परिवारवाद की स्मृति पर ‘ईरानी’ का ऐतिहासिक पलटवार!

स्मृति ईरानी ने ‘गाँधीयों का दुर्ग’ गिरा दिया है. पांच वर्षों में उनका अथक परिश्रम और अमेठी की जनता के लिए उनका समर्पण आज फलित हुआ है. यह एक अभूतपूर्ण क्षण है. 70 सालों से गाँधीयों ने जिस दुर्ग को अपनी प्रतिष्ठा का प्रतीक बना लिया था, इस बार उसको ढ़हाने वाली भी स्मृति ईरानी बनी. उनके राजनैतिक जीवन के लिए यह एक बड़ी कामयाबी है. हार न मानने वाली उनकी इच्छाशक्ति का ही यह परिणाम है, यदि हम ऐसा कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी.

इसके पीछे के रणनीतिक कारणों के बारे में लोपक पहले ही आपको बता चुका है. लोपक ने आपको बताया कि 2009 के चुनावों में राहुल गांधी 4,64,195 वोट लाकर बसपा के आशीष शुक्ला से लगभग पौने तीन लाख वोटों से जीते थे. वोटों का शेयर भी 72% था जो कि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी बसपा के 14.54% से बहुत ज्यादा था. 2014 चुनावों में जीत का ये मार्जिन घटकर मात्र 1 लाख 7 हज़ार वोटों के करीब रह गया था, वोट शेयर का अंतर जो 2009 में 58% के करीब था, वो घट कर मात्र 12.4 % रह गया. इसी एक बात ने अमेठी में स्मृति ईरानी को और मज़बूती दी है.

एक महिला, जिसके ऊपर विपक्ष द्वारा यदा-कदा व्यक्तिगत हमले किये गए. स्तरहीन टिप्पणियां की गई, वो महिला लगातार अपने दल और अपने लोकसभा क्षेत्र के लिए समर्पित रही. यदि आप इसको लोकतंत्र की जीत नहीं मानते हैं, तो हमारे ख्याल से आपको लोकतंत्र की अपनी परिभाषा सुधारने की आवश्यकता है.

लोकतंत्र का यह बहुत ही आनंदित करने वाला क्षण है. एक लोकसभा क्षेत्र को अपनी पारिवारिक बपौती समझने वाले लोगों को यह जनता का एक करारा संदेश है. स्मृति की यह जीत छोटी हो या बड़ी, लेकिन जिस कर्मठता के साथ उन्होंने यह चुनाव लड़ा, उसको एक स्टडी के तौर पर लेना चाहिए.

चाहें वह गांवों में लगी आग हो या फिर अमेठी की जनता को सुविधाएं मुहैय्या कराना. अभी कुछ ही साल पहले सांसद ना रहने के बावजूद उन्होंने अमेठी की महिलाओं के लिए स्वरोजगार हेतु अमेठी अचार जैसे इनिशिएटिव के साथ आई. यही स्मृति ईरानी की सबसे बड़ी ताकतों में से एक थी…जनता से जुड़ाव! राहुल गांधी में यही बात नदारद थी. यही कारण है कि अब वो अमेठी से हमेशा के लिए नदारद कर दिए गए हैं.

संसद में उनके भाषणों और तीखे तेवरों के लिए भी देश के लिबरल गैंग द्वारा बहुत अपमानित किया गया. फिर भी वह लगातार डंटी रही. स्मृति ईरानी को यदि उस कालखंड में प्रश्नों के कठघरे में खड़ा किया गया तो उनको उनकी जीत के लिए आज बधाई भी मिलनी चाहिए. यह एक सोच की जीत है.

देश की जनता के साथ अमेठी की जनता भी यह समझ चुकी है कि अब यह देश विकासवाद की ही धुरी पर चलेगा. निश्चित रूप से नरेंद्र मोदी अपनी मुंहबोली बहन की इस जीत पर अपनी जीत से भी ज़्यादा खुश होंगे. स्मृति ईरानी के लिए यह जीत बड़ी है. हमारी शुभकामनाएं उनके साथ हैं. उनकी नई पारी के लिए उनको बहुत-बहुत बधाई!

2 Comments

  1. Avatar
    October 9, 2019 - 5:21 am

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