आम आदमी पार्टी द्वारा दिखाए गए पर्चे पर मीडिया से कुछ सवाल

आम आदमी पार्टी के सदस्यों ने एक प्रेस कॉनफेरेन्स कर भाजपा के पूर्वी दिल्ली के उम्मीदवार गौतम गंभीर पर एक गंभीर आरोप लगाया. एक पर्चा जिसमे पूर्वी दिल्ली की आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार आतिशी मर्लेना, अरविन्द केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के बारे में काफी आपत्तिजनक बातें लिखी गई थी.

पर इस घटनाक्रम में मीडिया की तरफ से आम आदमी पार्टी के लिए कोई सवाल नहीं थे. वही मीडिया जो एक छोटे ट्रोल द्वारा ट्वीट किये जाने पर भी प्रधानमंत्री से सवाल पूछती है. पर्चे के बारे में काफी लोगों का कहना था कि परचा खुद आम आदमी पार्टी के ही लोग बाँट रहे थे. आइये इन सवालों पर नज़र डालते हैं.

पर्चा ईस्ट दिल्ली के किस एरिया के अखबारों में बंटा? उस एरिया का नाम क्या हैं?

आम आदमी पार्टी के लोग केवल पूर्वी दिल्ली में पर्चे बांटे गए यही कह रहे थे. पर पूर्वी दिल्ली कोई कालोनी नहीं है, पूर्वी दिल्ली अपने आप में बड़ा इलाका है पर इसमें कहाँ पर्चे बांटे गए यह किसी को नहीं पता.

वहां के लोगों से पूछताछ की कि क्या उनके घरों में कोई ऐसा पर्चा आया क्या? एक भी ऐसा परिवार क्यों सामने नहीं आया जिसके घर मे ऐसा कोई पर्चा आया हो?

एक और सवाल यह है की अगर इस तरह के पर्चे बांटे जा रहे थे तो पूर्वी दिल्ली के लोगों ने तो देखा ही होगा? क्या इतने बड़े इलाके में मीडिया एक भी इंसान से नहीं पूछ पाई कि क्या उनको ऐसा पर्चा बांटा गया या नहीं? और बांटा गया तो किसने बांटा.

ईस्ट दिल्ली में बहुत से पत्रकार रहते हैं.हर किसी के घर मे दो – तीन अखबार जरूर आते हैं. क्या किसी एक भी पत्रकार के घर ऐसा कोई पर्चा आया क्या?

खुद पत्रकारों के घरों में भी ऐसा कोई पर्चा नहीं आया, न उनके घर में न आस पड़ोस में किसी के पास.

पर्चा अगर सुबह सुबह ही बंट गया तो सोशल मीडिया के इस जमाने मे दोपहर 2 बजे तक भी AAP की प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले एक भी व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर ये पर्चा क्यों नहीं शेयर किया ?

आज के समय में जहाँ कोई इंसान मौत से भी जूझ रहा हो तो लोग अपना फ़ोन लेकर तुरंत उसका वीडियो डाल देते हैं वहां प्रेस कॉनफरेन्स के पहले किसी भी व्यक्ति जिसको यह पर्चा मिला उसने इसे सोशल मीडिया पर शेयर क्यों नहीं किया? या आदमी पार्टी के लोगों ने आम जनता से कहा कि हमें कांफ्रेंस करनी है, बड़ा खुलासा करना है तो आप लोग इस घटिया पर्चे के बारे में तब तक बात न करें जब तक हम इसे मीडिया से बात नहीं कर लेते।

मीडिया में पर्चा कहाँ से आया ? – AAP से
सोशल मीडिया में पर्चा कहाँ से आया? – AAP से
पर्चे पर सबसे पहले चर्चा किसने शुरू की? – AAP ने
क्या ये मात्र एक संयोग हैं?

मीडिया या सोशल मीडिया में कहीं पर भी परचा किसी बीजेपी वाले ने साझा नहीं किया. पर्चे बांटने वाले भी चश्मदीदों द्वारा आम आदमी पार्टी के लोग ही बताए गए फिर इसका इलज़ाम भाजपा पर कैसे आ रहा है.

पर्चा लिखने का इल्जाम सिर्फ गौतम गंभीर पर क्यों लगाया? अरविंदर लवली भी तो चुनाव लड़ रहे हैं.

यह बड़ा सवाल है कि पर्चा बाँटने का आरोप सीधे गंभीर पर कैसे लगाया गया? उस पर्चे पर किसी भी प्रकार का कोई ऐसा सबूत या तथ्य नहीं है जिससे ये बात सामने आए कि यह बीजेपी द्वारा लिखा या बनाया गया है. पूर्वी दिल्ली के किसी भी अन्य उम्मीदवार पर न आम आदमी पार्टी का शक गया न ही इलज़ाम लगाया गया.

क्या AAP ने कोई एक भी प्राथमिक जांच, कोई एक भी तथ्य, कोई एक भी सबूत जो गौतम गंभीर की तरफ ईशारा करें वो पेश किया।फिर भी मीडिया ने सवाल नहीं उठाया.

आम आदमी पार्टी द्वारा किसी भी तरह का कोई सबूत नहीं दिया जिसमे कहीं से भी यह साबित हो कि पर्चे का भाजपा या गौतम गंभीर से कोई लेना देना है. कोई cctv फुटेज, कोई फोटो, कोई मेसेज किसी भी तरह का कोई सबूत या गवाह पेश नहीं किया. बस हवा में से एक पर्चा मीडिया के सामने लाया गया और गौतम गंभीर पर इलज़ाम लगा दिया गया.

AAP ने पुलिस में शिकायत दर्ज क्यों नहीं करवाई?

एक आम व्यक्ति के खिलाफ भी अगर इस तरह का पर्चा बाहर आएगा तो सबसे पहले इंसान पुलिस में जाकर कम्प्लेन करवाता है.पर आम आदमी पार्टी द्वारा ऐसी कोई कार्यवाही नहीं की गई. उन्हें बस मिडिया ट्रायल चाहिए था. अगर पार्टी को आतिशी को सच में इंसाफ दिलाना था तो वो सबसे पहले पुलिस के पास जाते पर उन्होंने मीडिया से बातचीत करना बेहतर समझा.

एक महिला पर हमला हुआ, पुलिस शिकायत या जांच की जगह सीधा चुनाव और वोट से जोड़ कर बात शुरू करना क्या दिखाता हैं?

चुनावी समय चल रहा है पर ज़रूरी नहीं है कि हर घटना का सम्बन्ध चुनाव से ही हो. पर्चा बांटा गया तो क्या यह ज़रूरी है कि चुनाव क मद्देनज़र ही बांटा गया हो? किसी की निजी दुश्मनी भी तो हो सकती है?

आतिशी के बारे में गंदी गंदी बातें लिखा हुआ पर्चा आतिशी से ही क्यों पढ़वाया गया?

यह कारनामा केवल आम आदमी पार्टी ही कर सकती है कि एक महिला के बारे में एक पर घटिया बातें लिखी हो और मीडिया में तमाशा करने के लिए उसे उसी महिला से पढ़वाया जाए. बेशर्मी की भी एक सीमा होती है.

अपनी ही कैंडिडेट के बारे में इतनी गंदी और भद्दी बातें लिखा हुआ पर्चा हर AAP के नेता ने सोशल मीडिया पर शेयर किया , व्हाट्सप्प के द्वारा घर घर तक केवल AAP के वालंटियर्स के द्वारा भेजा गया. इस पर्चे का सबसे ज्यादा प्रचार और प्रसार AAP ने ही किया, क्यों?

इस पर्चे को केवल और केवल खुद आम आदमी पार्टी के लोगो ने ही सोशल मीडिया और पूर्वी दिल्ली की सड़को पे बांटा। किसी भी भाजपा नेता या भाजपा समर्थक ने इसे नहीं बांटा फिर भाजपा पर इसका इलज़ाम लग रहा है. अगर किसी चौराहे पर इसे भाजपा के लोगों ने बटवाया तो किसी भी व्यक्ति ने इसका फोटो या वीडियो क्यों नहीं लिया?

यह सभी सवाल कि जो आम आदमी पार्टी के नेता कपिल मिश्रा जी ने ट्विटर पर पूछे

जबकि यह सवाल मीडिया द्वारा आम आदमी पार्टी से किया जाना चाहिए था? मीडिया की यह चुप्पी कहीं ना कहीं और बड़े सवाल खड़े करती है. मीडिया का काम है सवाल करना पर एक प्रेस कोनफ़रेंस में किसी भी पत्रकार द्वारा कोई भी सवाल नहीं किया जाता, यह थोड़ा अजीब है.

ना ही बाद में सोशल मीडिया पर पत्रकारों द्वारा कोई सवाल किया जाता है. आम आदमी पार्टी से कहीं ज़्यादा मीडिया की चुप्पी और इतने बड़े बिंदुओं पर सवाल ना पूछना शक की सूई मीडिया पर भी ले जाता है.

Rashmi Singh
Writer by fluke, started with faking news continuing the journey with Lopak.

1 Comment

  1. Avatar
    Kishore
    May 12, 2019 - 11:01 am

    She should be immediately released.its a disgrace for mamta to arrest young people and punish them.we should start a campaign to help the release of this girl

    Reply

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