क्रिकेट विश्ववकप के लिए भारतीय टीम की घोषणा

आगामी 30 से मई से इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड की मेजबानी में होने वाले आईसीसी क्रिकेट विश्व कप के लिए भारतीय क्रिकेट टीम की घोषणा कर दी गई है. क्रिकेट फैंस टीम इंडिया की इस घोषणा के लिए बड़ी बेताबी के साथ चयनकर्ताओं पर नजरें लगाए हुए थे. आखिर नजरें हो भी क्यों ना, चयनकर्ताओं के पिटारे से उन 15 खिलाड़ियों के नाम निकलने जा रहे थे, जिन पर पूरे भारत देश को एक बार फिर आईसीसी क्रिकेट विश्व कप का टाइटल जिताने की उम्मीद है. ज्ञात हो आईसीसी द्वारा सभी टीमों के स्क्वॉड को अंतिम रूप देने की डेडलाइन 23 अप्रैल को रखी गई थी. लेकिन बीसीसीआई विश्व कप टीम मे चुने खिलाड़ियों को मानसिक रूप से तैयार करना चाहती थी. ऐसे में टीम का चयन डेड लाइन से पूर्व ही किया गया है.

हालांकि, मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद व भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली ने पहले ही कहा था कि टीम लगभग निश्चित की जा चुकी है. किस खिलाड़ी को किस नंबर पर खेलना है यह भी लगभग तय है, केवल एक या दो स्पॉट पर जगह शेष है. एमएसके प्रसाद व कप्तान कोहली ने यह भी कहा था कि आईपीएल की परफॉर्मेंस का विश्वकप चयन पर कोई असर नहीं होगा. आइए जानते हैं इस 15 सदस्यी टीम में विभिन्न खिलाड़ियों का चयन किस आधार पर किया गया है.

रोहित शर्माः भारत के विश्व कप जीतने की संभावनाओं पर बात करें तो यह मूल रूप से टॉप आर्डर पर निर्भर करेगा. रोहित शर्मा इसकी मुख्य कड़ी हैं. इंग्लैंड में उनका रिकॉर्ड काफ़ी अच्छा रहा है. यदि रोहित का बल्ला चलता है तो टीम इंडिया की जीत पक्की हो सकती है. रोहित ने अब तक वनडे की 200 परियों में 47 से अधिक के औसत के साथ 8010 रन बनाए हैं. रोहित विश्व के एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं जिनके नाम वनडे में 3 दोहरे शतक बनाने का रिकॉर्ड है. यदि बात पिछले विश्वकप की करें तो वर्ष 2015 में रोहित 330 रनों के साथ भारत की ओर से सर्वाधिक रन बनाने वालों की सूची में दूसरे स्थान पर थे. 2015 के विश्वकप में रोहित द्वारा क्वार्टर फाइनल मुकाबले में बांग्लादेश के विरुद्ध बनाया गया शतक कौन भूल सकता है.

शिखर धवनः बाएं हाथ के बल्लेबाज शिखर धवन ने आखिर आईपीएल में अपनी खोयी फॉर्म हासिल कर ही ली. धवन रोहित के साथ उनकी साझेदारी भारत के लिए उपयोगी होगी. मार्च 2013 में डेव्यू करने वाले धवन ने पहले ही मैच में तेज-तर्रार शतक बना कर सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया था. धवन ने 128 मैचों की 127 पारियों में 93.8 के शानदार स्ट्राइक रेट व 44 से अधिक के औसत से 5355 रन बनाए हैं. ऐसा माना जाता है कि धवन को आईसीसी टूर्नामेंट बहुत रास आते हैं. धवन चैंपियंस ट्राफी व 2015 के विश्वकप में अद्भुत लय में नज़र आए थे. एक ओर जहां चैम्पियन्स ट्राफी के 5 मैचों में 2 शतकों की बदौलत 363 रन बनाए थे, वहीं आस्ट्रेलिया की तेज पिचों में में विश्वकप के दौरान शानदार 412 रन बनाए थे. रोहित व धवन की ओपनर जोड़ी पहले भी कमाल कर चुकी है.

