साध्वी प्रज्ञा पर लिबरल चिल्ल-पों से उभरे सवाल

साध्वी प्रज्ञा के भोपाल से नामांकित होने के बाद से ही मीडिया और लिबरल समाज यह साबित करने में लगा है की बीजेपी ने अपना असली रूप दिखा दिया और एक भगवा आतंकी को टिकट दे दी साध्वी प्रज्ञा के खिलाफ तहसीन पूनावाला ने चुनाव आयोग से शिकायत करते हुए साध्वी प्रज्ञा की उम्मीदवारी पर रोक लगाने की सिफारिश की थी.

चुनाव आयोग का कहना है कि अभी तक साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ कोई भी दोष साबित नहीं हुआ है और जब तक आरोप साबित नहीं हो जाता, चुनाव लड़ने पर रोक नहीं लगाई जा सकती. चुनाव आयोग ने कहा कि दोष साबित हो जाने पर चुनाव न लड़ने का प्रावधान है. आरोपी होने पर चुनाव लड़ने से किसी की उम्मीदवारी पर रोक नहीं लगाई जा सकती. पर चुनाव आयोग की सफ़ाई के बाद भी मीडिया और पत्रकार बार बार इस बात को दोहरा रहे हैं की साध्वी दोषी हैं.

भ्रष्टाचार के लिए सज़ा काट रहे लालू यादव के रसटिक चार्म में मंत्रमुग्ध होने वाले आज बिना किसी सबूत के एक महिला को अपने ही कोर्ट में दोषी करार दे रहे हैं जिसे बुरी तरह से प्रताड़ित किया गया. जिसने इतनी यातनाएं झेलीं, बिना किसी कारण इतने दिन कस्टडी में रही और सबूत न मिल पाने के बाद भी जेल में सड़ती रही. कैंसर, टूटी हड्डियों से जूझने के बाद भी उन्हें अस्पताल जाने के लिए मिन्नतें मांगनी पड़ी. दुर्व्यवहार, यहाँ तक की पुरुष स्टाफ द्वारा घटिया हरकतें भी देखनी पड़ी केवल इसलिए ताकि वो ये कबूल कर लें कि भगवा आतंकवाद है.

साध्वी प्रज्ञा पर टाइम्स नाउ के पत्रकार ने प्रधानमंत्री मोदी से सवाल पूछा तो उन्होंने कहा ‘जब 1984 में श्रीमती गांधी की हत्या हुई. उसके बाद उनके सुपुत्र ने कहा था कि जब एक बड़ा पेड़ गिरता है तो जमीन हिलती है और उसके बाद देश में हजारों सरदारों का कत्लेआम किया गया। क्या यह टेरर नहीं था? क्या यह निश्चित लोगों का टेरर नहीं था? उसके बाद भी उन्हें प्रधानमंत्री बना दिया गया और उस संबंध में मीडिया ने एक भी सवाल नहीं पूछा.’ इंटरव्यू में मोदी ने कहा कि जो लोग उस समय के आंखों देखे गवाह हैं कि इन्होंने (आरोपी) इतने सरदारों को जला दिया. उनको ही बाद में सांसद बनाया गया, केंद्र में मंत्री बनाया गया. उसमें से एक को अभी मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया.

मोदी ने आगे कहा कि जिन लोगों को कोर्ट ने सजा दी है, उन्हें लोग गले लगा रहे हैं, जेल में जाकर मिल रहे हैं. अस्पताल में आए तो उनसे मिलने जा रहे हैं. ऐसे लोगों को उसूलों की बातें करने का कोई हक नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि अगर अमेठी और रायबरेली के उम्मीदवार जमानत पर हों तो चर्चा नहीं होती लेकिन भोपाल का उम्मीदवार जमानत पर हो तो बहुत बड़ा तूफान खड़ा कर दिया जाता है. एक महिला को, वह भी एक साध्वी को इस प्रकार से प्रताड़ित किया गया।

पीएम ने आगे कहा, ‘मैं गुजरात में रहकर आया हूं और मैं कांग्रेस के काम करने के तरीके को भली-भांति समझ चुका हूं.’… ‘जैसे फिल्म की स्क्रिप्ट लिखते हैं वैसे पहले कागज पर लिखकर स्क्रिप्ट लिखी जाती. एक छोटा सा कहीं से ढूंढकर लाएंगे, उसे फैलाएंगे, रंग भरेंगे, विलन को ले आएंगे और फिर हीरो-हीरोइन लाएंगे और फिर स्टोरी बनाएंगे. ‘ पीएम ने कहा, ‘हमारे जहां जितने भी एनकाउंटर हुए उसे ऐसे ही चलाया गया। हर घटना को ऐसे खींचते थे… जोड़ते जाते हैं।’ जस्टिस लोया की मौत पर हुए विवाद पर पीएम ने कहा, ‘जस्टिस लोया की मौत स्वाभाविक थी लेकिन उसी मोडस ऑपरेंडी से ऐसा केस बना दिया जैसे उनकी हत्या हुई. इन दिनों भी EVM को लेकर लंदन में प्रेस कॉन्फ्रेंस भी उसी मोडस ऑपरेंडी से हुई. अभी उन्होंने झूठा विडियो बनाकर नोटबंदी पर ड्रामा किया था. ये सब उसी मोडस ऑपरेंडी का हिस्सा है.’

समझौता एक्सप्रेस का जजमेंट आ गया है , क्या निकला ? और आपने बिना सबूत के दुनिया में पाँच हज़ार साल तक जिस महान संस्कृति और परम्परा ने ‘वसुधेव क़ुटुम्बकम’ का संदेश दिया, ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः’ का संदेश दिया, जिस संस्कृति ने ‘एकम सत विप्रा बहुधा वदन्ति’ का संदेश दिया. ऐसी संस्कृति को आपने आतंकवादी कह दिया. उन सब को जवाब देने के लिए ये एक सिम्बल है, और ये सिम्बल कांग्रेस को महँगा पड़ेगा.

आश्चर्य की बात है ये कि मीडिया एक बीजेपी ट्रोल के घर तक का पता ढूँढ लाती है पर कभी इस बात की छानबीन नहीं करती कि जिन आरोपों में साध्वी को फँसाया गया है वह सही है या नहीं. बड़ी चालाकी से कांग्रेस सरकार साध्वी प्रज्ञा के केस पर कुंडली मार कर बैठी रही. ना तो उन्होंने साध्वी को कोई सज़ा दी, ना ही उन्हें जेल से रिहा किया. पर मीडिया शायद ही कभी इन सब पर कांग्रेस या विरोधियों से सवाल करे. उनके ख़िलाफ़ इस तरह का अमानवीय व्यवहार क्यूँ किया गया, उन्हें गौमांस क्यूँ खिलाया गया, उन्हें पोर्न टेप क्यों सुनाई गई इस पर सवाल करे. जब उनकी स्कूटर चोरी हो चुकी थी और गवाह भी अपने बयान से मुकर गए थे फिर किस आधार पर उन्हें आतंकवादी क़रार दिया गया? कांग्रेस् भगवा आतंक को साबित करने के लिए एक महिला की आबरू से खेल जाएगी यह सोच कर भी घृणा आती है.

Rashmi Singh
Writer by fluke, started with faking news continuing the journey with Lopak.

2 Comments

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    Ankit Mishra
    April 20, 2019 - 11:37 am

    शिवानी जी आपका यह लेख पूर्वाग्रह से और गलत को गलत ना बोलने की आपकी व आपकी कलम की कमजोरी को दिखाता है. साध्वी प्रज्ञा कुशवाहा सुनील जोशी हत्या के लिए गिरफ्तार की गयी उसके बाद प्रज्ञा पर मालेगांव और समझौता एक्सप्रेस मामले मे जांच हुई. मा. न्यायालय ने जो कुछ सुनवाई के दौरान कहा वो आप पढ़िए कैसे गवाह बयानों से पलट गए कैसे C.B.I ने महत्वपूर्ण सबूत कोर्ट के सामने पेश नहीं किए और रही प्रधानमंत्री की बात कांग्रेस ने जो किया वो इसका बदला लेने आए हैं क्या इन्हे कांग्रेस की गलतियों को सुधारने भेजा गया था ना कि ऐसे बयान देने के लिये, और ये जो बोले वो किया जाए ऐसा भी नहीं 2002 मामले मे क्यू अटल जी इनसे नाराज थे क्यू अटल जी ने इनका समर्थन नहीं किया .बाकी कुछ भी लिखे पर अनायास ही छोटे रास्ते लेकर किसी झुंड के लिए विशेष ना बने. आपके मंगलमय जीवन की कामना के साथ

    सादर वंदन

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    विनोद पाठक
    April 20, 2019 - 8:26 pm

    – इसमे दो राय कहाँ है कि हेमंत करकरे शहीद हुए थे।
    – वह शहीद इस लिए हैं क्योंकि आतंकियों की गोली का निशाना बने थे।
    – उस समय टीवी के विजुअल्स में वह मोर्चे पर जाने के पहले वह बुलेट प्रूफ जैकेट पहनते हुए नज़र आये थे।
    – यानी बुलेट प्रूफ जैकेट पहने होने के बावजूद वह आतंकियों की गोली के शिकार हो गए थे।
    – में जैकेट की गुणवत्ता को लेकर कोई सवाल बिल्कुल नहीं उठाऊंगा।
    – मेरे और हम सबके लिए वह देश की रक्षा में प्राणोत्सर्ग करने वाले शहीद हैं, इस लिए आदरणीय हैं।
    – पर उन्हें जरा उस अबला की नज़र से भी देखने की कोशिश कर लीजिए, जिसे स्वयं उनके द्वारा और उनकी देख-रेख में दूसरे पुलिसियों के हाथों 24 दिनों तक मुतवातिर अमानवीय और अकल्पनीय यातनाएं सहने को मजबूर होना पड़ा था, जिसके कारण उसे चलने फिरने को भी लाचार हो जाना पड़ा हो।
    – शिव के गले मे विराजने वाला विषधर सभी के लिए पूज्य है, लेकिन उसी सर्प द्वारा किसी को डंस लिए जाने पर तो उसके व उसके परिजन के लिए वह शत्रुवत ही होगा न।
    – फिर प्रज्ञा ठाकुर की पीड़ा की सामान्य अभिव्यक्ति पर इतना वितण्डा क्यों?
    – क्या सिर्फ इसी लिए उन्हें गिरगिटी बाना धारण कर लेना चाहिए कि वे अब सिर्फ पीड़िता नहीं, राजनीतिज्ञ भी बन चुकी हैं और राजनीतिज्ञों के लिए मन की बात करना वर्जित है?

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