आख़िर महिलाओं के लिए क्या किया महिला विरोधी मोदी सरकार ने ?

मोदी सरकार को हमेशा ही महिला विरोधी और रूढ़िवादी बोलकर काम आँका गया है. सरकार कोई अच्छी स्कीम भी निकालती है तो उसे तोड़ मरोड़कर ऐसे पेश किया जाता है जैसे सरकार महिलाओं का अच्छा नहीं बुरा चाहती है. पिछले पांच वर्षों में सरकार ने कई ऐसे कदम उठाएं हैं जो ये साबित करने के लिए काफी हैं कि सरकार महिलाओं की केवल उन्नति चाहती है.

आइये नज़र डालते हैं ऐसे ही कुछ क़दमों पर :

ट्रिपल तलाक बिल : भाजपा सरकार का एक साहसी और कंट्रोवर्शियल फैसला जिसे राजीव गाँधी सरकार ने मौलवियों के दबाव में आकर बदल दिया था. पहले मुस्लिम व्यक्ति केवल तीन बार तलाक बोल कर अपनी पत्नी को बच्चों सहित बिना किसी मुआवज़े हर्ज़ाने के तलाक दे सकता था. पर मोदी सरकार के इस बिल के बाद अब ऐसा कर मुस्लिम पुरुष ऐसा नहीं कर सकते, ऐसा करने पर 3 साल की सज़ा भी हो सकती है.

बेटी बचाओ बेटी बढ़ाओ : मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक यह स्कीम जिसने हरयाणा के लिंग अनुपात का कायापलट कर दिया. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ,स्वास्थ्य मंत्रालय और परिवार कल्याण मंत्रालय एवं मानव संसाधन विकास की एक संयुक्त पहल के रूप में समन्वित और अभिसरित प्रयासों के अंतर्गत बालिकाओं को संरक्षण और सशक्त करने के लिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना की शुरुआत 22 जनवरी,2015 को की गई हैसाल 2017 में 1000 लड़कों पर 914 लड़कियों का सर्वोच्च लिंग अनुपात दर्ज किया है, जबकि यह अनुपात 2016 में 900 और 2015 में 876 था. 17 जिलों ने 900 से अधिक के जन्म पर लिंग अनुपात के आंकड़े को हासिल किया है, 2017 में कोई भी जिला 880 के आंकड़े से नीचे नहीं रहा.

स्वच्छ भारत अभियान के तहत बने टॉयलेट : सौ करोड़ की आबादी को एक मुहिम की तरफ अग्रसर करना किसी जंग से कम नहीं है. प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत का नारा दिया था तब शायद ही किसी को उम्मीद रही होगी कि सरकार और जनता दोनों इस मुहिम की तरफ 100% प्रतिबद्धता दिखाएंगे. कुछ कमिया अभी भी हैं, पर अब तक जो हासिल हुआ वह किसी उपलब्धि से कम नहीं. स्वच्छ भारत का सबसे अहम् हिस्सा था गाँव की महिलाओं के लिए टॉयलेट बनाना. महिलाऐं अभी तक खुले में शौच करने को मजबूर थी. स्वच्छ भारत ने यह मूलभूत सुविधा उन्हें मुहैय्या कराई है.

उज्जवला स्कीम : प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत सरकार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को घरेलू रसोई गैस (एलपीजी (LPG) गैस) का कनेक्शन देती है. ग्रामीण इलाके में खाना पकाने के लिए परंपरागत रूप से लकड़ी और गोबर के उपले का इस्तेमाल किया जाता है. इससे निकलने वाले धुएं का खराब असर महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ता है. प्रधानमंत्री उज्जवला योजना (PMUY) से ऐसी महिलाओं को राहत मिलती है. साथ ही इससे ग्रामीण इलाके को स्‍वच्‍छ रखने में मदद मिलती है. अब तक सात करोड़ एलपीजी कनेक्शन दिए जा चुके हैं.

NDA कैबिनेट: कैबिनेट में कई महत्वपूर्ण पदों पर महिलाऐं है. आज तक किसी भी सरकार में ऐसा नहीं हुआ कि डिफेंस मिनिस्ट्री, एक्सटर्नल मिनिस्ट्री और सुप्रीम कोर्ट की जज भी महिला रही हों. NDA सर्कार कैबिनेट में ८ महिलाऐं हैं. यह अपने आप में ऐतिहासिक है.

महिला उद्यमी योजना

अन्नपूर्णा योजना: यह योजना उन महिला उद्यमियों के लिए है जो खानपान से जुड़ी इकाइयां लगाना चाहती हैं. इस बिज़नेस को शुरू करने के लिए महिलाओं को अधिकतम 50,000 रुपये का कंपोजिट टर्म लोन देने की योजना है. इस लोन को 36 मासिक किश्तों में लौटाने की सुविधा दी गई है.

स्त्री शक्ति पैकेज:यह पैकेज उन महिलाओं के लिए उपलब्ध है, जिनके पास फर्म या व्यवसाय में 50% ओनरशिप होती है. स्टेट बैंक की ज्यादातर शाखाएं यह पैकेज देती हैं. इस योजना के तहत अगर किसी महिला ने बिजनेस के लिए 2 लाख रुपये से ज्यादा का लोन लिया है, तो उसे लोन के ब्याज पर 0.50% की रियायत दी जाएगी.

भारतीय महिला बैंक श्रृंगार: ब्यूटी पार्लर, सलून और स्पा खोलने के लिए यह बैंक बिना कोई चीज गिरवी रखे 1 करोड़ रुपए का लोन देता है. यह लोन 12.25% की ब्याज दर के साथ 7 साल अवधि के लिया जाता है.

भारतीय महिला बैंक अन्नपूर्णा: इसके तहत महिला उद्यमियों को बिना कोई चीज गिरवी रखे 1 करोड़ रुपए का लोन दिया जाता है, जो उन्हें 11.75% की ब्याज दर के साथ 3 साल अवधि के दिया जाता है.

भारतीय महिला बैंक परवरिश: डे केयर सेंटर्स खोलने के लिए भारतीय महिला बैंक 1 करोड़ रुपए का लोन देता है. जो 12.25% की ब्याज दर के साथ 5 साल अवधि के लिए दिया जाता है.

देना शक्ति और उद्योगिनी योजना: यह ऋण एग्रीकल्चरल एक्टिविटीज, रिटेल सेक्टर और छोटे बिजनेस शुरू करने के लिए महिलाओं को देना बैंक और पंजाब एंड सिंध बैंक देते हैं. इन सेक्टर्स में बिजनेस शुरू करने के लिए लोन लेने पर महिलाओं को 0.25% कम ब्याज देना पड़ता है. कई बैंक ऐसे भी हैं, जो अलग-अलग ब्याज दरों पर महिला उद्यमियों को लोन देते हैं.

महिला उद्योग निधि योजना: यह योजना पंजाब नेशनल बैंक ने शुरू की है. यह योजना मुख्य रूप से स्मॉल-स्केल सेक्टर के बिजनेस शुरू करने के लिए है. योजना के तहत महिलाओं को 10 लाख रुपए का लोन मिल सकता है, जो उन्हें 10 साल में चुकाना होगा. इस लोन की ब्याज दरें बाजार की दरों पर निर्भर हैं जो समय-समय पर बदलती रहती हैं.

LGBT कानून में बदलाव : यह मोदी सरकार के राज में ही संभव हो पाया है कि एक रूढ़िवादी और अमानवीय कानून को हटाया गया. धारा 377 जो कि समलैंगिक संबंधों पर कानूनी कार्यवाही का प्रावधान रखती थी उसे हटाया गया. ये बात अलग है कि LGBT समुदाय आज भी बीजेपी और हिंदुत्व को गाली देता है भले ही इसी हिंदुत्व सरकार ने इस कानून को हटाने में मदद की हो.

मातृत्व लाभ : केंद्र सरकार ने मातृत्व लाभ याेजना पूरे देश में लागू कर दी है इसके तहत प्रसूता माताओं और दुग्धपान कराने वाली माताओं को पोषण के लिए 6000 रूपये दिए जाएंगे. यही नहीं मातृत्व अवकाश भी 12 से 26 हफ्ते कर दिया गया है.

किशोर किशोरियों के बलात्कारियों को मौत की सजा : मोदी सरकार ने ऐसा कानून पास किया जो की काफी पहले ही हो जाना चाहिए था, अब बच्चो और बच्चियों के बलात्कारियों को त्वरित मृत्यु की सजा मिलेगी.

सुकन्या समृद्धि स्कीम – इस स्कीम में 8.5 % की दर से फिक्स्ड डिपोसिट की सुविधा.

महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास योजना में प्राथमिकता : महिलाओं को कम ब्याज दर और स्टाम्प ड्यूटी में रियायत भी मिलेगी.

सुविधा सैनिटरी पैड : २.५० रुपया प्रति पैड की दर से सरकार ने बायो डिग्रेडेबल पैड. इन्हे जनऔषधि सेंटर्स पर खरीदा जा सकता है. कई रेलवे स्टेशनों पर वेंडिंग मशीने भी लगाई गई हैं.

ऐसे कई और अनगिनत क़दम NDA सरकार ने लिए हैं पर यह विडम्बना ही है कि इतनी सारी स्कीमों और बदलावों के बाद भी मोदी सरकार को ना तो इसको श्रेय दिया जाता है और आज भी महिला विरोधी और रूढ़िवादी कहा जाता है. अगर महिलाओं को उनकी उन्नति के लिए सहायता करना, ट्रिपल तलाक़ जैसे अमानवीय क़ानून से छुटकारा दिलाना रूढ़िवादी है तो हम चाहेंगे कि यह सरकार रूढ़िवादी ही रहे.

Rashmi Singh
Writer by fluke, started with faking news continuing the journey with Lopak.

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