एग्जिट पोल्स में ख़ामियाँ: नीलसन ने भाजपा के नहीं गिने वोट्स, News X ने लिया मोबाइल ऐप का सहारा

चुनावी मौसम में हर व्यक्ति यह क़यास लगाने में जुटा हुआ है कि आख़िर जीतेगा कौन. आएगा तो मोदी ही या अब होगा न्याय. चुनाव के आख़री चरण के बाद मीडिया ने अपने एग्ज़िट पोल के नतीजे जारी किए. जहाँ सभी एग्ज़िट पोल्स ने भाजपा को बहुमत दिया वहीं दो एग्ज़िट पोल्स ऐसे थे जिनमें साफ़ गड़बड़ थी.

ABP नीलसन ने भाजपा को केवल 267 सीटें दी. विपक्ष के कई लोग ABP -नीलसन के इस आँकड़े पर भरोसा कर भाजपा की हार का ऐलान करने लगे. हालाँकि गड़बड़ क्यों हुई या यूँ कहें कि गड़बड़ी की गुत्थी ख़ुद नीलसन के डाइरेक्टर उमेश झा ने ही सुलझा दी.

ABP न्यूज़ पे बात करते वक़्त झा ने कहा कि उन्होंने आँकडें यह मान के इकट्ठा किए कि अगर लोग यह कह रहे हैं कि उन्होंने भाजपा को वोट दिया तो हो सकता है वो झूठ बोल रहे हों. उन्होंने आगे यह भी कहा कि लोग डर के मारे झूठ बोल सकते हैं इसलिए हमने पिछले चुनाव में दिए गये वोट के आधार पे गिनती की.

उमेश झा ने कहा ”हमने देखा की भाजपा के लिए काफ़ी ओवरक्लेम हो रहा था तो हमने जो कैलिब्रेट किया उस हिसाब से हमें 277 मिले हैं.” इस पर जब पत्रकार ने उनसे इसे आसान भाषा में समझाने के लिए कहा तब उन्होंने बड़ा ही बेटतूका जवाब दिया. उन्होंने कहा ”ओवेरकलेम से मतलब अगर हम किसी से पूछे की किस पार्टी को वोट दिया तो ज़रूरत से ज़्यादा लोग भाजपा बोलेंगे पर ज़रूरी नहीं है कि वोट दिया हो.

हम दो सवाल पूछते हैं पहला आपने किसको वोट दिया और दूसरा पिछले चुनाव में किस वोट दिया. हो सकता इस बार वाला जो जवाब है फ़ीयर फ़ैक्टर या किसी वजह से सही ना हो. लेकिन पिछले चुनाव का जो जवाब होगा वो ज़्यादा सही होता है क्योंकि उस के बारे में किसी को घबराने की ज़रूरत नहीं है.”

इस पर साथ ही बैठे एक विश्लेषक ने जब पूछा कि इस बात की क्या गारंटी है कि पिछले चुनाव का जवाब सही हो, पिछली बार भी तो डर के मारे वोट दिया हो तब? इस पर झा जी ने कहा ”देखिए आज पूछा किस पार्टी को दिया और सामने वाले ने भले ही पार्टी A को वोट नहीं दिया पर उसे लगा हो कि सोचा कि मुझे इनका ही नाम लेना चाहिए. पिछली बार किसको दिया था तो वो कहेंगे पार्टी B और सुनने वाला ख़ुश हो जाएगा कि इस बार वोट कन्वर्ट हो गया. पिछले बार अगर पार्टी A रही हो और इस बार भी पार्टी A रही हो तो ये कंसिसटेंट है. पिछले बार अगर पार्टी A नहीं भी थी तो भी सामने वाला ख़ुश हो जाएगा.”

उमेश झा जी ने कैलिबरेशन समझाने से पहले शायद ये नहीं सोचा होगा कि उनके ही जवाब का कैलिबरेशन गड़बड़ हो जाएगा. आख़िर की पार्टी A और पार्टी B वाली लाइनें तो राहुल गांधी जी के भाषणों से भी ज़्यादा कनफ़्यूज़िंग हैं. उमेश झा जी साफ़ शब्दों में यह कह सकते थे कि हमने एग्ज़िट पोल करना जब शुरू किया तो हम पहले ही सोचकर बैठे थे कि भाजपा के वोट कम कर देंगे. हम यही मान लेंगे कि सामने वाला झूठ बोल रहा है. इस नज़रिए के बारे में सोचा जाए तो झा जी घर बैठकर ही लोगों के मन पढ़कर भी आँकड़ा निकल सकते थे.

बिहार विधानसभा चुनावों में भी नीलसन द्वारा दिया गया आँकड़ा ग़लत निकला था तो हो सकता है कि दूध के जले छाछ फूँकने के चक्कर में उमेश झा जी ने इस बार भाजपा के वोट ही कन्वर्ट कर दिए.

वहीं NewsX ने भाजपा को केवल 202 सीटें दी, NDA को 242. हालाँकि इस पोल में आँकडें एक ”Neta” नामक ऐप पर आधारित थे. ऐप पर 47 लाख लोगों से आँकड़ा लिया गया और ओपिनियन पोल में 2.5 करोड़ लोगों से. एग्ज़िट पोल में दोनो आँकड़ों को मिलकर सम्भावना के आधार पर भाजपा को 202 सीटें दी गयी हैं.

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पर ऐप के आधार पर लिया गया आँकड़ा कितना विश्वसनीय है यह बड़ा प्रश्न है. एक व्यक्ति एक से ज़्यादा मोबाइल से ऐप में किसी भी एक पार्टी के एक से ज़्यादा बार वोट दे सकता है. Opindia के अनुसार ऐप में पिछले 24 घंटों में ही आँकड़ों में बदलाव भी आ गए हैं और NDA की दो सीटें और कम हो गई हैं .

साथ ही जिन लोगों ने वोट दिया वह भी मायने रखता है. ऐप में जिनके पास वोटर ID ना हो या जिन्होंने वोट नहीं दिया हो या किसी एक ही आयु वर्ग के लोग वोट दे रहे हों इस बात की कोई जानकारी नहीं है. एग्ज़िट पोल में केवल नमूने का बड़ा आँकड़ा ही नहीं नमूने की गुणवत्ता भी मायने रखती है. अजीब बात यह भी है कि ऐप केवल 10 लाख लोगों ने डाउनलोड की है पर वोट 47 लाख लोगों ने दिए हैं.

दोनो ही पोल जो भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं दे रहे उनमें साफ़ साफ़ गड़बड़ दिखाई दे रही है. अनुमानों से इस तरह की छेड़खानी जानबूझ कर की गई है या यह सोची समझी साज़िश है यह तो केवल इस पोल को कराने वाले लोग ही बता सकते हैं. पर जहाँ लोग एक ही वोट से हारने या जीतने की कगार पर आ जाते हैं वहाँ इतने बड़े स्तर पर आँकड़ों की जादूगरी करना कितना सही है?

Rashmi Singh
Writer by fluke, started with faking news continuing the journey with Lopak.

11 Comments

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