बंगाल में बीजेपी कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ थम नहीं रही चुनावी हिंसा

बंगाल चुनावों में हो रही हिंसा को देख ऐसा लगता है जैसे इस बार चुनाव जीतने के लिए विपक्ष के सभी कार्यकर्ताओं/ नेताओं की या तो हत्या कर दी जाएगी या उन्हें धमकाया जाएगा. यह शर्मनाक है कि बीजेपी के कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ हिंसा में ना केवल मासूम जाने जा रही है बल्कि यह संदेश भी दिया जा रहा है कि चुनौती देने वालों की आवाज़ को दबा दिया जाएगा.

पश्चिम बंगाल से भाजपा उम्मीदवार और पूर्व आईपीएस अधिकारी भर्ती घोष के साथ मतदान केंद्र के बाहर ही धक्का मुक्की और मारपीट की गई. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक उनकी गाड़ियों के काफिले पर भी हमला किया गया, जिसमें शीशे तक टूट गए.

पोलिंग एजेंट के साथ मतदान केंद्र में घुसने की कोशिश करते वक़्त उनके साथ मारपीट की घटना हुई. ऐसा बताया जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस की महिला समर्थकों ने भारती के साथ मारपीट की और जमीन पर गिरा दिया. यह बेशर्मी है या दबंगई कि मतदान केंद्र के आसपास जहाँ इतना मीडिया तैनात रहता है वहाँ भारती घोष के साथ ऐसा हुआ.

पश्चिम बंगाल के भाजपा प्रमुख भी हिंसा से वंचित नहीं रहे. मोहनपुर में उनकी गाड़ी को TMC के समर्थकों ने घेर लिया और गाड़ी के ऊपर चढ़ने की कोशिश करने लगे. समर्थक इतने ग़ुस्से में थे कि अगर दिलीप घोष गाड़ी से बाहर आ जाते तो शायद ही ज़िंदा बचके निकलते. यहाँ भी भारी मात्रा में सुरक्षा बल होने के बावजूद TMC समर्थकों को ज़रा भी भय नहीं था.

वहीं पश्चिम बंगाल के ही झारग्राम जिले रामेन सिंह नामक भाजपा कार्यकर्ता की हत्या कर दी गयी. भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने आरोप लगाया है कि टीएमसी कार्यकर्ताओं ने उनके घर में घुसकर हत्या की है. इसके अलावा दो भाजपा कार्यकर्ताओं पर भी गोली चलाई गई, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया

पिछले महीने भी 32 साल के दुलाल दास जो की भाजपा कार्यकर्ता थे, उनका शव बलरामपुर इलाक़े में बिजली के एक हाई टेंशन टावर से लटका मिला. इस घटना के पहले बलरामपुर इलाक़े में ही एक अन्य भाजपा कार्यकर्ता, 20 साल के त्रिलोचन महतो का शव भी पेड़ से लटका मिला था.

कार्यकर्ता तो कार्यकर्ता सत्तारूढ़ पार्टी के समर्थक हाथ में बंदूक़ थामे मतदाताओं को डराते धमकाते दिखे.

शब्द कम पड़ जाते हैं जब यह सब घटनाओं के बारे में पढ़ने को मिलता है. ”Intolerance गैंग” जब केरल में हुई हत्याओं पर नहीं बोली तो इन हत्याओं पर कुछ बोलेगी ऐसी कोई उम्मीद नहीं. एक व्यक्ति का इसलिए जान गँवा बैठना क्योंकि वह बीजेपी समर्थक है यह बेहद शर्मनाक है.

हो सकता है बंगाल की पार्टियाँ इस उम्मीद में हो कि डराने धमकाने से बीजेपी को समर्थन कम मिले या लोग अगली बार बीजेपी को समर्थन ही ना दें. पर उन परिवारों का सोचिए जिनके घर का चिराग़ आपने केवल इसलिए बुझा दिया ताकि आप एक सीट जीत सकें, ताकि आप यह बता सकें कि यहाँ केवल हमारा राज है और किसी का नहीं. ताकि आप यह जता सकें कि जो हमारे राज के ख़िलाफ़ किसी को समर्थन देगा उसे सीधे अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा.

और यह सिलसिला आज या कल का नहीं है, वामदल की पार्टियाँ चाहे केरल हो या बंगाल हिंसा के बिना कहीं टिक ही नहीं पाई हैं. और इस हिंसा का सबसे बड़ा शिकार हिंदू या बीजेपी समर्थक ही हुआ है. चुनाव में जीतने के लिए सूली पर चढ़ाए गये इन लोगों की आत्माओं को शायद तभी शांति मिले जब इन ताक़तों को यही लोकतंत्र जवाब दे जिसका इस्तेमाल कर यह लोगों को डरा धमका रहे हैं.

सत्ता के मद में चूर शायद होश में आने तक कितनी और जाने ले बैठेंगे यह कहना मुश्किल है पर यह ज़रूरी है कि भाजपा संगठन अपने ज़मीनी कार्यकर्ताओं को सुरक्षा दे.


दावा त्याग – लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. आप उनको फेसबुक अथवा ट्विटर पर सम्पर्क कर सकते हैं.

Rashmi Singh
Writer by fluke, started with faking news continuing the journey with Lopak.

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