मुद्दों के अकाल के बीच में चुनाव प्रभावित करते बचकाने तर्क

देश के अंदर राजनीतिक मुद्दों को लेकर हमेशा से एक बड़ी बहस चलती आई है. लोगों का अलग मत होने के पश्चात भी हमारे देश में हमेशा से एक राजनैतिक समझ रही है जिसने समय-समय पर अपने मुद्दे तय किए हैं और एक सही कैंडिडेट का चुनाव किया है. 2019 का चुनाव थोड़ा अलग है. ऐसा बहुत बार हमारे देश में देखा गया है जहां एंटी इनकंबेंसी राज करने वाली पार्टी के लिए एक बड़ा सिर दर्द होती है. आज की राजनीति में हम इस एंटी इनकंबेंसी को नहीं देख पा रहे हैं. शायद यह है ही नहीं. ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि जिस प्रकार के मुद्दों को लेकर चुनाव लड़ा जा रहा है और जैसे तर्क रखे जा रहे हैं, वह स्पष्ट रूप से यह बताते हैं कि केंद्र सरकार के खिलाफ कोई ठोस मुद्दा जनता के बीच ले जाने में विपक्ष नाकामयाब रहा है.

अभी सोशल मीडिया साइट ट्विटर पर एक ट्वीट लोग साझा कर रहे हैं. ट्वीट करने वाले का प्रोफेशनल जुड़ाव राजनीति से तो नहीं है लेकिन उनकी बातें हमेशा से ही राजनैतिक रही है. वह किसी एक पार्टी के समर्थक दिखाई देते हो या ना दिखाई देते हो लेकिन एक विचारधारा के विरोधी के रूप में अवश्य दिखाई देते हैं. अतुल खत्री नामक एक स्टैंड अप कॉमेडियन ने एक ट्वीट करते हुए देश की जनता को चेताया है. अतुल खत्री यह कहते हैं कि वोट डालने से पहले अपने उस मुसलमान मित्र को जरूर याद कर लिया करें जो ईद के समय आपको बिरयानी और सेवई खिलाता है.

समझ से परे बात यह है कि आखिर इस बात का देश के चुनाव से क्या लेना देना? किसी भी व्यक्ति की आपस में मित्रता उसके राजनीतिक विचारधारा या फिर किसी एक पार्टी की तरफ उसके समर्थन को प्रभावित करें, ऐसा जरूरी नहीं है. शायद स्टैंड अप कॉमेडियन महोदय यह भूल गए कि हमारे देश में प्रधानमंत्री का चुनाव मुद्दों पर होता है ना की रबड़ी खीर और सेवइयों के स्वादिष्ट सेवन के ऊपर. और भगवान का धन्यवाद है कि हमारे देश में ऐसा नहीं होता जहां यह होता होगा वहां के डेमोक्रेसी का क्या हाल होगा यह तो भगवान ही जाने.

ऐसे आधारहीन तथ्यों को रख कर देश के वोटरों को बहलाने वाले लोगों को चुनाव आयोग कैसे देखता है, यह तो चुनाव आयोग ही जाने. क्योंकि यह उसके कार्य क्षेत्र के अंदर आता है. लेकिन ऐसे अतार्किक बातें करने वाले लोगों को हमारा एक ही जवाब है और वह यह है कि जब आप जमीनी स्तर पर पूरी तरीके से निल बटे सन्नाटा होते हो, तभी आप ऐसे तर्कों से वोटरों को प्रभावित करने का प्रयास करते हो.

हमारे देश का वोटर हमेशा से ही सोच-समझकर वोट देने वाला रहा है. जिस प्रकार के हास्यास्पद तर्कों के आधार पर आप देश का चुनाव प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं वह नहीं होने वाला. ऐसे बचाने तर्क देकर देश के नेतृत्व का चुनाव करने का आईडिया एक स्टैंड अप कॉमेडियन की तरफ से दिए जा रहे हैं, तो यह शायद समझ में भी आता है. एक स्टैंड अप कॉमेडियन से हम कॉमेडी की ही उम्मीद कर सकते हैं. यदि यह अतुल खत्री की तरफ से कॉमेडी का एक प्रयास है तो बहुत दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि उनका यह प्रयास पूरी तरीके से विफल रहा क्योंकि यह कॉमेडी कम और ट्रेजेडी ज्यादा लग रही है. ऐसी ट्रेजडी जहां आप के पास मुद्दों का अकाल पड़ा हुआ है.

अब यह जनता को तय करना है कि वह ऐसे अतार्किक मुद्दों को कैसे हैंडल करते हैं क्योंकि जमीनी स्तर पर तो एक नारा ‘मैं भी चौकीदार हूं’ से ज्यादा तेजी से चल पड़ा है और वह है…..’आएगा तो मोदी ही!’

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