विराट कोहलीः विराट नाम ही काफी है. टीम इंडिया की ‘रन मशीन’ विराट टॉप ऑर्डर के बिखराव को सँभालना बखूबी जानते हैं. उन्होंने कई बार फिनिशर की भूमिका भी अदा की है. ऐसे में कप्तान कोहली का टीम इंडिया के लिए योगदान बेहतर रहने की उम्मीद है. हालिया दिनों में विराट की टीम आरसीबी भले ही अच्छा प्रदर्शन न कर रही हो लेकिन पिछले कुछ मैचों में विराट का बल्ला रन उगल रहा है. कोहली के बल्लेबाजी आंकड़े बताते हैं कि वह ‘विराट’ हैं. कोहली ने एकदिवसीय मैचों की अब तक खेली कुल 219 परियों में करीब 60 के औसत से 10843 से अधिक रन बनाए हैं. वर्ष 2011 के विश्वकप के फाइनल मुकाबले में जबकि ओपनर बल्लेबाजों ने हथियार डाल दिए तब कोहली ने ही गंभीर के साथ मिलकर 83 रनों रन की पारी खेली थी. हालांकि वर्ष 2015 में विराट का बल्ला लगभग खामोश रहा था. लेकिन उसके बाद से लगातार कोहली नए रिकॉर्ड बनाते जा रहे हैं.

केएल राहुलः तकनीक व आंकड़ों के हिसाब से केएल राहुल एक बेहतरीन बल्लेबाज हैं. चयनकर्ताओं ने उन्हें बैक अप ओपनर के रूप में रखा है. आईपीएल में उनकी जबरदस्त फार्म दिखाई पड़ रही है. उन्हें टॉप ऑर्डर पर या नंबर 4 पर भी प्लेइंग इलेवन में खिलाया जा सकता है. 14 एक दिवसीय मुकाबलों की 13 पारियों में राहुल ने 80 से अधिक के स्ट्राइक रेट से 350 के करीब रन बनाए हैं. इनमें एक शतक व 2 अर्ध शतक शामिल है. 

विजय शंकर: 28 वर्षीय विजय शंकर एक अच्छे आलराउंडर के रूप में उभरकर सामने आए हैं. बेशक उनके पास पॉवर हीटिंग नहीं है, लेकिन टाइमिंग के साथ खेलकर वह रन बनाने में कामयाब रहे हैं. अनेक मौकों पर उन्होंने दिखाया है कि वह आक्रामक बल्लेबाजी कर सकते हैं. वह गेंदबाजी में भी बढ़िया प्रदर्शन कर रहे हैं. यही कारण है कि चयनकर्ताओं की नजर उन पर रही होगी. विजय शंकर दूसरे आलराउंडर के रूप में, चौथे नंबर पर बल्लेबाजी कर सकते हैं. हालांकि अनुभव की कमी विजय शंकर में अवश्य होगी, क्योंकि उन्होंने अब तक सिर्फ 9 एक दिवसीय मैच ही खेले हैं.

दिनेश कार्तिकः कार्तिक अच्छे बल्लेबाज और विकेट कीपर हैं. वह मिडिल ऑर्डर को मजबूती दे सकते हैं. तकनीक के साथ-साथ उनके पास आक्रामकता भी है. वह वैकल्पिक विकेटकीपर हो सकते हैं. हालांकि, ऋषभ पंत के नाम को लेकर भी चर्चा जोरों पर थी, लेकिन चयनकर्ताओं ने अनुभव को तरजीह देते हुए कार्तिक का चयन किया है. कार्तिक के बल्ले से निदहास ट्राफी के फाइनल में निकली पारी सभी को याद होगी. कार्तिक ने 77 वनडे मैच में 1738 रन बनाए हैं, इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 73.71 रहा.

केदार जाधव: मध्य क्रम को मजबूती देने के लिए कार्तिक के साथ केदार का चुनाव किया गया है. केदार अच्छे फॉर्म में चल रहे हैं. केदार के सेलेक्शन की सबसे बड़ी वजह उनकी बैटिंग के अतिरिक्त उनकी गेंदबाजी है. केदार का राउंड आर्म एक्शन अक्सर विकेट दिलाने में सहायक होता है. केदार 40 एकदिवसीय मैचों में 1174 रन बना चुके हैं. इसमें 5 अर्ध शतक व दो शतक शामिल हैं. गेंदबाजी की बात करें तो वह अब तक 5.15 की इकॉनमी से 37 विकेट प्राप्त कर चुके हैं.

महेंद्र सिंह धोनी: टीम इंडिया की आन, बान और शान पूर्व कप्तान विकेट कीपर बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी जिन्होंने भारत को दूसरी बार विश्व चैंपियन बनाया था, टीम इंडिया के लिए आज भी सबसे उपयोगी खिलाड़ी हैं. वह विश्व कप में मिडिल ऑर्डर को मजबूती देंगे और अच्छे फिनिशर की भूमिका निभाते हुए नज़र आएंगे. इसके साथ ही वह विकेट के पीछे गेंदबाजों की मदद भी करते रहते हैं. आईपीएल में हुए अब तक के कई मुकाबलों में धोनी ने चेन्नई की डूबती नैया को पार लगाया है. वहीं कप्तानी में भी उनका कोई सानी नहीं है, इसलिए विराट के लिए भी धोनी अहम हो सकते हैं. धोनी ने एकदिवसीय मैचों की 289 परियों में 50 से अधिक के स्ट्राइक रेट के साथ 10500 रन बनाए हैं. धोनी के रनों का ट्रैक रिकॉर्ड छोड़कर यदि खिताबों को देखा जाए तो वह धोनी को और बड़ा बनाते हैं. टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी, एशिया कप, विश्वकप सहित भारत को सभी फॉर्मेट में नंबर वन बनाने वाले कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ही हैं. विश्वकप 2011 के फाइनल में नाबाद 91 रनों की पारी ने पूरी दुनिया को मंत्रमुग्ध कर दिया था.

हार्दिक पांड्याः वर्ष 2016 में डेव्यू करने वाले पांड्या ने बहुत ही कम  समय में टीम इंडिया में अपना स्थान पक्का कर लिया था. अब वह विश्वकप का हिस्सा बनने जा रहे हैं. बेशक आईपीएल की परफॉर्मेंस चयन का आधार न रहा हो, लेकिन टीम प्रबंधन और चयनकर्ता हार्दिक पांड्या के आईपीएल के प्रदर्शन से भी खुश हुए होंगे. हार्दिक ने आईपीएल में जबरदस्त आक्रामकता का परिचय दिया है. आईपीएल से पूर्व भी आस्ट्रेलिया के खिलाफ पांड्या का बल्ला जमकर बोल रहा था. हालांकि पांड्या को अपनी गेंदबाजी में सुधार की जरूरत है. खासतौर पर इंग्लैंड की पिचों के लिए. पांड्या विश्वकप में बतौर आलराउंडर नज़र आएंगे. हार्दिक ने अब तक 45 मैचों की 29 परियों में 116 के जबरदस्त स्ट्राइक से 731 रन बनाए हैं. गेंदबाजी की बात करें तो पांड्या ने 44 मैचों में 44 विकेट प्राप्त किए हैं, वह भी 5.54 की इकॉनमी के साथ. 

जसप्रीत बुमराहः बुमराह विराट कोहली के लिए एक्स फैक्टर हैं. भारतीय टीम के लिए बुमराह सबसे अहम खिलाड़ी हैं. नई गेंद से तो वह उम्दा गेंदबाजी करते ही हैं. साथ ही डेथ ओवरों में उन्हें खेलना काफी मुश्किल होता है. बुमराह ने अब तक खेले 49 मैचों में शानदार प्रदर्शन किया है, इस दौरान उन्होंने 4.51 की इकॉनमी के साथ 85 विकेट झटके हैं. इंग्लैंड की पिच पर गेंदबाजी में बुमराह की भूमिका महत्वपूर्ण होगी.

भुवनेश्वर कुमारः टीम इंडिया के साथ लंबे समय से जुड़े भुवनेश्वर कुमार शानदार गेंदबाज हैं. वह गेंद को स्विंग कराते हैं और यॉर्कर डालते हैं. डेथ ओवरों में भी वह बहुत बढ़िया गेंदबाजी करते हैं. भुवनेश्वर ने अब तक कई मुकाबलों में मैच जिताऊ गेंदबाजी की है. भुवनेश्वर कुमार ने 105 मैचों की 104 पारियों में 5.01 की बेहतरीन इकॉनमी के साथ 118 विकेट लिए हैं. साथ ही भुवनेश्वर पुछल्ले बल्लेबाजों में सबसे शानदार बल्लेबाजी करते हैं. 

मोहम्मद शमीः विराट कोहली ने हमेशा ही मोहम्मद शमी की तारीफ की है. यह तेज गेंदबाज वनडे में बेहद प्रभावशाली होते गए हैं. ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया है. फिलहाल वह आईपीएल में भी लाजवाब गेंदबाजी कर रहे हैं. शमी, भुवनेश्वर कुमार व जसप्रीत बुमराह के साथ मिलकर भारतीय तेज गेंदबाजी में नई धार पैदा कर सकते हैं. आकंड़ों की बात करें तो 62 एकदिवसीय मुकाबलों में 4.58 की शानदार इकॉनमी के साथ 113 विकेट प्राप्त कर चुके हैं. 2015 की विश्वकप में शमी 17 विकेट प्राप्त कर शीर्ष गेंदबाजों की सूची में थे.

कुलदीप यादवः कुलदीप के लिए आईपीएल अच्छा नहीं रहा है. और यह भी सच है कि लिमिटेड ओवरों में उनकी क्षमताओं पर हमेशा से ही संदेह रहा है. लेकिन कोहली उन्हें विकेट लेने वाला गेंदबाज मानते हैं. उनकी रिस्ट गेंदबाजी टीम के लिए खासी फायदेमंद हो सकती है. इंग्लैंड की पिच पर यदि टर्न प्राप्त न हो भी फिर भी कुलदीप ‘चाइनामैन’ गेंदबाजी करके विकेट प्राप्त कर सकते हैं. कुलदीप 42 वनडे मैचों में 87 विकेट प्राप्त कर चुके हैं, वह भी 4.94 की इकॉनमी के साथ. कुलदीप की फ्लाइटेड गेंदबाजी उनकी प्रमुख ताकत है.

युजवेंद्र चहलः चहल आरसीबी के लिए लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. वह साहसी गेंदबाज हैं. विश्व कप में वह भारत के ट्रंप कार्ड होंगे. कुलदीप के साथ उनकी गेंदबाजी और भी शार्प हो सकती है. विश्व कप में इन दोनों गेंदबाजों की परफोर्मेंस पर बहुत कुछ निर्भर करेगा. चहल अभी फॉर्म में चल रहे हैं, उन्होंने 40 पारियों में 72 विकेट प्राप्त किए हैं. चहल में पिच का भरपूर फायदा उठाने की क्षमता है. वह यदि एक बार लाइन व लेंथ को प्राप्त कर लिए तो फिर बल्लेबाज़ों के लिए घातक साबित होते हैं.

रवींद्र जडेजाः तीसरे स्पिनर के रूप में रवींद्र जडेजा को चुना जा गया है. बाएं हाथ के स्पिनर जडेजा के पास वैरिएशन है और वह विकेट लेने में भी सक्षम हैं. साथ ही वह बल्लेबाजी भी कर सकते हैं, साथ ही उनकी शानदार फील्डिंग ने सभी को प्रभावित किया है. आईपीएल से पूर्व जड़ेजा अच्छी बल्लेबाजी नहीं कर पा रहे थे, लेकिन अब वह फॉर्म में नज़र आ रहे हैं. जड़ेजा ने 151 मैचों में 174 विकेट प्राप्त किए हैं, इस दौरान उनकी इकॉनमी 5 से कम रही. जड़ेजा की बल्लेबाजी भी शानदार है, उनके नाम 2000 से अधिक रन हैं.




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