मोदी पर अंधाधुंध हमले करते राहुल गाँधी हुए जवाब से आहत!

राहुल गांधी इस समय बहुत गुस्से में है. जाहिर सी बात है कि राहुल गांधी के साथ पूरी पार्टी गुस्से में होगी. कांग्रेस पार्टी का एक गुस्सा इसलिए भी है क्योंकि इस समय वह सत्ता से बाहर है. राहुल गांधी के गुस्से का कारण नरेंद्र मोदी का राजीव गांधी के ऊपर किया गया है कटाक्ष है. एक रैली में राहुल गांधी के सवालों का जवाब देते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा कि आप के पिताजी भ्रष्टाचारी नंबर वन थे. नरेंद्र मोदी ने यहां पर काफी कड़ी शब्दों का प्रयोग किया. इसके साथ ही नरेंद्र मोदी ने राजीव गांधी के समय हुए बोफोर्स तोप के घोटाले की भी याद दिलाई. सारा मामला यहीं से शुरू होता है.

रक्षा सौदे को लेकर कांग्रेस पार्टी के दौर में भ्रष्टाचार कोई नई बात नहीं है. उस समय जब हमारे देश की सेना को तत्कालीन दौर से हमारी सीमाओं को बचाना था, तो उसे बोफोर्स तोप की सख्त आवश्यकता थी. दुनिया को पता है कि बोफोर्स के महत्वपूर्ण सौदे में क्या हुआ. इस पर सीआईए की एक रिपोर्ट भी है जो राजीव गांधी के ऊपर कई प्रश्न उठाती है. निश्चित रूप से राजीव गांधी का दुखद अंत हुआ. राहुल गांधी उस पीड़ा को शब्दों में बयान नहीं कर पाते होंगे. आखिरकार राजीव गांधी राहुल गांधी के पिता थे. राजनीति में राजीव गांधी और राहुल गांधी का जो भी कद हो, लेकिन पारिवारिक मामले में यदि देखें तो एक पिता का साया सर से हट जाना राहुल गांधी के लिए बहुत बड़ा नुकसान था. आज राहुल गांधी राजनीति में अपनी ही पार्टी के अध्यक्ष हैं. वह देश के भावी प्रधानमंत्री भी बताए जाते हैं. देश के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख से अपने पिता के बारे में ऐसी बात सुनके राहुल गांधी का भड़कना स्वाभाविक है. इन सब के बीच कुछ तथ्य भी हैं जो जनता को समझना आवश्यक है.

आज की युवा पीढ़ी को शायद यह पता भी ना हो कि बोफोर्स घोटाला क्या है. इसने हमारी देश की सेना को किस स्तर तक खतरे में डाल दिया था. खाली हाथ सीमा पर खड़ा रहना मृत्यु को दावत देना जैसा है. आज के आधुनिक युग में यदि पुराने हथियारों के साथ सेना को खड़ा कर दिया जाए तो उनके हाथ खाली ही कहे जाएंगे. आज हमारे दुश्मन देश अपनी शक्ति को बढ़ा रहे हैं. उदाहरण के लिए राफेल को लेते हैं. हमारे देश में राफेल जैसे विमान के ऊपर भी विपक्ष उंगलियां उठा रहा है. यूपीए शासन काल के दौरान राफेल की खरीद नहीं हो पाई, लेकिन राहुल गांधी उसको आज एक घोटाला कह रहे हैं. जबकि 36 राफेल विमान का सौदा 3 साल पहले ही पूर्ण कर दिया गया है.2019 के अंत तक कुछ राफेल हमारे देश में आ भी जाएंगे. लेकिन यह बात राफेल की नहीं है. हमने यहां पर राफेल की बात इसलिए की क्योंकि वह हमारे देश की सुरक्षा में एक अहम भूमिका निभाने जा रहा है. वैसे ही तत्कालीन दौर में बोफोर्स तोप हमारे लिए बहुत आवश्यक थी. लेकिन उस समय की सरकार द्वारा इसमें हुए भ्रष्टाचार ने देश की सुरक्षा व्यवस्था के साथ एक बहुत बड़ा खिलवाड़ किया.

आज की राजनीति में शब्दों की मर्यादा शायद गायब हो चुकी है. राहुल गांधी ने ही इसकी शुरुआत की थी. ‘चौकीदार चोर है’ का नारा राहुल गांधी द्वारा ही दिया गया है. वह सिर्फ इस नारे को दोहराते ही नहीं बल्कि जनता से जबरदस्ती दोहरवातें भी हैं. उनकी बहन प्रियंका गांधी तो चार कदम आगे निकलकर अमेठी के बच्चों से देश के प्रधानमंत्री को अपशब्द भी कहलवा रही हैं. यह आज की राजनीति की एक सच्चाई है. अपने ऊपर होते हुए इतने हमलों को देखकर नरेंद्र मोदी ने सिर्फ उसका प्रत्युत्तर दिया है. अब यहां राहुल गांधी के लिए दिक्कत यह है कि वह प्रत्युत्तर इतना तीखा था कि वह बेचारे उसको पचा नहीं पा रहे हैं. यही हाल प्रियंका गांधी का भी है. राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को यह समझना चाहिए कि यह उनके ही सवालों का प्रत्युत्तर है. आप किसी दूसरे व्यक्ति को गाली देकर यह उम्मीद नहीं लगा सकते कि वह आपको जवाब नहीं देगा. वह अपने समय पर अपने तरीके से जवाब देगा. राहुल गांधी के मामले में तो स्थिति यह है कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट से माफी तक मांगनी पड़ी है. उनके पास राफेल घोटाले का कोई ठोस सबूत नहीं है. वह तो यह भी नहीं जानते हैं कि आखिर अनिल अंबानी को तथाकथित 30,000 करोड रुपए का फायदा नरेंद्र मोदी ने कैसे दिलवाया. इसके लिए भी वह पी चिदंबरम और अपने पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला के कंधे पर बंदूक रखकर चलाते हैं.

