हिंसा से बाज़ नहीं आ रहे ममता दीदी के समर्थक, तृणमूल कांग्रेस पर फ़र्ज़ी वोटिंग और वोट डालने से रोकने का आरोप

लोकसभा चुनाव के आख़री चरणों में भी पश्चिम बंगाल में हिंसा की वारदातें जारी रहीं. भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या, उन पर हमले, भाजपा समर्थकों को डराना धमकाना, वोट में धाँधली इस तरह के लगभग सभी पैंतरे तृणमूल सरकार आज़मा चुकी है.

आखिरी चरण के दिन भी पश्चिम बंगाल से हिंसा की ख़बरें लगातार आती रही. पश्चिम बंगाल के न्यू टाउन इलाके में करीब 20 देसी बम बरामद किए गए. साथ ही खबर ये आ रही है कि बारासात में बीजेपी कार्यकर्ता पर हमला हुआ है.

बैरकपुर में भी परसों रात जबरदस्त हिंसा हुई. बैरकपुर के भाटपाड़ा में बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई जिसके दौरान आगजनी और बम फेंकने की ख़बर आई. पहले चरण से लेकर सातवें चरण तक कूच विहार, रायगंज, मुर्शिदाबाद, आसनसोल, हूगली, घाटाल और बैरकपुर में बवाल हुए.

कोलकाता के व्यावसायिक केंद्र बड़ाबाजार के रवींद्र सरणी, पोस्ता में बमबाजी व फुलबागान में चार बम फेंके गए पर क़िस्मत से वह फटे नहीं. तिलजला में भाजपा प्रत्याशी राहुल सिन्हा पर पथराव किया गया. इस हमले में राहुल सिन्हा को कोई चोट नहीं आई पर एक रिपोर्टर के सर पर चोट आ गई.

भाजपा नेता अनुपम हाजरा पर भी तृणमूल कार्यकर्ताओं द्वारा हो रही पोल रिगिंग को रोकने की कोशिश के दौरान पथराव किया गया. अनुपम का आरोप है कि तृणमूल की महिला कार्यकर्ता फर्जी वोटिंग कर रही थी, जब वो इसका जायजा लेने बूथ पर पहुंचे तब उन पर हमला किया गया. अनुपम हाजरा के मुताबिक, महिला टीएमसी कार्यकर्ता मुंह ढाँक कर वोट डाल रही थी. बूथ से भाजपा के पोलिंग एजेंट को बाहर कर दिया गया और मंडल प्रेसिडेंट बात करने गए, तो उन पर भी हमला किया गया.

बसीरहाट के मतदान केंद्र संख्या 189 पर बीजेपी उम्मीदवार सायंतन बसु ने टीएमसी कार्यकर्ताओं पर आरोप लगाया कि वे लोगों को वोट नहीं डालने दे रहे हैं. तक़रीबन सौ लोगों को वोट डालने से रोका गया जिसके ख़िलाफ़ उन्होंने विरोध प्रदर्शन भी किया.

तृणमूल कांग्रेस भले ही इस तरह की हिंसा से भाजपा के वोट कम करवा दे या फिर जीती हुई सीट हरा दे पर इस दौरान जो कष्ट आम आदमी या यूँ कहें कि वही वोटर जो ममता बैनर्जी और उनकी पार्टी का भविष्य तय करेंगे. शायद पहली बार जनता चुनाव ख़त्म होने की प्रतीक्षा शायद इसलिए कर रही हो ताकि उनके प्रदेश में शांति बहाल हो.

इस हिंसा में तृणमूल कांग्रेस की गतिवधियाँ ना केवल ख़तरनाक रही बल्कि भविष्य में अगर TMC की सरकार नहीं आई तो उसे समय होने वाली हिंसा का भी डर पैदा करती हैं. सत्ता की लालच में लोकतंत्र की ही हत्या करने का नमूना हमने इस चुनाव बंगाल में ही देखा है.

Rashmi Singh
Writer by fluke, started with faking news continuing the journey with Lopak.

5 Comments

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