एडिटर्स गिल्ड का खानापूर्ति करता पत्र, बंगाल में हुई पत्रकारों के ख़िलाफ़ हिंसा में ममता दीदी से नहीं कोई सवाल

कुछ ही दिन पहले एडिटर्स गिल्ड के चीफ़ शेखर गुप्ता ने ममता बैनर्जी के बारे में लिखा था कि ममता ही मोदी शाह की ज़हरीली राजनीति का एक मात्र जवाब हैं. वो जानती हैं कि कैसे आग को आग काटती है.

मोदी शाह हिंदू मुस्लिम का मुद्दा उठाकर बंगाल की सड़कों पर राजनीति कर चुनाव जीतना चाहते हैं पर ममता बनर्जी भी इस को एक स्ट्रीट फ़ाईटर की तरह चुनौती देने के लिए खड़ी हैं.

आज एडिटर्स गिल्ड ने मतदान के पांचवें चरण में पश्चिम बंगाल में पत्रकारों पर हमले की कई घटनाओं की निंदा करते हुए एक पत्र जारी किया है. उन्होंने चुनाव आयोग से इन घटनाओं में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है.

समाचार एजेंसी भाषा के अनुसार, गिल्ड ने एक बयान में कहा कि पत्रकारों पर हमले की घटना निंदनीय है. खासकर, चुनाव के दौरान इस तरह की घटनाएं मीडिया की आजादी को बाधित करने का प्रयास है.

बंगाल में हाल ही में न्यूज एक्स, एबीपी आनंदा और जी न्यूज सहित विभिन्न मीडिया संगठनों से जुड़े पत्रकारों पर कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने हमले किए. अब दिलचस्प बात यह है कि शेखर गुप्ता इसी एडिटर्स गिल्ड के चीफ़ हैं, पर इस पत्र में कहीं भी ममता बैनर्जी का ज़िक्र नहीं है. शायद शेकर जी इसी आग की बात कर रहे थे जिसमें उनके ही पत्रकार चुनाव के समय रिपोर्टिंग करते समय झुलस रहे हैं.

शर्म की बात है कि मीडिया जो प्रेस फ़्रीडम न होने के लिए मोदी को दोष देती है, जो लिबरल समाज आए दिन मोदी द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता ख़त्म करने की बात करता है उसे बंगाल में यह आज़ादी क्यूँ नहीं. आज़ादी नहीं होने पर भी ना तो वो कभी ममता बैनर्जी के ख़िलाफ़ कुछ बोलते हैं और बोलना चाहे भी ममता बैनर्जी इस बात का ध्यान रखती हैं कि वह बात बाहर ना आए.

पहले भी कई बार ममता बनर्जी लोगों की आवाज़ दबाने का प्रयास कर चुकी हैं. कुछ ही दिन पहले जय श्री राम बोलने पर ममता बनर्जी द्वारा लोगों को जेल में डाल दिया गया था

2012 में एक प्रोफ़ेसर को ममता बैनर्जी के ख़िलाफ़ एक कार्टून शेयर करने पर जेल हो गई थी.

2017 में पद्मावती कंट्रोवरसी के दौरान एक अख़बार में एक कार्टून छापा था, कार्टून बंगाल और उसकी चीफ़ मिनिस्टर ममता बैनेर्जी पर चुटकी ले रहा था पर हैरत की बात यह है कि इसी अख़बार के कोलकाता अंक में यह कार्टून नहीं छापा गया.

आप इसी से से समझ सकते हैं कि फ़्रीडम ऑफ़ स्पीच चिल्लाने वाले ख़ुद ममता दीदी से इतने डरे बैठे हैं कि ममता बैनर्जी के बारे में एक कार्टून तक छापने से डरते हैं.

6 Comments

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    September 30, 2019 - 12:00 pm

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