चुनाव में हुई बीजेपी समर्थकों के ख़िलाफ़ हिंसा, ज़बरदस्ती दिलवाया गया कांग्रेस को वोट

चुनाव के समय हिंसा होना तो आम बात हो गई है, लोकतंत्र के इस उत्सव में जहाँ एक तरफ़ लोगों को अपनी मर्ज़ी से वोट डालने की आज़ादी होती हैं वहीं कई बार कुछ पार्टियाँ ऐसी हरकतों पर उतारू हो जाती हैं जहाँ यह समझ नहीं आता कि आख़िर इसमें मर्ज़ी वोटर की है या दबंगई करने वालों की.

झारखंड में एक मुस्लिम महिला की केवल इसलिए पिटाई कर दी गई क्योंकि उसने भाजपा को वोट दिया. इसके पहले भी बंगाल में एक मुस्लिम महिला के मुँह में इसलिए ऐसिड डाल दिया गया था क्योंकि टीएमसी को वोट नहीं दिया था.

झारखंड के चान्हो संसदीय क्षेत्र में सहाना नामक महिला ने ने 29 अप्रैल को हुए चुनाव में भाजपा को वोट दिया जो कि उसके घरवालों की इच्छा के विरुद्ध था. परिजनों को जैसे ही जानकारी मिली कि उसने उनकी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ वोट दिया, वे आग बबूला हो गए. बात इतनी आगे बढ़ी कि शनिवार की शाम पति व गांव के एक अन्य युवक ने उसकी पिटाई कर दी. सहाना को तरह तरह के ताने सुनाए गाए और कहा कि वह मुस्लिम समाज में रहने लायक़ नहीं है.

शाम सात बजे एक लड़के और सहाना के पति कुदुस ने लाठी-ठंडे से उसे पीटा जिसके बाद वह डर के मारे अपने बच्चों को लेकर मायके चली गई. रविवार को किसी तरह थाने पहुंची और शिकायत दर्ज कराई.

वहीं आज़मगढ़ में एक युवक की समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं ने इसलिए पिटाई कर दी गई क्योंकि उसने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ नारा नहीं लगाया और साथ ही उसने भगवा अँगोछा डाला हुआ था. युवक को इतना पीटा गया कि गंभीर रूप से घायल हो गया. स्थानीय लोगों की मदद से उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

इस युवक का नाम उत्कर्ष पाठक है जो कि हिंदू युवा वाहिनी का सक्रिय कार्यकर्ता है. शाम को वह गंगटिया चौराहे के पास आधा दर्जन सपाई उसे रोक लिए और भगवा गमछा देख पूछे बीजेपी का प्रचार कर रहे हो जब उसने हां कहा तो उक्त लोगों ने गाली देते हुए कहा कि मोदी और योगी को गाली दो. युवक ने विरोध किया तो उसकी पिटाई शुरू कर दी.

अमेठी में एक वृद्ध महिला का आरोप है कि जब वो वोट देने गई तो वहाँ खड़े एक व्यक्ति ने उनका हाथ लेकर ज़बरदस्ती पंजे का बटन दबवा दिया. राहुल गांधी के गढ़ में पहली बार चुनौती दिए जाने के चलते शायद कांग्रेस ऐसे हथकंडो का सहारा ले रही है. अमेठी लोकसभा के गौरीगंज के गूजरटोला बूथ नंबर 316 के पीठासीन अधिकारी पर यह आरोप लगा है. महिला भाजपा को वोट देना चाहती थी. इसके पहले बंगाल से एक वीडियो वाईरल हुआ था जहाँ बूथ के पास खड़ा एक व्यक्ति हाथ पकड़कर वोट डलवा रहा था.

इन सभी घटनाओं से एक बात तो साफ़ है कि विपक्ष साम दाम दंड भेद और मौलिक अधिकारों का हनन कर भाजपा को हराने की तैयारी में है. ऐसे में यह भी ख़याल आता है कि अब तक हुए चुनावों में किस तरह से वोटिंग की जाती रही होगी. सोशल मीडिया के चलते तुरंत ही इन घटनाओं के वीडियो बाहर आ जाते हैं पर जब सोशल मीडिया नहीं तब यह घटनाएँ दब जाती रही होंगी.

अशिष्णुता के माहौल में बीजेपी या हिंदुओं की तरफ़ थोड़ा भी समर्थन विपक्षी पार्टियों को बर्दाश्त नहीं. यह समझना कठिन नहीं कि असहिष्णु असल में है कौन. हो सकता है ईवीएम मशीनों के चलते इस तरह की घटनाओं को अंजाम देने में दिक्कत आ रही हो जिसके चलते विपक्ष की पार्टियाँ आए दिन बैलट पेपर की वापसी की माँग करती हैं.

Rashmi Singh
Writer by fluke, started with faking news continuing the journey with Lopak.

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