रवीश कुमार पचा नहीं पा रहे कन्हैया की हार, देखें वीडियो

2014 कि चुनावों में लगभग सभी लेफ़्ट इंटेलेकचुअल्स की सबसे बड़ी उम्मीद अरविंद केजरीवाल थे. पर यह उम्मीद कुछ ही समय में निराशा में बदलने लगी. फिर आए हार्दिक पटेल जो कि मोदी के गढ़ में मोदी को चुनौती दे रहे थे. और फिर आए छात्रा नेता कन्हैया कुमार जिनकी उपलब्धि केवल अंट-शंट देश विरोधी नारे लगाना थी.

कन्हैया कुमार के लिए ‘कौन जात हो” फ़ेम रवीश कुमार जी का लगाव इन चुनावों में देखने लायक़ था. बेगूसराय में सीपीआई की तरफ़ से गिरिराज सिंह के ख़िलाफ़ लड़ रहे कन्हैया कई मोदी विरोधियों की उम्मीद बन गए. कन्हैया के रोड शो में पहुँचे रवीश जी ने पूरी कोशिश की कि कन्हैया की छवि कल के नेता के रूप में बनाई जाए. लालू यादव को जेल होने के बाद उनके ‘रस्टिक चार्म’ का जादू पत्रकार ज़्यादा दिन नहीं चला पाए. पर कन्हैया के रूप में उन्हें आशा की किरण मिली.

कन्हैया गाँव में रहते हैं, ग़रीब परिवार से आते हैं इस बात को नकारा नहीं जा सकता. पर चुनाव जीतने के लिए इस छवि से कहीं ज़्यादा ज़रूरी है कि आपको यह समझ हो की जनता की क्या ज़रूरतें हैं. जनता को आपके आज़ादी के नारों से मतलब नहीं है, जनता को मतलब है कि उसके घर में पानी बिजली सड़क हो.

रंग दे बसंती की क्रांतिकारी सोच केवल फ़िल्मों में और छात्रा राजनीति तक सही है. असल राजनीति में अब जनता को नारों से उकसाना या ‘नरेंद्र मोदी आपके खाते से पैसा काट कर भगोड़ों को दे देंगे’ यह कहने से काम नहीं बनेगा.

आज चुनावी रिपोर्टिंग करते समय रवीश कुमार जी ने यह कह दिया कि बेगूसराय से लड़ रहे कन्हैया कुमार भी आगे चल रहे हैं. ऐसा लग रहा था जैसे रवीश जी यह लाइन बोलने का अभ्यास कई दिनों से कर रहे हैं. पढ़ते पढ़ते ही उन्हें एहसास हुआ कि ग़लत बोल गए पर सोचा होगा जाने देते हैं, इतनी बार स्क्रीन पर झूठ बोल चुके हैं एक बार और सही.

इसे फ़ेक न्यूज़ की कैटेगरी में डाले या ना डालें इस बात पर थोड़ी दुविधा है क्योंकि उनके यह बोलने के चंद पलों बाद ही NDTV की स्क्रीन पर कन्हैया बेगूसराय में पीछे चल रहे हैं यह दिखा दिया.

रवीश जी को इतना विश्वास था कि उनकी काली स्क्रीन और विडंबनाओं पर लम्बे भाषण, पत्रकारों से उनके इंटरव्यू स्टाइल पर सवाल जनता की आँखों में धूल झोंक देगा. छटपटाहत इतनी थी कि रवीश जी ने फ़ेक न्यूज़ की फ़ैक्टरी यूट्यूबर ध्रुव राठी को भी अपने चैनल पर बुला लिया. ऐसी उम्मीद तो नहीं है कि रवीश जी को यह समझ आए कि यह पब्लिक अब सब जानती है. पब्लिक के पास फ़ेसबुक है,ट्विटर है ,गूगल है और आपके पास हैं कन्हैया और हार्दिक जैसे उम्मीदवार.

Rashmi Singh
Writer by fluke, started with faking news continuing the journey with Lopak.

1 Comment

  1. Avatar
    Pratik
    May 28, 2019 - 7:58 pm

    Nice one…

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *