पाकिस्तान के रिटायर्ड ऑफिसर फैला रहे हैं फ़ेक न्यूज़

बालाकोट हवाई हमलों के बाद एक स्वतंत्र सोशल मीडिया ट्रैकिंग ऑपरेशन ने पाया कि कम से कम आठ ट्विटर हैंडल थे जो स्वतंत्र पर्यवेक्षक की आड़ में भारत पाकिस्तान के बीच चल रहे घमासान को लेकर या अन्य रक्षा से जुड़ी बातों को लेकर अपुष्ट खबरें फैला रहे थे. इनमे से ज़्यादातर ख़बरें फ़ेक साबित हुई हैं.

इसी तरह के ट्विटर अकाउंट से पाकिस्तान में फोर्ट अब्बास और सियालकोट पर कथित भारतीय हमलों के अलावा जैश-ए-मोहम्मद मसूद अजहर के मारे जाने की झूठी ख़बर आई थी.

हैदराबाद में स्थित खोजी टीम ‘GreatgameIndia‘ द्वारा की गई एक जांच में पाया गया कि इनमें से कुछ हैंडल सोशल मीडिया इंटेलीजेंस ऑपरेटरों द्वारा रिटायर्ड पाकिस्तानी जनरलों के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे हैं. अर्थात देखने में लगता है की फैलाई ख़बर किसी स्वतंत्र यूज़र द्वारा लिखी गई है पर इसके पीछे पाकिस्तानी सेना के लोग होते हैं.

मार्च में 2 पाकिस्तान अकाउंट्स द्वारा यह ख़बर फैलाई गई कि मसूद अज़हर मारा गया है और इसे कई मीडिया वालों ने इंटेल के सूत्र से दी गई ख़बर मानकर फैला दिया. कहानी की जाँच पड़ताल से पता लगा कि यह एक ब्लॉगपोस्ट के रूप में छापा गया था ना कि किसी विश्वसनीय सूत्र द्वारा, ‘मसूद अजहर एक शीर्ष रैंक के पूर्व आईएसआई अधिकारी के साथ मारा गया: कन्फर्म;’, यह ‘ टाइम्स प्राइम’ नामक वेबसाइट द्वारा फैलाई गई थी .

एक और फ़ेक न्यूज़ जिसमें लिखा था कि भारतीय वायु सेना ने एक और हवाई हमला किया, इस बार पाकिस्तान के बहावलपुर जिले में चोलिस्तान रेगिस्तान में फोर्ट अब्बास के पास अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार.

सूचना को एक हैंडल एफ जेफ़री (टाइमस्टैम्प 4.01 बजे, 4 मार्च) द्वारा फैलाया गया था। भारत ने ऐसे किसी भी हमले के होने की ख़बर का खंडन किया. हवाई हमलों के दिन, एक ट्विटर हैंडल ने सियालकोट में नियंत्रण रेखा के पार से गोलीबारी की सूचना दी थी. ग्रेटगेमइंडिया के सह-संस्थापक श्री कासली ने कहा, “हमने पुलवामा हमले के बाद कुछ संदिग्ध ट्विटर हैंडल को ट्रैक करना शुरू किया. यह सभी अकाउंट्स बालाकोट हवाई हमले के पहले तक शांत थे. सुबह के बाद, इन शरारती नेटवर्क के माध्यम से (अपुष्ट) जानकारी का दुश्मन लाइनों के पीछे से स्वतंत्र पर्यवेक्षकों के रूप में भेजी जा रही थी.”

यहाँ स्वतंत्र पर्यवेक्षकों से मतलब है ऐसे हैंडल्स जो देखने में भारतीय या पाकिस्तानी या पाकिस्तान से जुड़े हुए ना लगें. पढ़ने में में ऐसा लगे कि यह किसी विदेशी मीडिया के व्यक्ति ने किया है.

श्री कासली ने कहा, “कुछ भारतीय पत्रकारों ने इन हैंडल के साथ बातचीत की और इन ख़बरों को ‘शीर्ष इंटेल स्रोतों’ के हवाले से बताकर फैलाने का काम किया. ” जब लोगों ने ट्विटर पर इस बात पर शक जताना शुरू किया कि ट्वीट करने वाले अकाउंट्स संदेहास्पद हैं तब जाकर पत्रकारों को लाइन बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा. ”

श्री कासली ने कहा कि यह ट्वीट अति उत्साहित होकर या मज़ाक़ मस्ती ने नहीं किया गए थे बल्कि ये लोगों को भ्रमित और अराजकता फैलाने के लिए किए गए थे.

KashmiriIntel नामक एक ट्विटर हैंडल सुरक्षा में सेंध लगने की झूठी जानकारी फैला रहा था पर वक़्त रहते ही भारतीय सेना सेना ने ट्विटर पर शिकायत की, जिसने बाद में इसे हटा दिया गया. सेना की आड़ में देश के लिए हानिकारक के रूप में जानकारी, एक और हैंडल द्वारा फैलाई जा रही है.

जांचकर्ताओं ने पाया कि फ़ारन ‘जेफ़री’, जो एक पर्यवेक्षक के रूप में ट्विटर पर नज़र आ रहे थे दरअसल वो काउंटर टेररिज़्म के इस्लामिक थियोलॉजी में दक्षिण एशिया डेस्क के प्रमुख थे, इस थिंक टैंक का मुख्यालय लंदन में है. पर यहाँ इस बात का उल्लेख नहीं किया गया है कि वो कमांडइलेवन (Command Eleven) नामक एक पाकिस्तानी राष्ट्रीय सुरक्षा थिंक टैंक से भी जुड़ा है.

“कमांडलेवन एक पाकिस्तानी प्रचार संगठन है जो सूचना युद्ध (information warfare) में विशेष सेवानिवृत्त पाकिस्तान जनरलों द्वारा निर्मित और निर्देशित है. इसकी नई वेबसाइट https://www.commandeleven.com पुलवामा हमले के बाद से ही चल नहीं रही, ”श्री कासली ने कहा.

इंडिया ऐसी ही information warfare का पीड़ित था “लेफ्टिनेंट जनरल एच.एस. के शब्दों में हम पहले 60 घंटों में धारणा युद्ध हार गए. कमांडएलेवेन से हमले के बाद उत्पन्न हुई झूठी जानकारी का एक बड़ा हिस्सा था, “श्री कासली ने कहा.

इन सबमें सबजे ज़्यादा चिंता की बात यह है की भारतीय मीडियाकर्मियों ने भी बिना जाँचे परखे इन ख़बरों को फैलाने में मदद की. फ़ेक न्यूज़ का रोना रोने वाली मीडिया के लोगों ने देश की सुरक्षा से सम्बंधित जानकारी को पहले जाँचना परखना ज़रूरी नहीं समझा ना ही यह जागरूकता फैलाने की कोशिश की कि यह झूठी ख़बर है और इन ख़बर को हवा ना दी जाए.

बालाकोट हवाई हमलों के बाद एक स्वतंत्र सोशल मीडिया ट्रैकिंग ऑपरेशन ने पाया कि कम से कम आठ ट्विटर हैंडल्स थे जो स्वतंत्र पर्यवेक्षण की आड़ में भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे घमासान पर या रक्षा से जुड़ी बातों पर अपुष्ट खबरें फैला रहे थे. इनमे से ज़्यादातर ख़बरें फ़ेक साबित हुई हैं. इसी तरह के ट्विटर अकाउंट से पाकिस्तान में फोर्ट अब्बास और सियालकोट पर कथित भारतीय हमलों के अलावा जैश-ए-मोहम्मद मसूद अजहर के मारे जाने की झूठी ख़बर आई थी.

हैदराबाद स्थित खोजी टीम ‘GreatgameIndia’ द्वारा की गई एक जांच में पाया गया कि इनमें से कुछ हैंडल सोशल मीडिया इंटेलीजेंस ऑपरेटरों द्वारा रिटायर्ड पाकिस्तानी जनरलों के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे हैं. देखने में लगता है कि फैलाई गयी ख़बर किसी स्वतंत्र यूज़र द्वारा लिखी गई है पर इसके पीछे पाकिस्तानी सेना के लोग होते हैं. मार्च में 2 पाकिस्तान अकाउंट्स द्वारा यह ख़बर फैलाई गई कि मसूद अज़हर मारा गया है और इसे कई मीडिया के एक वर्ग ने इंटेल के सूत्र से दी गई ख़बर मानकर फैला दिया.

कहानी की जाँच पड़ताल से पता लगा कि यह एक ब्लॉग पोस्ट के रूप में छापा गया था ना कि किसी विश्वसनीय सूत्र द्वारा. ‘मसूद अजहर एक शीर्ष रैंक के पूर्व आईएसआई अधिकारी के साथ मारा गया: कन्फर्म;’, यह ‘ टाइम्स प्राइम’ नामक वेबसाइट द्वारा फैलाई गई थी. एक और फ़ेक न्यूज़ जिसमें लिखा था कि भारतीय वायु सेना ने एक और हवाई हमला किया, इस बार पाकिस्तान के बहावलपुर जिले में चोलिस्तान रेगिस्तान में फोर्ट अब्बास के पास अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार.

सूचना को एक हैंडल एफ जेफ़री (टाइमस्टैम्प 4.01 बजे, 4 मार्च) द्वारा फैलाया गया था. भारत ने ऐसे किसी भी हमले के होने की ख़बर का खंडन किया. हवाई हमलों के दिन एक ट्विटर हैंडल ने सियालकोट में नियंत्रण रेखा के पार से गोलीबारी की सूचना दी थी. ग्रेटगेमइंडिया के सह-संस्थापक श्री कासली ने कहा; “हमने पुलवामा हमले के बाद कुछ संदिग्ध ट्विटर हैंडल को ट्रैक करना शुरू किया. ये सभी अकाउंट्स बालाकोट हवाई हमले के पहले तक शांत थे. सुबह के बाद इन शरारती नेटवर्क के माध्यम से अपुष्ट जानकारी स्वतंत्र पर्यवेक्षकों के रूप में भेजी जा रही थी.” यहाँ स्वतंत्र पर्यवेक्षकों से मतलब है ऐसे हैंडल्स जो देखने में भारतीय या पाकिस्तानी या पाकिस्तान से जुड़े हुए ना लगें और पढ़ने में में ऐसा लगे कि यह किसी विदेशी मीडिया के व्यक्ति ने किया है.

श्री कासली ने आगे कहा, “कुछ भारतीय पत्रकारों ने इन हैंडल के साथ बातचीत की और इन ख़बरों को ‘शीर्ष इंटेल स्रोतों’ के हवाले से बताकर फैलाने का काम किया.” जब लोगों ने ट्विटर पर इस बात पर शक जताना शुरू किया कि ट्वीट करने वाले एकाउंट्स संदेहास्पद हैं तब जाकर पत्रकारों को लाइन बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा.” श्री कासली ने कहा कि यह ट्वीट अति उत्साहित होकर या मज़ाक़ मस्ती ने नहीं किया गए थे बल्कि ये लोगों को भ्रमित और अराजकता फैलाने के लिए किए गए थे.

KashmiriIntel नामक एक ट्विटर हैंडल सुरक्षा में सेंध लगने की झूठी जानकारी फैला रहा था पर वक़्त रहते ही भारतीय सेना सेना ने ट्विटर पर शिकायत की. इसने बाद इसे हटा दिया गया. सेना की आड़ में देश के लिए हानिकारक जानकारी एक और हैंडल द्वारा फैलाई जा रही है. जाँचकर्ताओं ने पाया कि फ़ारन ‘जेफ़री’ जो एक पर्यवेक्षक के रूप में ट्विटर पर नज़र आ रहे थे, दरअसल वह काउंटर टेररिज़्म के इस्लामिक थियोलॉजी में दक्षिण एशिया डेस्क के प्रमुख थे. इस थिंक टैंक का मुख्यालय लंदन में है पर यहाँ इस बात का उल्लेख नहीं किया गया है कि वह कमांड इलेवन (Command Eleven) नामक एक पाकिस्तानी राष्ट्रीय सुरक्षा थिंक टैंक से भी जुड़ा है.

“कमांडलेवन एक पाकिस्तानी प्रचार संगठन है जो सूचना युद्ध (information warfare) में विशेष सेवानिवृत्त पाकिस्तान जनरलों द्वारा निर्मित और निर्देशित है. इसकी नई वेबसाइट https://www.commandeleven.com पुलवामा हमले के बाद से ही चल नहीं रही, ”; श्री कासली ने कहा; “इंडिया ऐसी ही information warfare का पीड़ित था “लेफ्टिनेंट जनरल एच.एस. के शब्दों में हम पहले 60 घंटों में धारणा युद्ध हार गए. कमांडएलेवेन से हमले के बाद उत्पन्न हुई झूठी जानकारी का एक बड़ा हिस्सा था.“

सबसे ज़्यादा चिंता की बात यह है कि भारतीय मीडिया कर्मियों ने भी बिना जाँचे परखे इन ख़बरों को फैलाने में मदद की. फ़ेक न्यूज़ का रोना रोने वाली मीडिया के लोगों ने देश की सुरक्षा से सम्बंधित जानकारी को पहले जाँचना परखना ज़रूरी नहीं समझा, ना ही यह जागरूकता फैलाने की कोशिश की कि यह झूठी ख़बर है और इन ख़बर को हवा ना दी जाए.

यह आर्टिकल Deccan Chronicle में छपे इस लेख पर आधारित है.

Rashmi Singh
Writer by fluke, started with faking news continuing the journey with Lopak.

3 Comments

  1. Avatar
    September 5, 2019 - 9:03 pm

    Hi, Neat post. There’s a problem with your site in internet explorer, would test this… IE still is the market leader and a huge portion of people will miss your great writing due to this problem.

    Reply
  2. Avatar
    September 17, 2019 - 4:07 am

    byd [url=https://onlinecasinosww.com/#]casino online[/url]

    Reply
  3. Avatar
    September 17, 2019 - 4:08 am

    xjl [url=https://onlinecasinosww.com/#]free casino games online[/url]

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *