पीसी चाको के बयान से झलक रहा है कांग्रेस का अंतर्द्वंद

आज देश को एक बड़ा फैसला करना है. देश में चुनाव हो रहे हैं तो नई सरकार का चुनाव करना एक बड़ा फैसला होता है. लेकिन आज हम देश के आने वाली सरकार के चुनाव के बारे में बात नहीं करने जा रहे हैं. हम आज बात करने जा रहे हैं उस सोच के चुनाव की जो एक व्यक्ति विशेष को हराने के लिए किसी भी स्तर तक गिर सकती है. कांग्रेस के नेता पीसी चाको का यह बयान है कि वह भले ही वैचारिक रूप से अलगाववादी यासीन मलिक से कितना भी नफरत करते हो लेकिन वह उनकी स्थिति को देखकर दुखी हैं. वह गर्व महसूस करते हैं कि यासीन मलिक ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपनी आवाज उठाई. उनके इस गर्व के पीछे वह कारण यह देते हैं कि देश की केंद्र सरकार किसी की भी लोकतांत्रिक अधिकार के खिलाफ फैसला नहीं सुना सकती है और यही पीसी चाको के बयान के पीछे का आधार बताया जा रहा है.

पीसी चाको को यह समझना होगा कि इस देश के लोकतांत्रिक अधिकार इस देश के नागरिकों के लिए है. जो व्यक्ति अपने आप को इस देश का नागरिक मानने में ही गर्व महसूस नहीं करता है उसको हम देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का आनंद क्यों उठाने दे. सबसे बड़ी बात यह हो जाती है कि इस देश के अंदर अलगाववाद को बढ़ावा देने वाले लोगों को हम अपने देश के लोकतंत्र के अधिकारों का इस्तेमाल क्यों करने दें जबकि वह हमारे देश के अस्तित्व को ही स्वीकार नहीं करता है. यासीन मलिक से कांग्रेस के भावनात्मक जुड़ाव को देखकर वही कहावत याद आती है कि रस्सी जल गई लेकिन बल नहीं गया.

कांग्रेस पार्टी वह पार्टी है जिसने एक जमाने में 400 से अधिक लोकसभा सीटों पर अपना कब्ज़ा जमाया था. यह वह पार्टी है जो आज 44 पर सिमट चुकी है. उन्होंने कुछ तो ऐसा गलत किया होगा कि 400 पर बैठाने वाली जनता ने उनको 44 सीटों पर लाकर पटक दिया. इसी प्रकार के बयान और बिना आधार वाली सोच उसका एक कारण है.

पीसी चाको का यह बयान कांग्रेस की बड़ी दयनीय स्थिति को भी दर्शाता है. एक जमाने में वामपंथ का इस्तेमाल करके फिर से केंद्र की सत्ता में वापस आई इंदिरा गांधी की पार्टी आज उसी वामपंथ का हथियार बन चुकी है. यह एक अखिल भारतीय पार्टी के लिए शर्म की बात होनी चाहिए. कांग्रेस की वैचारिक स्थिति यह हो चुकी है कि अब वह देश के अलगाववादियों के साथ भी सहानुभूति दर्शाने लगे. वह अलगाववादी जो कि पाकिस्तान परस्ती में लगे रहते हैं.

इसने भारतीय जनता पार्टी को राजनैतिक पिच पर बढ़कर छक्का लगाने में बहुत सहायता की है. देश के तथाकथित बुद्धिजीवी और पत्रकार यह कह सकते हैं कि भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस के नेताओं के इस बयान पर राजनीति कर रही है. आप एक राजनीतिक पार्टी से उम्मीद क्या लगाकर रखते हैं? वो राजनीतिक पार्टी है राजनीति तो करेगी. अंतर बस इतना है कि कौन सी पार्टी राष्ट्र समर्थक है और कौन सी पार्टी राष्ट्र विरोधी. यही दो पार्टियों के बीच में एक मूल सिद्धांत होता है.

केरल में गाय काटकर कांग्रेस अध्यक्ष को जनेऊ धारी हिंदू बताना कांग्रेस के विरोधाभास वाली राजनीति का एक उदाहरण था. पीसी चाको चाहे कोई भी तर्क दे दे लेकिन एक सच्चाई यह है कि इस बयान ने भारतीय जनता पार्टी को फ्रंट फुट पर खेलने की खुली छूट तो दे ही दी है. और जिस पार्टी के पास नरेंद्र मोदी जैसा स्ट्राइक बैट्समैन हो वह ऐसे बयानों को राजनीतिक रूप से इस्तेमाल करने की उम्मीद कर भी सकती है. एक अखिल भारतीय पार्टी का क्षेत्रीय दलों द्वारा दुत्कार दिया जाना उसके दयनीय स्थिति को बताता है. कोई संदेह नहीं कि आखिर कांग्रेस पार्टी के केंद्र में इतने लंबे शासनकाल में रहने के बावजूद 2 से 282 तक पहुंची भारतीय जनता पार्टी क्यों 2019 में अपनी सरकार बनने की ताल ठोक रही है. कांग्रेस पार्टी के समर्थकों को कम से कम अपनी पार्टी से जवाब मांगने चाहिए. यही देश के लोकतंत्र के लिए बेहतर होगा.

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