पॉलिटिक्स ऑफ परफॉरमेंस की झलक है मोदी का नया मंत्रीमण्डल!

अमित शाह देश के गृह मंत्री होंगे! जी हाँ! वही अमित शाह जिनके ऊपर दशकों से आरोप लगते रहे हैं. कांग्रेस राज में अमित शाह गुजरात भाजपा के वो पहले बड़े नेता थे जिनको जेल में जाना पड़ा था. उस समय उनकी हुंकार बहुत से कांग्रेसी समर्थकों को मज़ाक लग रही थी, लेकिन आज इस निर्णय के बाद अमित शाह मोदी कैबिनेट के दूसरे सबसे ताकतवर और महत्वपूर्ण नेता बन जाएंगे.

अमित शाह के साथ ही निर्मला सीतारमण को भी एक बड़ी जिम्मेदारी मिली है. वो देश की अगली वित्त मंत्री होंगी. अरुण जेटली के द्वारा दोबारा मंत्री न बनाये जाने के आग्रह के बाद मोदी के लिए इस पद पर एक उपयुक्त चेहरा ढूंढना कठिन कार्य था. ऐसा लगता है जैसे यह भाजपा की नई पीढ़ी की सिफारिश हो. इसके साथ ही स्मृति ईरानी को कपड़ा मिनिस्टर, पीयूष गोयल को रेल मंत्री, डॉ. हर्षवर्धन को स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया है. जयशंकर विदेश मंत्री बनाए गए हैं.

मुख्तार अब्बास नकवी को अल्पसंख्यक मंत्री, प्रकाश जावड़ेकर को पर्यावरण मंत्री, रमेश पोखरियाल निशंक को मानव संसाधन मंत्री, सदानंद गौड़ा को केमिकल फर्टिलाइजर मंत्री, रामविलास पासवान को खाद्य आपूर्ति मंत्री, प्रहलाद जोशी को कोयला मंत्री, महेंद्रनाथ पांडेय को कौशल विकास विभाग, अर्जुन मुंडा को आदिवासी कल्याण मंत्री, थावरचंद्र गहलोत को सामाजिक न्याय मंत्री और गिरिराज सिंह को पशुपालन मंत्रालय दिया गया है.

जब आप ध्यान से इन नामों को देखते हैं तो आपको पता चलता है कि कैसे इस मंत्रिमंडल में ‘पॉलिटिक्स ऑफ परफॉरमेंस’ की झलक है. धर्मेंद्र प्रधान को एक बार फिर पेट्रोलियम मिनिस्टर बनाया गया है. उज्ज्वला की सफलता के पीछे धर्मेंद्र प्रधान का ही हाथ था. इसी उज्ज्वला ने भाजपा के सीट टैली को इतना “उज्ज्वल” बना दिया कि उसकी चमक के आगे विपक्ष खो सा गया है. ऐसा कि भाजपा को 303 सीटों का प्रचण्ड बहुमत प्राप्त हुआ. यह बात कई महारथियों को अपनी हार के बाद पता चली है. लेकिन इसी बीच अमित शाह का गृह मंत्री बनाया जाना कितनी बड़ी बात है, इसका अंदाज़ा आप इसी बात से लगा लीजिए कि सोशल मीडिया पर इसका सबसे ज़्यादा विरोध बॉर्डर पार पाकिस्तान की जनता करती नज़र आ रही है. उनका भारत की चुनाव प्रक्रिया में लेश मात्र भी योगदान नहीं, फिर भी उनका ऐसा भयभीत होना लाजिमी है. अमित शाह ही वह व्यक्ति हैं जिनके गुजरात के गृह मंत्री के कार्यकाल के दौरान दिखाई चतुराई के कारण तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को जान से मारने आई आतंकवादी इशरत जहाँ को एनकाउंटर में समेट दिया गया. उसी के बाद शाह को सेक्युलवादी राजनीति ने हमेशा अपने निशाने पर रखा. मोदी के बाद अगर किसी राजनेता का सबसे अधिक चरित्र हनन किया गया, तो वह अमित शाह ही थे. 

