समाजवादी पार्टी का चुनाव घोषणा पत्र भी जातिवाद से परे नहीं!

इस देश का यह दुर्भाग्य ही है कि आज़ादी के 70 सालों बाद भी राजनीतिक दल जातिवाद की राजनीति से ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं. एक ओर तो राजनीतिक दल खुद को पाक-साफ बता कर औरों पर जाति-धर्म की राजनीति करने का आरोप लगाते हैं, दूसरी ओर चुनावी घोषणा पत्र में जाति का ज़िक्र करते हैं तो फिर ‘महानता’ का सार्टिफिकेट देना आवश्यक हो जाता है.

हम बात कर रहे हैं मुलायम सिंह के सुपुत्र व समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की. अखिलेश यादव ने शुक्रवार को समाजवादी पार्टी का चुनाव घोषणा पत्र जारी किया. इस घोषणा पत्र में अखिलेश ने खुले तौर पर जाति आधारित घोषणाएं की हैं.

इन घोषणाओं के विषय में माना जा रहा है कि ये घोषणाएं पिछड़ा वर्ग को आकर्षित करने के उद्देश्य से की गईं हैं. अपने घोषणा पत्र में पार्टी ने सामाजिक न्याय से महापरिवर्तन की बात कही है. घोषणा पत्र में पार्टी ने कहा कि आज देश में अमीर ही और भी अमीर हो रहा है.

आज देश में 10 प्रतिशत समृद्ध (जिनमें से ज्यादातर सवर्ण हैं) के पास देश की 60 प्रतिशत  संपत्ति है. साथ ही यह भी कहा गया है कि आज देश की आधी आबादी के पास देश की कुल आय का आठ फ़ीसदी धन ही है. 

समाजवादी पार्टी के अनुसार गरीब प्रतिदिन गरीब होता जा रहा है. अगर उनकी सरकार आती है तो वह देश के उन 0.1 प्रतिशत अमीरों पर 2 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स लगाएगी जिनकी संपत्ति ढाई करोड़ रुपये से अधिक है. इस अतिरिक्त टैक्स से सामाजिक न्याय में वृद्धि होगी.

यदि पार्टी ने केवल अमीरों पर अतिरिक्त टैक्स लगाने की बात कही होती तो निश्चित ही बहस का मुद्दा नहीं बनता, लेकिन जाति आधारित टैक्स की घोषणा करके पार्टी ने अपनी राजनीति करने के तरीके व उसकी हक़ीक़त को देश के सामने प्रस्तुत किया है.

पार्टी यहीं नहीं रुकी, उसने अपने घोषणा पत्र में देश की सेना को भी जाति के आधार पर बांटने की बात कही. यह कहा गया है कि यदि उनकी सरकार बनती है तो एक अलग अहीर रेजीमेंट बनाया जाएगा.

विडंबना देखिए कि इस घोषणा से पूर्व अखिलेश यादव ने भाजपा पर भारतीय सेना को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था. उन्होंने कहा कि बीजेपी का छद्म राष्ट्रवाद हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए किसी भी बाहरी ताकत से ज्यादा खतरनाक है.

अब प्रश्न यह है कि सेना को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कौन कर रहा है, भाजपा या समाजवादी पार्टी?

यदि भाजपा कर रही होती तो ऐसा घोषणा पत्र भाजपा का होता. हालांकि यहां यह प्रश्न भी उठ रहा है कि यदि अहीर रेजिमेंट बनाने की चाह ही है तो यह काम तब भी किया जा सकता था, जब मुलायम सिंह देश के रक्षा मंत्री थे.

किन्तु तब न तो ऐसा कोई प्रयास किया गया और न ही विचार लेकिन आज जबकि वोट की आवश्यकता है तो सेना का जातिगत विभाजन करने की घोषणा की जा रही है.

पिछले लोकसभा चुनाव में हुई हार के बाद सभी विपक्षी पार्टियों में दहशत का माहौल है. तभी ये पार्टियां जातिगत वोट बैंक पर इतनी निर्भर दिख रही हैं. विपक्षी पार्टियों के चुनावी घोषणा पत्र भी इसी ओर इशारा करते हैं.

यूं तो विपक्ष एकजुट होकर सरकार पर सेना का दुरुपयोग करने का आरोप लगाता रहा है, लेकिन कांग्रेस के घोषणा पत्र ने जहां सेना का मनोबल तोड़ने का काम किया है, वहीं समाजवादी पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र, सेना को बांटने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.

अब देखना यह है कि पार्टियों के इस तरह की घोषणाओं के बाद जनता अपना रुख किस प्रकार दिखाती है. देश की जनता इन सबसे समझदार है. उसे पता है कि कौन देश का विकास कर सकता है व कौन स्वयं के विकास के लिए सत्ता में आने की चाह रखता है.

दावा त्याग – लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. आप उनको फेसबुक अथवा ट्विटर पर सम्पर्क कर सकते हैं.

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