लेटरल एंट्री की सूची जारी कर सरकार ने बजाया बदलाव का बिगुल

मोदी सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी योजना के तहत निजी क्षेत्र के 9 विशेषज्ञों को जॉइंट सेक्रेटरी के तौर पर नियुक्त किया है. यह पहली बार है जब इन पदों पर निजी क्षेत्र से सीधे नियुक्ति की गई हो.. यह पहली बार है जब इन पदों पर निजी क्षेत्र से सीधे नियुक्ति की गई हो. आमतौर पर इन पदों पर किसी मंत्रालय के बड़े अधिकारी होते हैं, लेकिन पिछले साल प्राइवेट कंपनियों में काम करने वाले लोगों के लिए बिना यूपीएससी की परीक्षा दिए ज्वाइंट सेक्रेटरी लेवल पर नियुक्ति का विज्ञापन दिया गया था .

लेटरल एंट्री मोड का मतलब यह है कि निजी सेक्टर से विशेषज्ञों को सरकारी संस्थानों में काम करने का मौक़ा दिया जाए. यह मोदी सरकार की महत्त्वाकांक्षी पहल है जिसके जरिए नौकरशाही में फ्रेश टैलेंट लाने की कोशिश की जा रही है. नीति आयोग ने अपनी एक रिपोर्ट में स्पेशलिस्ट्स को लैटरल एंट्री के जरिए कांट्रैक्ट पर नौकरशाही में शामिल करने को आवश्यक बताया था.

कांट्रैक्ट बेसिस पर केंद्रीय विभागों के इन 9 पदों के लिए कुल 6077 आवेदन आए थे. इसके लिए सरकार ने पिछले साल जून में विज्ञापन दिया था. इन पदों के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 30 जुलाई 2018 थी. इन 6077 लोगों में सिर्फ 89 लोगों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था. इसके बाद उनसे एक बार फिर डिटेल्ड एप्लीकेशन फॉर्म भरवाया गया.

इसके पहले इन पदों पर आईएएस, आईपीएस, आईएफएस और आईआरएस ऑफिसर्स की ही नियुक्ति होती थी. ये पद राजस्व, वित्तीय सेवाएं, आर्थिक मामलों, कृषि व किसान कल्याण, सड़क परिवहन व राजमार्ग, पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन, नवीकरण ऊर्जा, नागरिक विमानन और वाणिज्य विभाग में हैं. Lateral Entry के जरिए इन पदों पर जिन 9 लोगों की नियुक्ति की गई है, उनकी रिकमंडेशन यूपीएससी ने ही की. चयनित लोगों की सूची नीचे दी हुई हैं.

मिनिस्ट्री/डिपार्टमेंट- सेलेक्टेड कैंडिडे

एग्रीकल्चर- काकोली घोष

सिविल एविएशन- अंबर दुबे

कॉमर्स- अरुण गोयल

इकनॉमिक अफेयर्स- राजीव सक्सेना

पर्यावरण- सुजीत कुमार बाजपेयी

फाइनेंशियल सर्विसेज- सौरभ मिश्रा

रिन्यूएबल एनर्जी- दिनेश दयानंद जगदले

रेवेन्यू- ***

रोड ट्रांसपोर्ट और हाईवे- सुमन प्रसाद सिंह

शिपिंग- भूषण कुमार

इन पदों पर नियुक्ति के लिए गाइडलाइंस क्या रखे गए थे?
न्यूनतम उम्र सीमा- 40 साल
अधिकतम उम्र सीमा- तय नहीं
पे स्केल- 144,200-218,200 रुपये प्रति महीना
योग्यता- किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन
अनुभव- किसी सरकारी, पब्लिक सेक्टर, यूनिवर्सिटी या प्राइवेट कंपनी में 15 साल का अनुभव

केंद्र सरकार ने जब से निजी क्षेत्र से प्रतिभाओं को शामिल करने के प्रस्ताव को पहली बार एक विज्ञापन के माध्यम से सार्वजनिक किया तब से इस मुद्दे पर काफ़ी विवाद हुआ.

विपक्षी पार्टियों जैसे कांग्रेस, सीपीआई (एम) और समाजवादी पार्टी ने वोटबैंक को मद्देनज़र रखते हुए इस योजना की आलोचना की और कहा कि यह स्कीम देश में शासन की कार्य प्रणाली के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश है. वहीं कई लोगों का मानना था कि नौकरशाही को सुधारने के लिए निजी प्रतिभाओं को लाने का निर्णय आवश्यक है .कई लोगों ने यह तर्क दिया है कि निर्णय लेने वाले उच्चतम पद पर बीजेपी आर.एस.एस. समर्थकों को सरकार में लाने का तरीका है.

सेक्टरोल ग्रुप ऑफ सेक्रेटरीज (SGoS) की ओर से फरवरी 2017 में सौंपी गई रिपोर्ट में इंगित किया गया कि वर्ष 1995-2002 के दौरान संयुक्त सचिव/निदेशक/उप सचिव के स्तर पर अधिकारियों की कमी पाई गई थी. इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने दस संयुक्त सचिवों की लेटरल नियुक्ति के लिए कदम उठाया. इससे दो उद्देश्यों की पूर्ति होती है, पहला सिस्टम में ताजा टेलेंट का समावेश और मानव संसाधनों की उपलब्धता को बढ़ाना.  

यह पहली बार नहीं है जब सरकार में लेट्रल एंट्री की जा रही है, पहले भी योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ मोंटेक सिंह अहलूवालिया, वित्त मंत्रालय के पूर्व सलाहकार विजय केलकर, भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर बिमल जालान, पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार शंकर आचार्य, भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर राकेश मोहन, पूर्व आर्थिक सलाहकार अरविंद विरमानी इत्यादि इसी तरह सरकार में शामिल किए गये थे.

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Rashmi Singh
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2 Comments

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