ट्विटर पर झूठ फैलाती पकड़ी गईं इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्टर

फ़ेक न्यूज़ एक ऐसा शब्द है जो शायद असल ख़बर से ज़्यादा चल रहा है. टीवी रिपोर्टर्स, पत्रकार हर कोई कहने को तो इससे परेशान है पर वक़्त आने पर ख़ुद ऐसी फ़ेक न्यूज़ फैलाने से बाज़ नहीं आते. और अगर आप उन्हें उनके द्वारा चलाई गई फ़ेक न्यूज़ पर ऊँगली उठा दें तो आप या तो ट्रोल हैं या तो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता छीनने वाले.

आज इकोनॉमिक टाइम्स की पत्रकार ने नरेंद्र मोदी की रैली के बारे में ट्वीट किया. ट्वीट करने के कुछ सेकंड बाद ही लोगों ने यह बात पकड़ ली कि वीडीयो तो सही है पर इस वीडियो के बारे में जो कहा जा रहा है वो ग़लत है. मधुपर्णा दास नामक पत्रकार ने यह ट्वीट किया कि पुरलिया की रैली में लोग परेशान होकर कुर्सियाँ फेंक रहे हैं.

हालाँकि वीडियो देखने से साफ़ पता चल रहा है कि वीडियो में लोग कुर्सी फेंक नहीं रहे बल्कि जगह बनाने के लिए कुर्सियाँ एक दूसरे को पकड़ा रहे हैं. सोचने वाली बात यह है कि जब कुछ चंद सेकंड की वीडियो देखने वालों को भी यह समझ आ गया कि कुर्सियाँ फेंकी नहीं बल्कि पकड़ाई जा रही हैं. तो फिर रैली में मौजूद रिपोर्टर को यह बात क्यूँ नहीं दिखाई दे रही.

इस तरह की पत्रकारिता से साफ़ झलकता है कि आप मोदी विरोध में इतने ज़्यादा रम गए हैं कि आप सफ़ेद झूठ बोलने को भी तैयार हैं. और अचरज की बात तो यह है कि आप झूठ बोल भी ऐसी चीज़ के बारे में रहे हैं जहाँ पे किसी को भी आपका झूठ पकड़ने में वक़्त नहीं लगेगा.

हालाँकि किसी के पूछने पर मधुपरणा ने लिखा कि काफ़ी भीड़ होने के चलते लोगों ने कुर्सियाँ एक दूसरे को पास की और अंत में लोगों ने उसे मीडिया वाले एरिया की तरफ़ फेंक दिया.

भीड़ में लोगों ने कुर्सियाँ जल्दी हटाने के चक्कर में हो सकता है रेलिंग के बाहर फेंक दी हो. पर मधुपरणा ने पहले यह लिखा था कि लोग ग़ुस्से में कुर्सियाँ फेंक रहे हैं. जिस तरह से मधुपरणा ने पहला ट्वीट किया उससे तो साफ़ ज़ाहिर है कि वो झूठी ख़बर फैलाने के इरादे से ही किया गया था.

ग़ुस्से में कुर्सियाँ फेंकना और जगह बनाने के लिए कुर्सियाँ बाहर करना एक समान कैसे हो गया. ऐसी भीड़ भाड़ वाली जगह में थोड़ी भी ऊँच नीच होने से भगदड़ का माहौल भी बन सकता है.

यह सब जानते हुए एक विख्यात अख़बार की पत्रकार द्वारा इस तरह का ट्वीट करना काफ़ी ग़ैर ज़िम्मेदाराना हो सकता है. 2017 में मुंबई के लोकल स्टेशन पर ”फूल गिर गया” को लोगों ने ”पुल गिर गया” सुन लिया था जिसके चलते भगदड़ मच गई थी और कई लोगों की जान चली गई थी.


Rashmi Singh
Writer by fluke, started with faking news continuing the journey with Lopak.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *