‘द ताशकंत फाइल्स’ को मिस न करें

अरसों बाद एक फिल्म आती है जो आपको उन सभी मुद्दों पर सवाल पूछने के लिए मजबूर करती है, जिस पर हमें बचपन से ही विश्वास करने के लिए सिखाया गया है. ताशकंद फाइल्स एक ऐसी फिल्म है, जो भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की अचानक मौत के आसपास के विभिन्न तथ्यों और विवादों की पड़ताल करती है.

ताशकंद संधि पर हस्ताक्षर करने के कुछ ही घंटों बाद शास्त्री जी की रहस्यमयी मौत के पीछे लंबे समय से छिपे तथ्यों को ढूंढने, शोध करने और उजागर करने के लिए एक अज्ञात कॉलर द्वारा एक युवा महत्वाकांक्षी पत्रकार, जो बिना किसी रोक-टोक वाले रवैय्ये को अपनाती है, उसको इस एक बड़े रहस्य की तलाश में लगाया जाता है. वह जो खुलासा करती है, वह राजनीतिक समीकरणों को हिलाने करने और अंतरराष्ट्रीय नतीजों को प्रभावित करने तक ले जाने की क्षमता रखती है. जल्द ही, एक सेलिब्रिटी पत्रकार होने के नाते कुछ ही दिनों बाद वह खुद को अपनी नौकरी से बाहर देखती है. अपने पीछे ख़ुफ़िया लोगों को लगे हुए देखती है. उसे “राष्ट्र-विरोधी” कहा जाता है और उसका सामाजिक बहिष्कार किया जाता है. लेकिन वह उस अनजान कॉलर द्वारा निर्देशित गहरी पड़ताल को जारी रखती है, जब तक कि सभी ज्ञात तथ्य और प्रश्न फ़िल्म के क्लाइमेक्स तक खुल नहीं जाते.

यह फिल्म वास्तविक साक्ष्यों, लिखित अभिलेखों, सरकारी अभिलेखागार, प्रकाशित पुस्तकों और लेखक-शोधकर्ता अनुज धर द्वारा आरटीआई के लिए भारत सरकार के आधिकारिक उत्तरों सहित तथ्यात्मक प्रमाणों पर आधारित है. इसमें तथ्यों और तर्कों को परस्पर बेहतर समावेश देखने को मिलता है.

भारत के इतिहास में पहली बार, मित्रोखिन आर्काइव्ज, अर्थात वो गुप्त दस्तावेज जो केजीबी के पूर्व निदेशक विसिली मित्रोखिन के आर्काइव्ज हैं और जिसमें भारत पर एक पूरा खंड था जिसे लंबे समय तक दफन किया गया और अनदेखा किया गया, उसे पहली बार बड़ी स्क्रीन पर उतारा गया है. भारत के “स्वतंत्र और लिबरल मीडिया” द्वारा इस तथ्य को छुपाने के बावजूद इसको बड़े पर्दे पर प्रकाशित किया गया है. अभिलेखागार में 60 और 70 के दशक के उत्तरार्ध के दौरान भारत में विदेशी एजेंटों की भारी घुसपैठ का एक खतरनाक खुलासा हुआ है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सेंसर बोर्ड ने अग्निहोत्री को फ़िल्म के अंदर शामिल नेताओं के नाम को “व्हाइट आउट” करने और तथ्यों की प्रामाणिकता पर अस्वीकरण करने के लिए मजबूर किया. अग्निहोत्री ने कहा है कि अंतर्राष्ट्रीय प्रिंट इन कट्स / बदलावों के साथ नहीं जाएंगे.

ताशकंद फाइल्स में प्रमुख कलाकारों द्वारा अच्छा प्रदर्शन किया गया है. श्वेता बसु, मुख्य भूमिका में बड़ी संजीदगी से अपनी भूमिका निभाती हैं और एक बहुत ही प्रतिभाशाली अदाकारा हैं, जिनपर भविष्य में नज़र रखी जानी चाहिए. पल्लवी जोशी पारपंरिक वामपंथी इतिहासकार की भूमिका में चमकती हैं. लंबे समय के बाद, नसीरुद्दीन शाह चिदंबरम जैसे किंगमेकर राजनेता के रूप में अच्छे प्रदर्शन के साथ आते हैं, और मिथुन चक्रवर्ती एक बहुत चतुर विपक्षी पार्टी प्रमुख की भूमिका में एक सक्षम काम करते हैं. साइड कैरेक्टर्स में से कुछ बहुत अच्छी तरह से नहीं गढ़े गए लेकिन फिर भी वह एक बढ़िया प्रदर्शन देते हैं.

यद्यपि कथा कुछ स्थानों पर धीमी हो जाती है और कभी-कभार लंबे-लंबे भाषणों में घूमती है, जिनमें प्रत्येक मिनट में कुछ कटौती की जा सकती थी, लेकिन इसमें आपकी रुचि रखने के लिए बहुत कुछ होता है और फिल्म मित्रोखिन आर्काइव के कुछ क्रूर अंशों के साथ समाप्त होती है, जो आपके विवेक को हिलाती है. साउंडट्रैक थोड़ा बेहतर हो सकता था क्योंकि यह कुछ स्थानों पर संघर्ष करता है, लेकिन फिर भी यह फ़िल्म साउंडट्रैक के बारे में नहीं है. यह फ़िल्म इस बारे में है कि इसके बारे में क्या बोला जा रहा है, और इसमें क्या संदेश दिया जा रहा है. विवेक रंजन अग्निहोत्री ने शास्त्री जी की मृत्यु के आसपास के सभी पक्षों को यथोचित रूप से गैर-पक्षपातपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए बहुत अच्छा कार्य किया है.

कुल मिलाकर, फिल्म एक गहरा और स्थायी प्रभाव छोड़ती है और निश्चित रूप से देखने लायक है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ‘द ताशकंद फाइल्स’ और अग्निहोत्री को मीडिया से अत्यधिक शत्रुता का सामना करना पड़ा है और कई “पत्रकारों” द्वारा दुर्व्यवहार भी किया गया है, जिन्होंने फिल्म को देखा भी नही.

फिल्म पर एक आभासी बहिष्कार भी पेशेवर फिल्म समीक्षकों द्वारा लगाया गया है ताकि किसी भी प्रचार को प्राप्त करने से रोकने की कोशिश की जा सके. जैसा कि फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती का किरदार कहता है कि यह एक युद्ध की कहानी है. जो व्यक्ति लोगों के दिमाग को नियंत्रित करता है वह राष्ट्र की नियति को नियंत्रित करता है. आधुनिक विचारों वाले “ओपिनियन मेकर्स” को जो देखना चाहिए और जो नहीं देखना चाहिए, उसके नियंत्रण में इस जर्जर प्रयास को तोड़ने का एकमात्र तरीका है, फिल्म को स्वयं देखें, अपनी समीक्षा लिखें और इसे अपने दोस्तों और परिचितों के बीच प्रसारित करें.

यह मनोरंजक फिल्म यकीनन अग्निहोत्री की अब तक की सर्वश्रेष्ठ फिल्म है. मैं इस फिल्म को 4.5 / 5 स्टार्स देता हूँ! एक उत्कृष्ट रचना!

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