समय का खेल देखिये कि अब अमित शाह इस देश के गृह मंत्री होंगे. वह सभी इस समय बहुत सोच में है जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से नरेंद्र मोदी और अमित शाह के खिलाफ लगातार चुनावी कैम्पेन में लगे रहे. दूसरी तरफ बंगाल जैसा राज्य जहां की मुख्यमंत्री अब सड़को पर आकर “खाल खींच लेने” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करती हैं, उनको भी अब बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता है. यह देश तानाशाहों की तानाशाही को हमेशा से नकारता आया है. प्रजातंत्र में प्रजा के धार्मिक विश्वास को ठेस पहुंचाती एक संवैधानिक पद पर विराजमान ऐसी विभूति का ऐसा आचरण घोर निंदनीय है.

इन सबके ऊपर नरेंद्र मोदी क्या सोच रहे होंगे? सीधी सी बात है. नरेंद्र मोदी का विज़न भारत को फिर से अग्रणी देश बनाने का है. इस बीच शाह ने तो अगले कार्यकाल के भी खाका तैयार कर लिया है. 50 साल राज करने वाली बात तो संगठन स्तर पर अब सत्य होती नजर आ रही है. मंत्रीमण्डल में जे.पी. नड्डा को स्थान नहीं मिला है. ऐसा बताया जा रहा है कि वो भाजपा अध्यक्ष के पद पर जाने वाले हैं. लेकिन क्या कार्यकर्ताओं के बीच अमित शाह जैसी स्वीकार्यता नड्डा को मिलेगी, यह देखने वाली बात होगी. शाह ने अपना स्तर भाजपा अध्यक्ष के रूप में इतना ऊंचा कर लिया है कि अब उनका कोई विकल्प वास्तविक रूप से नज़र नहीं आता. लेकिन फिर भी यह अमित शाह का चुनाव है. यही उन्होने नड्डा को सबसे उपयुक्त माना, तो इसका मतलब यह है कि उनके विज़न को वही आगे ले जाएंगे.

दूसरी तरफ सीमा पर भी अब भारत के दुश्मन अवश्य सतर्क रहेंगे. भाजपा का पाकिस्तान जैसे विषय पर एग्रेसिव अप्रोच किसी से छिपा नहीं है. ऊपर से राष्ट्रवाद को अपना हथियार बनाये हुए व्यक्ति के पास जब गृह मंत्रालय आ जाये तो यह स्पष्ट हो जाता है कि आने वाले समय में पाकिस्तान को काफी तनाव का सामना करना पड़ सकता है. वैसे भी वह एक नरेंद्र मोदी से ही परेशान थे, अब तो दूसरा भी आ गया है.

लेकिन इन सभी बातों के बीच देश का विपक्ष नीर-क्षीण अवस्था में पड़ा है. एक हफ्ते बाद भी वह अपनी हार को नहीं पचा पा रहा. समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने टीवी डिबेट्स में अपने प्रवक्ता ही भेजने बंद कर दिए हैं. एक हारे हुए मन से आप जीत की आग नहीं जला सकते. लेकिन जो भी है, यही है. लोकतंत्र विपक्ष की ऐसी दयनीय स्थिति को देखकर चिंतित अवश्य होगा, लेकिन अपनी इस अवस्था का कारण विपक्ष स्वयं है. मोदी के सामने वो कोई दूसरी धुरी नहीं दिखाई दे रही है तो भाजपा विरोधी विचारधारा को एकसाथ बनाये रखे. यही बड़ी विडंबना है.

1 Comment

  1. Avatar
    October 13, 2019 - 1:25 am

    Pediatric Doses Of Amoxicillin Propecia Customer Service Baclofene Les Risques tadalafil cialis from india Cialis Informacion Le Prix Du Viagra Pharmacie Is Amoxillin In Penicillin Family

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *