीरों में ममता दीदी के बग़ल में खड़ी युवती की पट्टी पर भी लगा ख़ून पेंट या मेक अप जैसा नज़र आ रहा था. ख़ून अन्यथा सूखते ही गहरे रंग का हो जाता है, पर यहाँ तस्वीरों में ख़ून एक दुम टमाटरी लाल रंग का दिख रहा है.

हिंदू मुस्लिम हिंसा के बाद ममता दीदी अब बंगाली वाली ग़ैर बंगाली की राजनीति कर रही हैं. बंगाल में भाजपा का बढ़ता क़द ममता दीदी के लिए जहाँ ख़तरे की घंटी साबित हो रहा है वहीं यही क़द भाजपा समर्थकों के लिए ख़ुद ख़तरा बनकर खड़ा है.

Rashmi Singh
Writer by fluke, started with faking news continuing the journey with Lopak.

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