महाभारत का अनसुना प्रसंग – लज्जित युवराज

केशव हस्तिनापुर से “याचना नहीं अब रण होगा” बोलकर जा चुके हैं. युद्ध होना अब निश्चित है. कौरव और पांडव अपने-अपने गठबंधन करने में लगे हुए हैं. युवराज दुर्योधन श्रीकृष्ण से समर्थन लेने द्वारिका पहुँच गए हैं.

परंतु यह क्या? द्वारिका पत्रकार महासभा के पत्रकारों ने युवराज के सचिव से कहा कि श्रीकृष्ण से मिलने से पहले युवराज को पत्रकारों के प्रश्नों का उतर देना ही होगा.

प्रेस कॉन्फ़्रेन्स का आयोजन हुआ, प्रश्न पूछे जाने लगे.

प्रश्न: “जब केशव शांति प्रस्ताव लेकर हस्तिनापुर गए तब आपने उन्हें बंदी बनाने का प्रयास किया. आप अपने इस कृत्य पर लज्जित हैं?”

उत्तर: “देखिए मैं प्रेम में विश्वास रखता हूँ. इस संसार में पांडव और केशव मेरे सबसे प्रिय हैं. मैं इस संसार पर प्रेम से विजय पाना चाहता हूँ”

प्रश्न: “आपने अपने अनुज दुशासन को आज्ञा देकर द्रौपदी का चीरहरण करवाने का प्रयास किया. क्या आप अपने इस कर्म पर दुःख प्रकट करेंगे?”

उत्तर: “मैंने बाल्यकाल से ही अपनी माताश्री को नेत्रों पर पट्टी बाँधें देखता आया हूँ. मैं महिलाओं का आदर करता हूँ. मैं इस संसार को आदर से भर देना चाहता हूँ”

प्रश्न: “क्या यह सत्य नहीं कि पांडवों को लाक्षागृह अग्निकांड में जला देने का षड्यंत्र आपने रचा था और आपके संबंध पुरोचन से थे?”

उत्तर: “पुरोचन को अपने इस कृत्य के लिए लज्जित होना चाहिए परंतु अब वह रहा नहीं इसलिए हम देखेंगे कि उसकी जगह कौन लज्जित हो सकता है. मैं काकाश्री विदुर से कहूँगा कि वे लज्जित हो लें. ऐसे में आपको मेरे हस्तिनापुर लौटने तक प्रतीक्षा करनी होगी”

हठात् प्रेस कॉन्फ़्रेन्स की जगह शोर होने लगा. एक पत्रकार बोला; “इतने सरल प्रश्न पूछकर द्वारका के पत्रकार जानबूझकर युवराज को बचने का अवसर प्रदान कर रहे हैं. पत्रकारिता के लिए आज काला दिन है. इतिहास कभी हमें क्षमा नहीं करेगा. युवराज दुर्योधन से कठिन प्रश्न पूछे जाने चाहिए. आज आवश्यकता है पत्रकारिता की रक्षा करने………”

इस पत्रकार ने बहुत देर तक बड़ा ओजस्वी भाषण दिया. सारे पत्रकार उससे प्रभावित थे. अंत में यह निर्णय लिया गया कि पत्रकारिता की रक्षा के हेतु अब यही पत्रकार युवराज से प्रश्न करेगा.

सब की दृष्टि अब उस पत्रकार पर थी. सभी यह देखना चाहते थे कि पत्रकारश्री क्या प्रश्न पूछते हैं. युवराज भी प्रतीक्षारत थे.

पत्रकार ने छूटते ही प्रश्न किया; “द्वारका में आपका हार्दिक स्वागत है युवराज. आपसे मेरा प्रश्न यह है कि आपने आज सुबह जलपान में ढोकला और फ़ाफड़ा खाया? और मेरा दूसरा महत्वपूर्ण प्रश्न यह है युवराज कि आपको गुड़ की जलेबी अच्छी लगती है या चीनी की?

Shiv Kumar Mishra
Senior Reporter Lopak.in @shivkmishr

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