बिना आग के धुआं उठाने का विफल प्रयास

सोशल मीडिया पर एक वीडियो चल रहा है. यह वीडियो नरेंद्र मोदी का है, जहां वो नए लांच हुए चैनल TV9 भारतवर्ष के समारोह में भाग लेने के लिए पहुंचे थे. पुराने समय में कहा जाता था कि जहां न पहुंचे रवि, वहां पहुंचे कवि. आधुनिक काल में इस कहावत में ‘कवि’ की जगह कैमरे ने ले ली है. कैमरा तो कहीं भी पहुँच सकता है. कहो जहाँ न भी पहुंचना हो, वहां भी पहुंच जाए.

ऐसे ही यहां भी वो कैमरा पहुंचा तो प्रधानमंत्री मोदी और TV9 के सीईओ रवि प्रकाश के बीच हुई हल्की-फुल्की बात रिकॉर्ड हो गयी. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रवि प्रकाश से यह कहते हुए पाए गए हैं कि ऐसे ऐसे लोग भरे हैं जिनके ब्लड में है मुझे गाली देना और इसके जवाब में रवि प्रकाश बदलाव लाने की बात करते हैं.

इसी छोटी बात पर बड़ा बवाल बनाकर रखा जा रहा है. कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला की पारखी नज़रों ने इसमें मोदी की धमकी देख ली है. उन्होने बाकायदा इसे ‘सनसनीखेज़ और शर्मनाक’ बताकर ट्वीट भी किया है.

समझ में यह नहीं आता है कि आखिर इस सामान्य बात में किस प्रकार की धमकी है. देश के प्रधानमंत्री ने बस एक टीवी चैनल के सीईओ से अपने मन की बात कही है. मोदी भी तो एक सामान्य व्यक्ति ही हैं. हाँ, उनका पद अवश्य बड़ा है. 

कोई इस बात को भूल नहीं सकता है कि कैसे अपने मुख्यमंत्री काल के दौरान उनको विभिन्न चैनलों के पत्रकारों द्वारा ‘बिलो द बेल्ट’ प्रहार किया जाता था. आज कालचक्र बदला और मुख्यमंत्री मोदी प्रधानमंत्री मोदी बन गए. लेकिन मन में उस काल के दौरान इन पत्रकारों द्वारा मिले कटु अनुभवों को प्रधानमंत्री भुला नहीं पाए हैं. बस प्रधानमंत्री मोदी ने उसी समय की याद करते हुए ‘मर्यादाओं की सीमा के भीतर’ अपनी बात रखी. इसमें धमकी वाली तो कोई बात नहीं है.

दूसरी तरफ वही पत्रकार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आज भी ट्विटर पर मोदी के दुबारा प्रधानमंत्री न बनने देने के लिए जनता से अनुरोध करते रहते हैं. वे अपनी अभिव्यक्ति की आज़ादी का प्रयोग करते हैं. मोदी ने अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए बात रखी है.

चुनावी मौसम है तो बातों का बतंगड़ बनाया ही जायेगा. इस कड़ी में यदि बिना आग के धुआं दिखाने का भी प्रयास किया जाए तो आप आश्चर्यचकित मत होइएगा. 23 मई तक यही हाल चलता रहेगा. देखना यह होगा कि देश में किस हिसाब से हवा बदलने का प्रयास किया जाता है. पहला प्रयास तो विफल ही हो गया है.

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