सच में हो सकते हैं EVM हैक? जानें EVM की कार्य प्रणाली

पिछले पाँच वर्षों से हर चुनाव के बाद हम यही सुनते हैं कि भाजपा ने EVM हैक कर लिए. इस बार भी विपक्ष एग्ज़िट पोल के नतीजे देख अभी से यह दलीलें मीडिया को दे रही है. कांग्रेस के नेता कह रहे हैं कि भाजपा ने पिछले चुनावों में जानबूझ कर कांग्रेस को जिताया ताकि EVM हैकिंग की बात को नकारा जा सके. 

पर क्या EVM सच में हैक किया जा सकता है? अगर आप आम आदमी पार्टी के सौरभ भारद्वाज द्वारा इस्तेमाल किए गए खिलौने वाले EVM हैक करने के प्रदर्शन पर एक प्रतिशत भी विश्वास करते हैं तो आपके लिए यह जानना ज़रूरी है कि EVM आख़िर काम कैसे करता है. 

हर बूथ का अलग EVM होता है जिस पर एक अनूठा क्रमांक सूची होता है. यह क्रमांक सूची केवल उम्मीदवारों को दी जाती है. मतदान से पहले सभी पार्टियों के प्रतिनिधियों के सामने एक मॉक पोल किया जाता है, जिसमें बूथ स्तर के अधिकारी EVM की जाँच करते हैं. जब EVM की जाँच पूरी हो जाती है, तब इस मॉक पोल में आए नतीजों को शून्य करके फिर से शुरू किया जाता है. 

चुनाव होने के बाद EVM को सीलबंद कर स्ट्रॉंग रूम में कड़ी सुरक्षा में रखा जाता है. वोट काउंटिंग के समय ही इन मशीनों को स्ट्रॉंग रूम से बाहर लाया जाता है. अब जिस क्रमांक सूची की बात हमने पहले वाक्य में की थी उनकी सबसे बड़ी भूमिका होती है क्योंकि इस संख्या क्रमांक से EVM से जुड़े पोलिंग बूथ की पहचान की जाती है. मशीनों की सील सभी पार्टियों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में खोली जाती है.

EVM काउंटिंग के नतीजों का सत्यापन करने का तरीक़ा : किन्हीं पाँच बूथों का चयन कर VVPAT, ( वोटर वेरिफ़ायड पेपर ऑडिट ट्रेल) वोट डालने के बाद निकलने वाला पर्चे की मदद से मतों की गिनती होती है, जिसे EVM की गणना से मिलाया जाता है.

हैक करना क्यों है मुश्किल/ हैक करने पर भी किसी एक पार्टी को जिताना असम्भव

भारतीय EVM में बेहद स्तरीय तकनीक का इस्तेमाल होता है. यह ROM में गढ़े हुए एक स्थायी प्रोग्राम पर चलता है. इसे बदला या हैक नहीं किया जा सकता. ये एक कैलकुलेटर के समान होते हैं. अगर आप कैलकुलेटर को हैक कर सकते हैं यानी कि बलूटूथ या WIFI के ज़रिए कैलकुलेटर में 1 में 1 जोड़ने पर जवाब 3 या 5 या मनचाहा जवाब ला सकते हैं, तब तक EVM हैक की थ्योरी किसी भी हाल में गम्भीरता से नहीं ली जा सकती. 

EVM बूथ के बाहर के किसी भी और यंत्र से LAN या किसी और वायरलेस तकनीक से नहीं जुड़ा होता. इसलिए इसे हैक करने का कोई तरीक़ा नहीं है. अब मान लेते हैं कि आप सच में हर एक EVM के ROM में बदलाव कर उसे हैक कर लेते हैं जिससे एक विजेता का नाम निकलता है. पर इस स्थिति में दिक्कत यह आती है कि लिस्ट का नम्बर हर पार्टी के लिए अलग होता है. ज़रूरी नहीं है कि एक मशीन में अगर भाजपा का नाम सबसे ऊपर हो तो दूसरे में भी सबसे ऊपर होगा. हर मशीन में नाम आगे पीछे किए जाते हैं. तो इस स्थिति में आप अन्य पार्टियों को भी जितवा देंगे. 

हर EVM में 16 उम्मीदवारों के नाम लिखे जा सकते हैं, आप एक बार में केवल 4 मशीनें समानांतर रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं. मतलब आप ज़्यादा से ज़्यादा 64 (16*4) उम्मीदवार ही खड़े कर सकते हैं. तो विपक्ष को करना यह होगा कि 64 से ज़्यादा उम्मीदवार खड़ा करे ताकि मजबूरन चुनावों में बैलट पेपर का इस्तेमाल किया जाए. हर बूथ का ऑफ़िसर EVM चेक करता है, इसे बदला भी जाता है क्योंकि लाने ले जाने में EVM ख़राब हो सकते हैं. 

EVM की कार्य प्रणाली समझने के बाद यह साफ़ नज़र आता है कि EVM हैक करने की बात सरासर बेबुनियाद है. चुनाव आयोग पहले भी देश की जनता और सभी राजनीतिक पार्टियों को चुनौती दे चुका है कि वे आकर EVM हैक कर के दिखाएँ, पर किसी ने भी यह चुनौती स्वीकार नहीं की थी.

अगर EVM सच में हैक हो सकती है तो कांग्रेस ने 2014 के चुनावों में ऐसा करके जीत क्यों नहीं हासिल की? भोली भाली जनता को बहलाने के लिए ऐसी अफ़वाहें फैला कर विपक्ष ना केवल जनता के मत का अपमान कर रहा है, बल्कि उन लाखों अधिकारियों,कार्यकर्ताओं और जवानों का अपमान कर रहा है जो दिन रात इस गणतंत्र के उत्सव को संपन्न करने में योगदान देते हैं. 

Tags:
Rashmi Singh
Writer by fluke, started with faking news continuing the journey with Lopak.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *