आतंकवाद का धर्म होता है! (भाग-2)

केरल में मुसलमानों की एक और जमात पॉपुलर फ्रंट के कारनामें किसी से छुपे नही हैं. कैसे इनकी हथियार बंद सेना ने एक अध्यापक के दोनों हाथ सरेआम तलवार से काट दिए थे. किसी भी धर्मनिरपेक्ष पार्टी के मुसलमान नेता ने अपनी ज़बान नही खोली. ये क्या वजह है धर्मनिर्पेक्ष कांग्रेस के शासन में दंगो पर, और समाजवादी मुलायम सिंह के राज्य में दंगों पर मुसलमानो की चुप्पी और गुजरात में हुए एक दंगें की गूंज अमेरिका के व्हाइट हॉउस तक पहुचाई जाती हैं.

अगर मुसलमान को मुँह खोलते सुना हैं या टीवी पर देखा भी है तो समाजवादी पार्टी के मुखौटे में कमाल फारुखी कहते हैं; “यासीन भटकल को इसलिए पकडा गया क्योकि वो मुसलमान है.” धर्मनिरपेक्षता का झंडा बुलंद करने वाली भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दो नेताओं के बयान से पता चलता है कि आतंकवादियों का बचाव सैक्यूलरिज़म की छतरी के नीचे ही हो सकता है.

कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता और बिहार के बडे नेता शकील अहमद का कहना था कि इंडियन मुज्जाहिदीन तो भारतीय गुप्तचर एजेंसियों का क्रिएशन है.

दूसरे कांग्रेसी नेता, हार्वड से पढे हुए सलमान खुर्शीद 1984 में तीन हज़ार सिखो के नरसंहार पर अपनी किताब मे लिखते हैं; “हिंदुओ के हाथों मारे जाने वाले सिखों के कत्ल से मुसलमानों को संतुष्टि मिली क्योकिं सरदारों ने ही भारत विभाजन के वक्त मुसलमानों को मारा था.” 

जाने माने पत्रकार कुलदीप नय्यर ने अपनी किताब में जब ये कहा कि भारत मे मुसलमानों का बहुत बडा वर्ग है जो ये मानता है कि अंग्रेज़ो के आने से पहले भारत पर हमारे पुर्खो की हुकुमत थी तो उनके जाने के बाद 1947 में भारत की सत्ता मुसलमानों को मिलनी चाहिए. 

इसी वर्ग की एक बड़ी कोशिश है कि वो भारत में हर संस्थान को मुसलमान विरोधी साबित करने में लगी हुई हैं. उत्तर प्रदेश की पीएसी हो, बिहार की बीएमपी हो, गुजरात, मध्यप्रदेश,राजस्थान से लेकर हर सूबे की पुलिस को मुसलमान विरोधी साबित करने की कोशिशें जारी हैं.

मुसलमानों को कांग्रेस भी फिरकापरस्त लगती है, मुलायम और लालू पर मुसलमानों को बेवकूफ बनाने का आरोप लगाना और बीजेपी को खुलेआम मुस्लिम विरोधी बताने में उन्हे तथाकथित सैक्यूलर पार्टियों का साथ मिल ही जाता है.

पाक परस्त हैदराबाद निज़ाम की रक़ाब में तलवार चलाने वालों के मुखिया की पार्टी मजलिस- ए-इत्तहादुल मुस्लमीन के मरहूम नेता सलाउदीन उवैसी, उनका सांसद बेटा असदउद्ददीन उवैसी 1993 के मुम्बई सीरियल बम धमाकों के मास्टर माईंड याकूब मेमन को देश की सर्वोच्च अदालत से मिली फांसी को ये कहते हुए न्याय पालिका को ढहानें की कोशिश करता है कि याकूब मेमन को फांसी इसलिए दी जा रही है क्योकि वो मुसलमान है. अब ये बात किस के गले नही उतरेगी कि आतंकवाद का कोई मज़हब नही होता.

भारत पाकिस्तान, बांग्लादेश, ऑस्ट्रेलिया, इंगलैंड, अमेरिका, फ्रांस सब जगह हर पकडा जाने वाला दहशतगर्द इस्लाम का मानने वाला ही क्यों होता हैं? आईएसआईएस के काले रंग के झंडे पर ‘ला-इलाहा- इल-ल्ल- लाह’ लिखा है और उसके नीचे के गोल चक्र में मोहम्मद, रसूल और अल्लाह लिखा हुआ है. इसका अर्थ है- अल्लाह के सिवाए कोई और इबादत के लायक नही है.और यही कुरान का पहला कल्मा भी है. 

कल तक पूरी दुनिया अल कायदा के जिहाद से परेशान थी और आज आईएसआईएस के जिहादियों से सुन्नीयो को छोडकर हर मज़हब और फिरके के लोग परेशान हैं. भारतीय कश्मीर में हर जुम्मे की नमाज़ के बाद कश्मीरी मुसलमान जिस आतंकवादी गुट का झंडा दिखाते है, वो आईएसआईएस का है और उस पर लिखी आयत तब तक पवित्र है जब तक भारत विरोधी कश्मीरी युवा उसे खुलेआम फहराए. और जब पुलिस उन्हे खदेडती है तो वो उसी झंडे को पैरो तले रौंदते हुए जान बचाने को भागते है.

लेकिन जब ये झंडा जम्मू में कुछ हिंदू लडके जिन्हे ये पता भी नही है कि इस पर क्या लिखा है, अपना विरोध जताने के लिए इसे जलाते हैं तो उससे मुसलमानों की पवित्र भावनाऐ आहत हो जाती हैं. अजीब तर्क हैं.

भारत में मुस्लिम सियासत मुस्लिम लीग से शुरु हुई थी जिसके चलते पाकिस्तान बना. उस मुस्लिम लीग के अब पाकिस्तान में अनगिनत टुकडे हो चुके हैं लेकिन भारत में मुसलमान सियातय धर्मनिरपेक्षता के मुखौटे में और लोकतंत्र की दुहाई देकर भारतीय सत्ता, व्यवस्था, संस्थान, पुलिस, अदलिया,आईन को धरम भरम करके भीड तंत्र में बदलने की कोशिश में हैं. इसके चलते आतंकवाद को मुस्लिम विरोधी बताकर देश में अराजकता पैदा करने की साज़िश है.

वोट बैंक की सियासत और मुसलमानों की ब्लैकमेलिंग ने सत्ता के दलाल भारतीय नेताओं की सच को सच कहने की आत्मशक्ति को समाप्त कर दिया है.

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