आप से बड़ा प्रोपगंडिस्ट कौन है राजदीप?

विवेक ओबराय ने राजदीप से पूछा; “क्या आपके शो को बंद कर देना चाहिए क्योंकि वह लोगों की सोच को प्रभावित करता है?”

कुछ वर्ष पहले जब ठीक पंजाब चुनाव के पहले ‘उड़ता पंजाब’ फ़िल्म आई थी, तब पूरा लिबरल समाज इसे अवेयरनेस के नाम पर ज़रूरी बता रहा था. फ़िल्म ने चुनावों को प्रभावित किया या नहीं वह अलग विषय है पर वही लिबरल मीडिया अब विवेक अबोरॉय की फिल्म प्राइम मिनिस्टर नरेन्द्र मोदी पर सवाल उठा रहा है.

कुछ समय पहले आई फ़िल्म ‘उरी’ और ‘एक्सीडेंटल प्राइम’ मिनिस्टर के लिए भी ऐसे सवाल उठाए गए थे.

राजदीप सरदेसाई के शो में विवेक ओबेरॉय ने राजदीप की बोलती बंद कर दी. राजदीप विवेक पर कांग्रेज़ की तरफ से इल्ज़ाम लगा रहे थे कि यह फ़िल्म प्रोपेगैंडा फ़िल्म है. इसमें मोदी जी की छवि को एकदम साफ सुथरा बताया गया है और ये चुनाव के ठीक पहले आ रही है. यह बात कैसे मान ले कि यह चुनाव को प्रभावित करने के लिए नही बनाई गई है.

इस पर विवेक ने जवाब दिया; “राजदीप आप यह शो चलाते हैं. आप यहां देश में कोई भी निर्णय लिया जाता है, उस पर अपनी राय रखते हैं, क्या वह देश के लोगों को प्रभावित नहीं करती? आपकी निजी राय क्या चुनावों को प्रभावित नहीं करती? क्या चुनाव के दौरान आपका शो बंद कर दिया जाना चाहिए क्योंकि आपकी बातें और राय सुनकर देश के कई लोग प्रभावित होते होंगे?”

इस पर राजदीप ने कहा कि विवेक एक शो 365 दिन आता है, उसकी तुलना फ़िल्म से कैसे कर सकते हैं. विवेक ने इस उत्तर दिया कि केवल माध्यम का फर्क है. राजदीप एक ऐड चलाते हैं जिसमे यह बताया जाता है कि उन्होंने  कई चुनाव कवर किये हैं तो उनके मत और राय से तो और ज़्यादा लोग प्रभावित होंगे.

विवेक ने यह भी कहा कि फ़िल्म उन्होंने इसलिए की क्योंकि वह मोदी जी से प्रभावित थे.

नज़र डालते हैं कुछ फिल्मों में जो चुनावों के आसपास किसी गंभीर मुद्दे पे बनाई गई थी, जिन्हें असल में प्रोपेगंडा फ़िल्म कहा जा सकता है.

●2007 में आई ‘परज़ानिया’ 2002 गुजरात  दंगों पर बनी थी और ठीक चुनावों के पहले आई थी, पर तब किसी ने यह सवाल नहीं उठाया कि यह चुनावों को प्रभावित करने के लिए बनी थी. फ़िल्म में सनातन धर्म को अपमानित किया था.

●2009 में आई नंदिता दास द्वारा निर्देशित ‘फिराक’ जिसमें हिन्दू टेरर और बीजेपी की साजिश का हवाला दिया गया था. यह भी ठीक चुनावों के पहले आई थी.

ऐसे कई और फिल्में हैं जो साफ साफ प्रोपेगण्डा फिल्मे हैं. मुस्लिम या ईसाई व्यक्ति है तो मदद करने वाले राहगीर होगा और पंडित और भगवा धारण किया हुआ व्यक्ति कपटी होगा. फ़िल्म का विलन टीका लगाता होगा या रुद्राक्ष धारण किये होगा. अभिव्यक्ति की आज़ादी की आड़ में झूठ फैलाने से दिक्कत नहीं है पर कड़वा सच दिखा दिया जाए तो वह प्रोपगंडा है. 

Rashmi Singh
Writer by fluke, started with faking news continuing the journey with Lopak.

2 Comments

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    January 14, 2020 - 9:07 pm

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