स्मृति इरानी के क़रीबी सुरेन्द्र सिंह की हत्या, भावुक स्मृति इरानी ने अर्थी को दिया कंधा.

अमेठी में स्मृति इरानी के क़रीबी सुरेन्द्र सिंह की अज्ञात बदमाशों ने गोली मार कर हत्या कर दी. यहां के जामो पुलिस थानाक्षेत्र के अंतर्गत बरौलिया गांव के पूर्व प्रधान घर के बाहर सो रहे थे, तभी कुछ बदमाश उन्हें गोली मारकर फ़रार हो गए.


सुरेन्द्र सिंह के बेटे का कहना है कि मेरे पिता स्मृति इरानी के क़रीबी थे और दिन रात भाजपा का प्रचार करते थे. स्मृति जी की जीत के बाद हमने अमेठी में विजय यात्रा निकाली जिसके चलते शायद कांग्रेस के लोग नाख़ुश थे. मुझे शक है कि इन्हीं लोगों ने मेरे पिताजी की की हत्या की.

गोली लगने के बाद आनन-फानन में परिजन द्वारा सुरेंद्र सिंह को ट्रामा सेंटर लखनऊ ले जाया गया जहां पर उनकी मौत हो गई. घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और उस गांव में कोहराम मचा हुआ है. मौके की नजाकत तथा संवेदनशीलता को देखते हुए गांव में पर्याप्त मात्रा में फोर्स तैनात कर दी गई है और पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत करते हुए बदमाशों की धरपकड़ का प्रयास जारी है और सुराग लगाने में जुटी हुई है.

इस संबंध में जब पुलिस अधीक्षक अमेठी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि वह अपने बरामदे में सोए हुए थे. देर रात करीब 3 बजे के लगभग इनको किसी व्यक्ति द्वारा गोली मार दी गई. जिससे इनकी मृत्यु हो गई. इस संबंध में हम लोगों ने कुछ संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया है और पूछताछ जारी है. इसके अलावा जांच जारी है. षडयंत्र का हम सफल पर्दाफाश करेंगे. उनका शव लखनऊ में है. शीघ्र पोस्टमार्टम हो जाए, इसके लिए भी बात की गई है. शेष कार्यवाही की जा रही है. शांति व्यवस्था बनी हुई है और लोगों से शांति व्यवस्था कायम करने की भी अपील कर रहे हैं.

इस ख़बर से स्तब्ध स्मृति ईरानी आज दोपहर में बरौलिया गांव पहुंची और मृतक परिवार को सांत्वना दी. स्मृति ने सिंह के पार्थिव शरीर पर पुष्प चढाये और इस दौरान वह काफी भावुक हो गयीं. इसके बाद सुरेंद्र सिंह की अंतिम यात्रा में स्मृति ने सुरेंद्र सिंह के पार्थिव शरीर को कंधा दिया. स्मृति ईरानी ने घर पहुंचकर सुरेंद्र सिंह के परिजनों से मुलाक़ात की. उन्होंने कहा; “आज से यह मेरा परिवार है, इसकी जिम्मेदारी मेरी है.” सुरेंद्र के पुत्र अभय सिंह ने कहा कि हमें न्याय मिलना चाहिए. यह मेरी लड़ाई है, मैं सुप्रीम कोर्ट तक जाऊंगा

ऐसा बताया जाता है कि सुरेन्द्र सिंह का स्मृति इरानी की जीत में काफ़ी बड़ा योगदान था. प्रधान होने के चलते उनका आसपास के गाँवो में काफ़ी प्रभाव था जिसका फ़ायदा स्मृति इरानी को चुनावों में मिला. नवनिर्वाचित सांसद स्मृति इरानी का अपने साथी की अर्थी को कंधा देना समाज को एक बहुत बड़ा संदेश देता है. हिंदू संस्कृति में जहाँ अब तक पुरुष ही अर्थी को कंधा देते आए हैं, वहाँ एक स्त्री का एक पुरुष की अर्थी को कंधा देना समाज के उन वर्जनाओं को तोड़ता है जो सदियों से परम्परा के नाम पर चली आ रही हैं.

Rashmi Singh
Writer by fluke, started with faking news continuing the journey with Lopak.

3 Comments

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