झूठ फैलाते पकड़े गए सैम पित्रोदा! इस बार 200 शिक्षकों के नाम पर फाड़ा बिल!

राजीव गांधी के तथाकथित अपमान के मामले में एक नया मोड़ आया. इस बार कांग्रेस के अध्यक्ष और अमेठी से अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे राहुल गांधी के गुरु सैम पित्रोदा ने एक लिस्ट जारी की. उनका यह कहना है कि दिल्ली के 200 प्रोफेसर्स ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अपना विरोध दिखाने के लिए आने हस्ताक्षर किए हैं.

कहानी सच भी लगने लगी थी, जब तक यह नहीं पता चला कि इसके पीछे का असल खेल क्या है. सैम पित्रोदा की मानें तो यह सभी शिक्षक प्रधानमंत्री मोदी के बयान से काफी आहत हैं. इनका यह मानना है कि मोदी ने राजीव गांधी को अपमानित किया है. हालांकि कोई 1984 दंगे, एंडरसन का अध्याय और बोफोर्स तोप के घोटाले की सच्चाई को अस्वीकार नहीं कर सकता है. फिर भी इन 200 शिक्षको की लिस्ट में काफी कुछ अजीब लग रहा था. इसके पीछे का कारण भी सामने आ गया.

टाइम्स नाउ के पत्रकार मोहित शर्मा ने जब इसकी पड़ताल की तो उनको दो प्रोफेसर ऐसे मिलें जिनको इसके बारे में जानकारी ही नहीं थी. उनको तो यह भी नहीं पता था कि उनके नाम का हस्ताक्षर इस लिस्ट में कर दिया गया है.

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर विजिका और प्रोफेसर मनोज को यह पता ही नहीं है कि उनके हस्ताक्षर इस लिस्ट में आ चुके हैं. पत्रकार मोहित द्वारा जब उनको इसके बारे में खबर दी गई तब उन्हें यह मालूम चला कि उनके नाम पर कोई और ही बिल फाड़ गया है.

इस खबर के इतर जरा हम एक बार कांग्रेस पार्टी के हालातों को देखते हैं. 2014 के बाद से ही अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही इस तथाकथित अखिल भारतीय पार्टी के नीति निर्माताओं की स्थिति यह हो चुकी है कि अब उन्हें जबरदस्ती लोगों की सहायता लेनी पड़ रही है. लोकतंत्र में जबरदस्ती का कोई कांसेप्ट नहीं होता. जहां जबरदस्ती होती है वहां लोकतंत्र नहीं होता.

यह दूसरी बार है जब कांग्रेस पार्टी सीधा झूठ बोलते हुए पकड़ी गई हैं. इससे पहले उसके द्वारा एक लिस्ट निकाली गई थी. जिसमें कुछ पूर्व सैनिकों के हस्ताक्षर दिए गए थे. कहा गया था कि वह सैनिक प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सेना के राजनीतिकरण से गुस्से में है. उसकी भी पड़ताल पर यह पता चला कि उसमें कई ऐसे सैनिक हैं जिनको उसके बारे में पता ही नहीं था. इनमें से कुछ तो सेना के पूर्व जनरल भी रह चुके हैं.

जरा एक बार सोच कर देखें कि जो पार्टी अपने नेताओं के ऊपर छाती ठोक कर गर्व से कहती है कि उसकी पार्टी ने सबसे अधिक स्वतंत्रता सेनानी दिए, जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी जैसे नाम अभी तक राजनीतिक लाभ पहुंचा लेती है. फिर भी वह पार्टी इस प्रकार के अर्ध सत्य पर अपनी भविष्य की राजनीति खेलना चाहती है. आखिर क्या यही कांग्रेस पार्टी की भविष्य की राजनीति होने वाली है?

यूनिवर्सिटी के सिर्फ दो ही प्रोफेसर अभी ऐसा कहते हुए पाए गए हैं. गिनती और भी आगे बढ़ सकती है. अभी तक तो सोशल मीडिया पर विभिन्न पार्टियों के आईटी सेल को ही फेक न्यूज़ का कारण माना जाता था.

अब तो राजनीतिक पार्टियां भी सीधे झूठ फैलाने लगी है. देखते हैं कि राहुल गांधी इसका क्या जवाब देते हैं. वैसे हमें उम्मीद तो यही है कि एक बार फिर से रणदीप सुरजेवाला को ही इसका हिसाब करना पड़ेगा. स्मृति ईरानी पहले ही राहुल गांधी को ‘लापता सांसद महोदय’ घोषित कर चुकी हैं.

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