एक तर्क यह भी रखा जा रहा है कि एक दिवंगत आत्मा का अपमान किया जा रहा है. राजीव गांधी एक दिवंगत आत्मा है इसमें कोई शक नहीं, लेकिन इससे उनके जीवन में की गई गलतियां धुल नहीं जाती. कोई इससे इनकार नहीं कर सकता कि उन्हीं के कार्यकाल में बोफोर्स का घोटाला हुआ था. कांग्रेस पार्टी भले ही राजीव गांधी को शहीद का दर्जा दे, लेकिन कहीं ना कहीं कांग्रेस राजीव गांधी को देश का स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा देने का प्रयास करती आई है. हालांकि आज के सोशल मीडिया के युग में स्थितियां बदल चुकी हैं. आज लोग प्रश्न पूछने लगे हैं. लोगों को तथ्यों को इकट्ठा करने के लिए दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ता. इस दौर में भी यदि नरेंद्र मोदी के पास एक बड़ा जनसमर्थन है, तो यह कांग्रेस के लिए निश्चित रूप से एक सर दर्द है.

नरेंद्र मोदी पर हमले आज से ही नहीं हो रहे हैं. उन पर यह हमले 2002 के समय से ही किए जा रहे हैं. नरेंद्र मोदी शायद इस देश के वह इकलौते ऐसे मुख्यमंत्री होंगे जिन्हें सीबीआई ने 9 घंटे तक बैठाकर पूछताछ की थी. अगर आज के समय किसी राज्य के मुख्यमंत्री को सीबीआई 9 घंटे बैठाकर पूछताछ करेगी तो इस देश के अंदर तथाकथित बुद्धिजीवी, लिबरल ग्रुप और विपक्ष के नेता धरने पर बैठ जाएंगे. हल्ला मच जाएगा किस देश में संविधान खतरे में है. लोकतंत्र खतरे में है. वैसे यह ना करने के बावजूद भी यह शोर मचाया जा रहा है. कोई यह तर्क अवश्य दे सकता है कि नरेंद्र मोदी को इतने कठोर शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए था. एक देश के प्रधानमंत्री के रूप में भी नरेंद्र मोदी द्वारा ऐसा प्रयोग किया जाना किसी को बुरा लग सकता है. लेकिन एक बार जरा आप सोच कर देखिए कि जब एक काल्पनिक भय को देश में खड़ा करने के प्रयास में सारी राजनैतिक मर्यादा तोड़ दी जाए, तो आप एक प्रधानमंत्री से कैसे प्रत्युत्तर की उम्मीद करते हैं? निश्चित रूप से नरेंद्र मोदी अटल बिहारी वाजपेई नहीं है. अगर आप नरेंद्र मोदी को अटल बिहारी वाजपेई के साथ तुलनात्मक रूप से देखते हैं तो आप एक भारी भूल कर रहे हैं. अटल बिहारी वाजपेई का दौर और उनकी राजनीति एक अलग किस्म की राजनीति थी. अटल बिहारी वाजपेई की बात करने की कला और अपनी बात को रखने का तरीका भी अलग था. निश्चित रूप से अटल जी ने अपने काल में कई बार खुद पर मजाक बनते देखा है, लेकिन वह राजनीतिक दौर वैसा नहीं था जैसा आज है. आज की राजनीति में तो सारी मर्यादाओं को जैसे तिलांजलि दे दी गई है. यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है लेकिन सच्चाई है.

अपने किसी भी राजनैतिक हथियार का इस्तेमाल करने से पहले राहुल गांधी को यह समझना होगा कि इस युद्ध में सामने वाला व्यक्ति भी वैसा ही वार करना जानता है. जब आप किसी के ऊपर युद्ध में प्रहार करते हैं तो वह अपने बचाव में कुछ न कुछ अवश्य करता है. आप जब राजनैतिक शस्त्रों का इस्तेमाल अपने विपक्ष पर करते हैं तो सामने वाला भी तैयार रहता है. युद्ध में जीत और हार का फैसला दोनों पक्षों की मजबूती करती है. वार करने की मजबूती ही नहीं बल्कि वार झेलने की भी मजबूती जिसमें होती है वहीं युद्ध को जीत पाता है. उम्मीद है कि राहुल गांधी इस बात को समझेंगे.

1 Comment

  1. Avatar
    September 30, 2019 - 2:28 pm

    Levitra Bayer 20 Mg online pharmacy Order Viagra No Prescription Online Discount Order Direct Provera No Rx Cialis Sans Ordonnance Paris

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *